डगर के साथी हमें तुम याद रखना, तुम याद रखना...
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Jul 2019 2:13 AM
कोलकाता: संवेदना और अनुभूति जब गुनगुनाहट बन कर शब्दों में प्रकट होती है तब वह कविता बन जाती है. भाव का भाषा से मिलन ही कविता का प्राकट्य है. यह हृदय की अनुभूतियों की ईमानदार अभिव्यक्ति है. ये बातें भारतीय संस्कृति संसद में मेरी दृष्टि मेरी सृष्टि व्याख्यानमाला में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कही. वह […]
कोलकाता: संवेदना और अनुभूति जब गुनगुनाहट बन कर शब्दों में प्रकट होती है तब वह कविता बन जाती है. भाव का भाषा से मिलन ही कविता का प्राकट्य है. यह हृदय की अनुभूतियों की ईमानदार अभिव्यक्ति है. ये बातें भारतीय संस्कृति संसद में मेरी दृष्टि मेरी सृष्टि व्याख्यानमाला में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कही. वह अपनी कविताओं की पुनरावृति सुन कर भावुक हो उठे. खास कर ‘जब डगर के साथी हमें तुम याद रखना’ की बच्चों ने भावमय प्रस्तुति दी.
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