कोलकाता : बंगाल में छह माह में सबसे ज्यादा हुईं राजनीतिक हत्याएं : दिलीप

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Dec 2018 2:00 AM

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कोलकाता : राज्य में हर रोज हत्याएं हो रही हैं, लेकिन पंचायत चुनाव से लेकर अब तक छह से सात माह में सबसे ज्यादा राजनीतिक हत्याएं हुई हैं. करीब 90 से ज्यादा राजनीतिक कर्मियों की हत्याएं हुई, जिनमें 38 भाजपा कार्यकर्ताओं की हुई हैं. ये बातें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहीं. वे सोमवार […]

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कोलकाता : राज्य में हर रोज हत्याएं हो रही हैं, लेकिन पंचायत चुनाव से लेकर अब तक छह से सात माह में सबसे ज्यादा राजनीतिक हत्याएं हुई हैं. करीब 90 से ज्यादा राजनीतिक कर्मियों की हत्याएं हुई, जिनमें 38 भाजपा कार्यकर्ताओं की हुई हैं. ये बातें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहीं. वे सोमवार को राजभवन में राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से रोजवैली चिटफंड में पीड़ित ग्राहकों और निवेशकों की मांगों को लेकर मुलाकात करने पहुंचे थे.
चिटफंड पीड़ितों के एक प्रतिनिधि दल भी साथ थे. राज्यपाल से मिलकर उन्होंने चिटफंड पीड़ितों की सारी समस्याओं को रखा. साथ ही भाजपा समर्थकों पर हो रहे हमले के विषयों को भी उन्होंने रखा. बाहर निकलते समय मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि रोजवैली चिटफंड पीड़ित निवेशकों और ग्राहकों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
वे एक माह से ठंड में धरना पर बैठे है लेकिन राज्य सरकार कोई समर्थन नहीं कर रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि रविवार को दुर्गापुर में एक भाजपा कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गयी. पांच कार्यकर्ता जख्मी हुए. इस मामले में भी राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग किये है. उन्होंने कहा कि रोजवैली चिटफंड मामले में पीड़ितों के लिए जिस प्रकार आंध्रप्रदेश और ओडिशा में रोजवैली की सम्पत्तियों को बिक्री कर रुपये लौटाये जा रहे है, उसी तरह से यहां भी रुपये लौटाये जाये.
कोर्ट राज्य सरकार को जबरदस्ती कान पकड़ कर बैठायेगी
रथयात्रा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोर्ट राज्य सरकार की कान पकड़ी हुई है और जबर्दस्ती बैठक करायेगी. कोई बहाना नहीं चलेगा. मुझे कोर्ट पर पूरा विश्वास है. कोर्ट सहीं दिशा में काम कर रही है. रथयात्रा को लेकर असमंजस्य पर उन्होंने कहा कि इसके पहले भी कई राज्यों में रथयात्रा हुई लेकिन किसी तरह का बाधा नहीं आया. बंगाल में यहां की सरकार भाजपा से डर रही है, जिस कारण से ऐसा कर रही है.
राज्य सरकार ने डीईओ विभाग को बनाया विकलांग
उन्होंने कहा कि रोजवैली मामले में बहुत सारी सम्पत्ति ईडी के पास लिस्टेड नहीं है, उसे लिस्टेड करना होगा. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने चालाकी से दोषियों को बचाने के लिए 2004 से फाइनेंस विभाग के साथ रही डीईओ विभाग को 14 जुलाई 2016 को होम डिपार्टमेंट से जोड़ दी.
अभी 276 अधिकारियों में 200 पद खाली है, पांच एसपी के पद भी खाली है, इस तरह से जानबूझकर विभाग को विकलांग बना दिया गया है, ताकि जांच सहीं तरह से नहीं हो पाये और दोषियों को बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि इन सारे मामलों में राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि वे राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे और इस मामले में सही कदम उठायेंंगे.
सारदा मामले में दोषियों को बचाना चाह रही है राज्य सरकार
साथ ही सीबीआई दफ्तर में सारदा मामले में बुलाये गये तृणमूल कांग्रेस के महासचिव सुब्रत बक्शी के द्वारा भाजपा पर कटाक्ष रूपी बयान के प्रसंग में उन्होंने कहा कि जब बुलाया जाता है, तभी वे प्रश्न उठाते हैं और नहीं बुलाने पर मीडिया प्रश्न उठाती है. इन सबके लिए पश्चिम बंगाल की सरकार जिम्मेदार है. सरकार जानबूझकर मामले को लंबित कर दोषियो‍ं को बचाना चाह रही है.
