चंदन मित्रा समेत कई दिग्गज थाम सकते हैं तृणमूल कांग्रेस का दामन

Updated at : 19 Jul 2018 8:54 AM (IST)
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चंदन मित्रा समेत कई दिग्गज थाम सकते हैं तृणमूल कांग्रेस का दामन

कोलकाता :तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस की सभा इस बार संकल्प दिवस के रूप में मनाया जायेगा. इसके लिए तैयारी जोर शोर से चल रही है. खुद सांसद अभिषेक बनर्जी दिन रात एक किये हुए हैं, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौरा करते […]

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कोलकाता :तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस की सभा इस बार संकल्प दिवस के रूप में मनाया जायेगा. इसके लिए तैयारी जोर शोर से चल रही है. खुद सांसद अभिषेक बनर्जी दिन रात एक किये हुए हैं, क्योंकि हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौरा करते हुए लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल से 22 सीटों का लक्ष्य प्रदेश भाजपा को दे दिया है. ऐसे में फेडरल फ्रंट के गठन की कवायद कर रहीं ममता बनर्जी को उनके ही घर में जबरदस्त चुनौती मिल रही है. इसकी काट निकालने के लिए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शहीद दिवस की सभा में रिकॉर्ड भीड़ जुटाने की कोशिश में हैं.

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शहीद दिवस की सभा को आकर्षक बनाने के लिए सुश्री बनर्जी विरोधी दलों के कई दिग्गजों को तृणमूल कांग्रेस में स्थान देने जा रही है. इनमें भाजपा के राज्यसभा सांसद चंदन मित्रा और माकपा के सांसद ऋतव्रत के अलावा माकपा के वरिष्ठ नेता मइनुल हसन को भी शहीद दिवस की सभा में शामिल कराने की चर्चा है. चंदन मित्रा के तृणमूल में जाने की चर्चा पर प्रदेश भाजपा के एक नेता ने नाम नहीं छापने की ‍शर्त पर कहा कि चंदन मित्रा को केंद्र सरकार से पायोनियर के लिए फंड चाहिए, जो केंद्र सरकार की कसौटी पर खरी नहीं उतरने के कारण खारिज हो गया है. इससे वह नाराज चल रहे हैं.

इसलिए पिछले दिनों वह भाजपा की आइटी सेल की खिंचाई करते हुए उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को लेकर भाजपा को कठघरे में खड़ा कर दिया था. उनके निशाने पर उत्तर प्रदेश सरकार भी थी. उनके बदले बर्ताव से भाजपा नेतृत्व नाराज चल रहा है. वहीं, निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. अब राज्य सरकार ने उन्हें आदिवासी विकास कमिटी का संयोजक बना दिया है. ऐसे में उनके तृणमूल कांग्रेस में जाने को लेकर कोई शक नहीं है.

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अलबत्ता माकपा के पूर्व सांसद मइनुल हसन भाजपा को रोकने के लिए माकपा पर तृणमूल कांग्रेस के साथ रिश्ता सुधारने की मांग अर्से से कर रहे थे. जिसे माकपा ने खारिज कर दिया. लिहाजा उनका भी तृणमूल कांग्रेस में जाना तय माना जा रहा है. इसके अलावा कांग्रेस के तीन विधायक सीधे पार्थ चटर्जी के संपर्क में हैं, जिनको तृणमूल कांग्रेस की ओर से सभा में आने का आधिकारिक न्यौता दिया गया है.

21 जुलाई को मेट्रो में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था

तृणमूल कांग्रेस की ओर से 21 जुलाई को आयोजित होनेवाली शहीद दिवस सभा के मद्देनजर मेट्रों में यात्रियों की भारी भीड़ की संभावना है. ऐसे में मेट्रो रेलवे ने समूची सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है, ताकि उस दिन किसी भी अप्रिय घटना को ट्रेन, प्लेटफॉर्म या स्टेशन परिसर में रोका जा सके. कुल 350 आरपीएफ कर्मियों को विभिन्न मेट्रो स्टेशनों में सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक तैनात किया जायेगा. अन्य दिनों में करीब 250 स्टाफ तैनात रहते हैं. 21 जुलाई 104 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी रहेंगे, जिन्हें 14 अलग-अलग मेट्रो स्टेशनों में तैनात किया जायेगा. इसके अलावा सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक स्पेशल स्क्वाड मुस्तैद रहेगा. तीन महिला अधिकारी व 10 महिला कॉन्सटेबल तैनात रहेंगे और वह विभिन्न मेट्रो स्टेशनों में भ्रमण करते हुए नजर रखेंगे.

21 की सभा में तृणमूल सांसदों की मौजूदगी पर संशय

21 जुलाई को शहीद दिवस की सभा 25 साल पूरा करेगी. हर साल इस दिन को तृणमूल कांग्रेस बड़े पैमाने पर मनाती है, लेकिन इस बार की सभा में सांसदों की मौजूदगी को लेकर संशय खड़ा हो गया है. वजह है संसद में पेश अविश्वास प्रस्ताव. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 20 जुलाई का दिन मुकर्रर किया है. ऐसे में प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेने और वोट देने के दौरान जो वक्त लगेगा. उसके बाद दूसरे दिन दिल्ली से कोलकाता पहुंचकर सभा स्थल तक पहुंचने में काफी संशय दिख रहा है. हालांकि ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि संसद को अग्राधिकार देना होगा.सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष से 21 जुलाई की सभा का हवाला देते हुए चर्चा के लिए दिन बढ़ाने या फिर पहले करने की अपील की थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया. ऐसे में खबर है कि जो सांसद कोलकाता नहीं पहुंच पायेंगे वह दिल्ली में ही अपने स्तर पर शहीद दिवस की सभा करेंगे और शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे.
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