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मासिक धर्म के प्रति जागरूकता के लिए शुरू हुआ ''बी फ्री बी यू'' अभियान

Updated at : 08 Aug 2019 5:05 AM (IST)
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मासिक धर्म के प्रति जागरूकता के लिए शुरू हुआ ''बी फ्री बी यू'' अभियान

कैंपेन के लिए डॉलर इंडस्ट्रीज ने सीड के साथ किया समझौता प्रथम चरण में राज्य के 100 स्कूलों में सैनिटेरी वेंडिंग मशीन लगायेगी डॉलर कोलकाता : यूनिसेफ की स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 51 प्रतिशत महिलाओं को मासिक धर्म के समय बरतने वाली सावधानियों के प्रति सही जानकारी ही नहीं है. वह मासिक […]

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कैंपेन के लिए डॉलर इंडस्ट्रीज ने सीड के साथ किया समझौता

प्रथम चरण में राज्य के 100 स्कूलों में सैनिटेरी वेंडिंग मशीन लगायेगी डॉलर
कोलकाता : यूनिसेफ की स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 51 प्रतिशत महिलाओं को मासिक धर्म के समय बरतने वाली सावधानियों के प्रति सही जानकारी ही नहीं है. वह मासिक धर्म के दौरान घर के बुजुर्ग महिलाओं द्वारा बताये गये सुझावों का ही प्रयोग करती हैं, जो कि उनके लिए काफी नुकसानदायक है. राज्य की महिलाओं, विशेष कर छात्राओं को मासिक धर्म के प्रति जागरूक करने के लिए डॉलर इंडस्ट्रीज ने सोसाइटी फॉर सोशियो इकोनॉमिक एंड इकोलॉजिकल डेवलपमेंट (सीड) के साथ मिल कर ‘बी फ्री बी यू’ अभियान शुरू किया है, जिसके तहत वह महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सैनिटेरी नैप्किन प्रयोग करने के फायदों को बतायेंगे.
सिर्फ यही नहीं, अगर कोई महिला कपड़ों का प्रयोग करती है, तो उन्हें प्रयोग किये गये कपड़ों को क्यों व कैसे धोना चाहिए, इसकी जानकारी भी दी जायेगी. इस मौके पर डॉलर इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष अंकित गुप्ता ने बताया कि कंपनी अपने सीएसआर योजना के तहत राज्य के 100 सरकारी स्कूलाें में सैनिटेरी वेंडिंग मशीन लगाएगी, जहां 10 रुपये में तीन सैनिटेरी नैप्किन उपलब्ध होंगे.
उन्होंने बताया कि प्रत्येक वेंडिंग मशीन के इंस्टालेशन पर 20 हजार खर्च किये जायेंगे. इस मौके पर डॉलर इंडस्ट्रीज की उपाध्यक्ष वेदिका गुप्ता ने बताया कि इस योजना को लंबे समय तक चलाने के लिए छात्राओं से न्यूनतम शुल्क लिया जा रहा है. प्रथम चरण में राज्य के 100 सरकारी स्कूलों से इसकी शुरुआत की जा रही है, आने वाले समय में और भी स्कूलों में यह मशीनें लगायी जायेंगी.
पूर्वी भारत की 83 प्रतिशत महिलाएं नहीं खरीद पातीं सैनिटेरी नैप्किन : मौके पर सीड के कार्यकारी निदेशक डॉ सोमनाथ भट्टाचार्य ने कहा कि देश की 23 मिलियन छात्राएं मासिक धर्म के समय स्कूलों में नहीं जाती हैं. सिर्फ यही नहीं, 31 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं भी इस दौरान अपनी ड्यूटी पर नहीं जाती हैं. इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके प्रति लोगों की सोच क्या है. यह कोई बीमारी नहीं, सिर्फ सही जागरूकता की जरूरत है.
अगर सैनिटेरी नैप्किन का सही प्रकार से प्रयोग करें तो मासिक धर्म के दौरान भी अपने सभी कार्य आसानी से कर सकती हैं. उन्होंने बताया कि हालिया अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी भारत की लगभग 83 महिलाएं सैनिटेरी नैप्किन नहीं खरीद पातीं और ऐसे में वह महिलाएं अस्वस्थ मासिक धर्म क्रियाओं का प्रयोग करती हैं. इन महिलाओं को जागरूक करने के लिए ही यह अभियान चलाया जा रहा है.
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