कोलकाता : अब मोबाइल पर प्रेस्क्रिप्शन दिखा नहीं खरीद सकेंगे दवा

Updated at : 21 Oct 2018 9:29 AM (IST)
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कोलकाता : अब मोबाइल पर प्रेस्क्रिप्शन दिखा नहीं खरीद सकेंगे दवा

ड्रग कंट्रोल ने शुरू की कार्रवाई कोलकाता : महानगर कोलकाता समेत राज्य के सभी जिलों में अमूमन ऐसा होता रहा है कि दैनिक तौर पर इस्तेमाल होनेवालीं दवाइयों के लिए चिकित्सक का प्रेस्क्रिप्शन मोबाइल में दिखाकर लोग दवाइयां खरीदते रहे हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होनेवाला है. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर […]

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ड्रग कंट्रोल ने शुरू की कार्रवाई
कोलकाता : महानगर कोलकाता समेत राज्य के सभी जिलों में अमूमन ऐसा होता रहा है कि दैनिक तौर पर इस्तेमाल होनेवालीं दवाइयों के लिए चिकित्सक का प्रेस्क्रिप्शन मोबाइल में दिखाकर लोग दवाइयां खरीदते रहे हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होनेवाला है. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर ड्रग कंट्रोल शाखा ने विशेष तौर पर इसके खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू कर दी है.
शनिवार को राज्य ड्रग कंट्रोल निदेशक स्वपन मंडल ने बताया कि मोबाइल में फोटो देखकर दवा बेचना एक आपराधिक कार्य है और इससे न केवल लोगों की जान को खतरा है, बल्कि चिकित्सकों को भी नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए ड्रग कंट्रोल विभाग ने जगह-जगह छापेमारी अभियान की शुरुआत की है.
दुर्गा पूजा के बीच शुक्रवार को कोलकाता से सटे बेलघरिया में इस तरह का अभियान चलाया गया था. इसके बाद दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली और महानगर कोलकाता के इलाके में औचक अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ऐसा करनेवाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके. इसके बाद दवा विक्रेता भी सतर्क हो गये हैं. अब तो ड्रग कंट्रोल विभाग की ओर से भी स्पष्ट कर दिया गया है कि इसके खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई की जायेगी, इसलिए मोबाइल में फोटो खींचकर या किसी भी पेपर पर दवा का नाम लिखकर ले आने वालों को दवा बिक्री नहीं की जा रही है.
मादक तस्करों को नहीं मिलेगा मौका
राज्य ड्रग कंट्रोल निदेशक स्वपन मंडल ने शनिवार को इस बारे में बताया कि कई ऐसी दवाइयां हैं, जिनमें प्रतिबंधित मादक का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में अगर बिना चिकित्सकीय प्रेस्क्रिप्शन के इसे बेचा जाने लगेगा, तो उन दवाइयों को खरीदकर लोग मादक पदार्थों के रूप में गैरकानूनी तरीके से बिक्री करने लगेंगे.
इसीलिए यह नियम बनाया गया है कि चिकित्सक के पेपर पर लिखे प्रेस्क्रिप्शन देखकर ही इन दवाइयों को बेचा जाये. उसमें जितनी संख्या लिखी गयी है, जितने दिनों बाद लिखा गया है, उतने दिनों पर ही बेचा जाता है. इससे दवाइयों के मादक पदार्थ के रूप में इस्तेमाल को रोका जा सकता है.
उन्होंने इसके कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए बताया कि मोबाइल पर फोटो दिखाकर अगर दवाइयों की बिक्री होती रहेगी, तो इसका गैरकानूनी इस्तेमाल हो सकता है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति एक प्रेस्क्रिप्शन को एक साथ मोबाइल के जरिए ना केवल पूरे राज्य बल्कि देश के किसी भी हिस्से में इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे में जिन दवाइयों को दूसरे देशों में या किसी भी हिस्से में मादक पदार्थ की तरह इस्तेमाल किया जाता है, वहां बड़ी संख्या में इन दवाइयों की आपूर्ति मेडिकल स्टोर से खरीद कर ही की जाने लगेगी. इसीलिए ड्रग कंट्रोल विभाग ने इसके खिलाफ सख्ती बरतनी शुरू कर दी है.
हालांकि उनसे जब यह पूछा गया कि कई ऐसी ऐप आधारित इ-कॉमर्स कंपनियां हैं, जो दवा का प्रेस्क्रिप्शन फोटो खींचकर अपलोड करने के बाद दवाइयां भेज देती हैं. इस पर उन्होंने बताया कि इसके लिए एक प्रावधान है, एक प्रेस्क्रिप्शन पर केवल एक जगह ही दवाइयों को भेजा जाता है.
अगर वही प्रेस्क्रिप्शन किसी दूसरी जगह से आता है, तो इन कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि इसके बारे में पुलिस को जानकारी दें. इसीलिए वहां इस तरह का गैरकानूनी इस्तेमाल की आशंका नहीं बचती है.
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