कोलकाता : बच्चों की गुरुदक्षिणा से होगा ‘हेड सर’ का इलाज
Updated at : 04 Sep 2018 9:41 AM (IST)
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लीवर सिरोसिस से पीड़ित प्रधानाध्यापक की मदद को पॉकेटमनी से जुटा लिए चार लाख शिव कुमार राउत कोलकाता : कुछ रिश्तों और उसकी गरिमा को समय की परिधि में बांधा नहीं जा सकता है. ऐसा ही एक रिश्ता है गुरु और शिष्य का. इसकी एक मिसाल दक्षिण 24 परगना जिले के काशीपुर किशोर भारती विद्यालय […]
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लीवर सिरोसिस से पीड़ित प्रधानाध्यापक की मदद को पॉकेटमनी से जुटा लिए चार लाख
शिव कुमार राउत
कोलकाता : कुछ रिश्तों और उसकी गरिमा को समय की परिधि में बांधा नहीं जा सकता है. ऐसा ही एक रिश्ता है गुरु और शिष्य का. इसकी एक मिसाल दक्षिण 24 परगना जिले के काशीपुर किशोर भारती विद्यालय में देखने को मिली. लगभग 1500 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल में नर्सरी से लेकर दसवीं तक की पढ़ाई होती है. यहां आज भी विद्यार्थियों और शिक्षक के बीच का संबंध बड़ा ही प्यारा है.
शिक्षक दिवस पर सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी पॉकेटमनी इकट्ठा करके अपने हेड सर (प्रधानाध्यापक) को भेंट किया वह भी उनके इलाज के लिए. बच्चों ने चार लाख की राशि जुटायी है. क्योंकि उनके स्कूल के हेड सर यानी प्रधानाध्यापक पलास गांगुली पिछले 7 वर्षों से लीवर सिरोसिस की समस्या से जूझ रहे हैं. अब वह सिरोसिस के आठवें स्टेज में पहुंच चुके हैं. ऐसे में जीवित रहने के लिए उन्हें लीवर ट्रांसप्लांट कराने की जरूरत है.
एसएसकेएम के चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर चिकित्सा के लिए दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांट करवाने की सलाह दी है. गौरतलब है कि गांगुली ब्रेन टीबी, हर्निया समेत अन्य कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. उनके लीवर के दाहिने हिस्सा का प्रत्यारोपण किया जायेगा. उनकी पत्नी लीवर डोनेट करेंगी. ट्रांसप्लांट पर करीब 25 से 27 लाख रुपये का खर्च आयेगा 17 सितंबर को यह ट्रांसप्लांट किया जायेगा. इससे पहले 9 तारीख को उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया जायेगा.
सर्जरी के लिए जमीन बेची :
बता दें कि लीवर प्रत्यारोपण के लिए पलास गांगुली ने अपनी पुश्तैनी 15 कट्ठा जमीन को 15 लाख रुपये में बेच दी है. पलास गांगुली कहते हैं : मेरे घर में बूढ़े पिता, पत्नी व एक पुत्र हैं. मैंने अपनी जमीन-जायदाद तो सब कुछ बेच दी है.
लेकिन फिर भी इलाज खर्च नहीं जुटा पाया. भला हो उन बच्चों का जिन्होंने मेरी मदद की. हालांकि मैंने मुख्यमंत्री व राज्यपाल दफ्तर में आवेदन किया है. लेकिन अब तक हमें उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिली है. अब तक 19 लाख रुपये की व्यवस्था हो सकी है. शेष रकम जुटाने की कोशिश कर रहा हूं.
स्कूल के बच्चे बने मसीहा : पलास गांगुली कहते हैं कि ये नन्हें विद्यार्थी मेरे लिए तो मसीहा हैं. मैंने कभी सोचा नहीं था कि ये नन्हें मासूम इतना बड़ा काम करेंगे. मैं तो उनकी इस सहायता से भावुक भी हूं और खुश हूं कि रवींद्र आदर्श को हमारे बच्चों ने ना सिर्फ सीखा बल्कि उसके अनुसार काम भी कर रहे हैं. यही तो सच्ची शिक्षा है.
वहीं स्कूल की कक्षा 10 की छात्रा निशिता परबीन तथा जयदीप मंडल ने बताया, ‘हमारे सर हम बच्चों के रोल मॉडल हैं. वह हमेशा हमें नेकी-सच्चाई के राह पर चलने को कहते हैं. एक बार असेंबली के दौरान ही उनके मुंह से खून निकलने लगा. तब जाकर हमें पता चला कि हेड सर को लीवर सिरोसिस है वह भी आठवां स्टेज में पहुंच चुके हैं.
लेकिन इलाज में बहुत पैसे खर्च होगें तो हम बच्चों ने एक, दो, तीन, चार, पांच रुपये करके अपनी पॉकेटमनी इकट्ठी करनी शुरू कर दी. फिर उसके बाद अपने-अपने मम्मी-पापा और आस-पास वाले लोगों से भी सहयोग मांगा. हमें खुशी है कि सभी लोगों ने हमारी मदद की. बस जल्द-से-जल्द हेड सर का इलाज हो जाये. हम यही चाहते हैं. यही हमारा शिक्षक दिवस सेलिब्रेशन है ‘.
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