समलैंगिक संबंधों को मान्यता पर बोली देश की पहली ट्रांसजेंडर प्रिंसिपल मानबी बंदोपाध्याय

कोलकाता: सहमति से समलैंगिक संबंध को भादसं की धारा 377 के तहत अपराध की श्रेणी से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोलकाता के समलैंगिकों ने स्वागत किया. देश के किसी कॉलेज की पहली ट्रांसजेंडर प्राचार्य मानबी बंदोपाध्याय ने कहा कि यह एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के लिए नया सवेरा है. […]
कोलकाता: सहमति से समलैंगिक संबंध को भादसं की धारा 377 के तहत अपराध की श्रेणी से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोलकाता के समलैंगिकों ने स्वागत किया. देश के किसी कॉलेज की पहली ट्रांसजेंडर प्राचार्य मानबी बंदोपाध्याय ने कहा कि यह एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के लिए नया सवेरा है.
उन्होंने गुरुवार को कहा कि इस फैसले से समुदाय का हर सदस्य समाज में अपने अधिकार सम्मत स्थान का दावा कर पायेगा. कृष्णानगर महिला कॉजेल की प्राचार्य बंदोपाध्याय ने कहा, ‘मैं 2001 से ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हूं. मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन कभी हार नहीं मानी.’
उन्होंने कहा, ‘मुझे बधाई के ढेरों कॉल आ रहे हैं. यह इस आंदोलन से जुड़े हम सभी लोगों के लिए नये युग और नया सवेरा जैसा है.’
वर्ष 2015 में प्राचार्य बनने वाली बंदोपाध्याय ने शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और विद्यार्थियों का सहयोग नहीं मिलने पर अगले ही साल इस्तीफा दे दिया था. लेकिन, उनका इस्तीफा नामंजूर हो गया और उन्होंने पिछले साल जनवरी में कार्यभार फिर संभाल लिया.
पश्चिम बंगाल विकास बोर्ड की सदस्य रंजीता सिन्हा ने कहा कि केवल एलजीबीटीक्यू समुदाय ही खुश नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों ने इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है. अभिनेता सुजोय प्रसाद चटर्जी ने फेसबुक पर पोस्ट पर लिखा, ‘हम जीत गये’. डांस कोरियोग्राफर सुदर्शन चक्रवर्ती ने भी इस फैसले पर खुशी जतायी.
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