‘जय श्रीराम’ के विरोध पर लोगों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक : राज्यपाल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jul 2019 3:01 AM (IST)
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अजय विद्यार्थी/नम्रता पांडेय, कोलकाता : राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने रविवार को कहा कि ‘जय श्रीराम के नारे को विवाद में लाना बहुत ही दु:खद है. राम भारत में सबके अाराध्य हैं, लेकिन जब कुछ लोगों द्वारा राजनीति के आधार पर राम का विरोध किया जाता है, तो उसकी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है. सबको इस संवेदनशील […]
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अजय विद्यार्थी/नम्रता पांडेय, कोलकाता : राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने रविवार को कहा कि ‘जय श्रीराम के नारे को विवाद में लाना बहुत ही दु:खद है. राम भारत में सबके अाराध्य हैं, लेकिन जब कुछ लोगों द्वारा राजनीति के आधार पर राम का विरोध किया जाता है, तो उसकी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है.
सबको इस संवेदनशील विषय पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्कता है, क्योंकि यह लोगों की संवेदना से जुड़ा विषय है. राज्यपाल ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत के दौरान यह बातें कहीं.
गौरतलब है कि प्रख्यात कवि, चिंतक, विचारक, आलोचक, जाने-माने साहित्यकार, कानूनविद्, राजनेता केशरीनाथ त्रिपाठी को केंद्र सरकार ने 24 जुलाई, 2014 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया था. श्री त्रिपाठी का कार्यकाल अगले सप्ताह के अंत में समाप्त हो रहा है.
केंद्र सरकार ने उनकी जगह शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात वकील और पूर्व सांसद जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया है.
उल्लेखनीय है कि जय श्रीराम के नारे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध करते हुए इसे बंगाल की संस्कृति के खिलाफ करार दिया था और विरोध में ‘जय हिंद, जय बांग्ला’ का नारा दिया है.
यह पूछे जाने पर कि प्राय: ही आरोप लगते हैं कि केंद्र सरकार राज्य के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप कर रही है, श्री त्रिपाठी ने कहा : फेडरल स्ट्रक्चर में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है. हिंदी और बांग्ला के बीच विवाद के संबंध में श्री त्रिपाठी ने कहा: हिंदी और बांग्ला में कोई विवाद नहीं है. दोनों के मूल में संस्कृत है. दोनों ही भाषाएं संस्कृत पर आधारित हैं. इसलिए विवाद की कोई गुंजाइश नहीं है.
व्यावहारिक ढंग से किसी भाषा का प्रयोग अधिक होता है, लेकिन कभी मतभेद था ही नहीं. व्यावहारिक कठिनाइयों से अधिक कुछ नहीं है. इसमें कोई विरोधाभास नहीं है. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में श्री त्रिपाठी का कई मुद्दों पर राज्य सरकार से समय-समय पर मतभेद रहे हैं.
राज्यपाल द्वारा उनकी कविता ‘ मुझ पर प्रश्न उठाने वालों, मुझ पर दोष लगाने वालों… का शनिवार को भारतीय भाषा परिषद में पाठ किये जाने पर पूछे जाने पर कि इस कविता का क्या उनके जीवन से कोई संबंध है, श्री त्रिपाठी ने कहा : ये कविता की प्रतीकात्मक पंक्तियां हैं. किसी के ऊपर निराधार आरोप लगे तो कष्ट पहुंचता है. जब मन को कष्ट पहुंचता है, तो व्यक्ति रोने लगता है. आंखों से आंसू निकलने लगते हैं.
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