सीबीआई और ईडी पर हमलोगों को विश्वास है. केंद्र सरकार की एजेंसी जांच कर रही है लेकिन राज्य सरकार सपोर्ट नहीं कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोनिया गांधी के प्रसंग में दिये गये बयान पर पूछेजाने पर उन्होंने कहा कि विधवा को विधवा नहीं तो क्या सधवा कहा जायेगा.
राज्यपाल से मिलकर भाजपा ने रोजवैली चिटफंड और भाजपा समर्थकों पर हो रहे हमलों से अवगत कराया
कोलकाता. राज्य में हर रोज हत्याएं हो रही हैं, लेकिन पंचायत चुनाव से लेकर अब तक छह से सात माह में सबसे ज्यादा राजनीतिक हत्याएं हुई हैं. करीब 90 से ज्यादा राजनीतिक कर्मियों की हत्याएं हुई, जिनमें 38 भाजपा कार्यकर्ताओं की हुई हैं. ये बातें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहीं.
वे सोमवार को राजभवन में राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से रोजवैली चिटफंड में पीड़ित ग्राहकों और निवेशकों की मांगों को लेकर मुलाकात करने पहुंचे थे. चिटफंड पीड़ितों के एक प्रतिनिधि दल भी साथ थे. राज्यपाल से मिलकर उन्होंने चिटफंड पीड़ितों की सारी समस्याओं को रखा. साथ ही भाजपा समर्थकों पर हो रहे हमले के विषयों को भी उन्होंने रखा.
बाहर निकलते समय मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि रोजवैली चिटफंड पीड़ित निवेशकों और ग्राहकों को नजरअंदाज किया जा रहा है. वे एक माह से ठंड में धरना पर बैठे है लेकिन राज्य सरकार कोई समर्थन नहीं कर रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि रविवार को दुर्गापुर में एक भाजपा कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गयी.
पांच कार्यकर्ता जख्मी हुए. इस मामले में भी राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग किये है. उन्होंने कहा कि रोजवैली चिटफंड मामले में पीड़ितों के लिए जिस प्रकार आंध्रप्रदेश और ओडिशा में रोजवैली की सम्पत्तियों को बिक्री कर रुपये लौटाये जा रहे है, उसी तरह से यहां भी रुपये लौटाये जाये.
कोर्ट राज्य सरकार को जबरदस्ती कान पकड़ कर बैठायेगी
रथयात्रा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोर्ट राज्य सरकार की कान पकड़ी हुई है और जबर्दस्ती बैठक करायेगी. कोई बहाना नहीं चलेगा. मुझे कोर्ट पर पूरा विश्वास है. कोर्ट सहीं दिशा में काम कर रही है. रथयात्रा को लेकर असमंजस्य पर उन्होंने कहा कि इसके पहले भी कई राज्यों में रथयात्रा हुई लेकिन किसी तरह का बाधा नहीं आया. बंगाल में यहां की सरकार भाजपा से डर रही है, जिस कारण से ऐसा कर रही है.
राज्य सरकार ने डीईओ विभाग को बनाया विकलांग
उन्होंने कहा कि रोजवैली मामले में बहुत सारी सम्पत्ति ईडी के पास लिस्टेड नहीं है, उसे लिस्टेड करना होगा. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने चालाकी से दोषियों को बचाने के लिए 2004 से फाइनेंस विभाग के साथ रही डीईओ विभाग को 14 जुलाई 2016 को होम डिपार्टमेंट से जोड़ दी.
अभी 276 अधिकारियों में 200 पद खाली है, पांच एसपी के पद भी खाली है, इस तरह से जानबूझकर विभाग को विकलांग बना दिया गया है, ताकि जांच सहीं तरह से नहीं हो पाये और दोषियों को बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि इन सारे मामलों में राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि वे राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे और इस मामले में सही कदम उठायेंंगे.
सारदा मामले में दोषियों को बचाना चाह रही है राज्य सरकार
साथ ही सीबीआई दफ्तर में सारदा मामले में बुलाये गये तृणमूल कांग्रेस के महासचिव सुब्रत बक्शी के द्वारा भाजपा पर कटाक्ष रूपी बयान के प्रसंग में उन्होंने कहा कि जब बुलाया जाता है, तभी वे प्रश्न उठाते हैं और नहीं बुलाने पर मीडिया प्रश्न उठाती है. इन सबके लिए पश्चिम बंगाल की सरकार जिम्मेदार है.
सरकार जानबूझकर मामले को लंबित कर दोषियो‍ं को बचाना चाह रही है. सीबीआई और ईडी पर हमलोगों को विश्वास है. केंद्र सरकार की एजेंसी जांच कर रही है लेकिन राज्य सरकार सपोर्ट नहीं कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोनिया गांधी के प्रसंग में दिये गये बयान पर पूछेजाने पर उन्होंने कहा कि विधवा को विधवा नहीं तो क्या सधवा कहा जायेगा.
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