सफल हृदय प्रत्यारोपण : नये दिल के संग स्कूल चले दिलचंद, अंगदान के प्रति करेंगे जागरूक

Updated at : 07 Jul 2018 6:52 PM (IST)
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सफल हृदय प्रत्यारोपण : नये दिल के संग स्कूल चले दिलचंद, अंगदान के प्रति करेंगे जागरूक

– ट्रांसप्लांट के छह सप्ताह बाद डॉक्टरों ने बताया फिट कोलकाता : एक बार फिर से दिलचंद की जिंदगी पटरी पर लौट आयी है. उनके हृदय प्रत्यारोपण को लगभग डेढ़ महीने हो चुके हैं. पेशे से प्राथमिक स्कूल के शिक्षक दिलचंद जिंदादिली के साथ रोजाना स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाना भी शुरू कर चुके हैं. […]

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– ट्रांसप्लांट के छह सप्ताह बाद डॉक्टरों ने बताया फिट

कोलकाता : एक बार फिर से दिलचंद की जिंदगी पटरी पर लौट आयी है. उनके हृदय प्रत्यारोपण को लगभग डेढ़ महीने हो चुके हैं. पेशे से प्राथमिक स्कूल के शिक्षक दिलचंद जिंदादिली के साथ रोजाना स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाना भी शुरू कर चुके हैं. शनिवार को फोर्टिस अस्पताल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ के के मनदाना ने बताया कि हृदय प्रत्यारोपण के छह सप्ताह बाद दिलचंद का हेल्थ चेकअप किया गया है.

डॉक्‍टर ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है. ईसीजी, इकोकार्डियोग्राम, रक्त जांच आदि जांचों में कहीं कोईं गड़बड़ी नहीं पायी गयी है. हालांकि अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीज को संक्रमित होने का जोखिम बना रहता है. इसलिए तीन महीने के बाद फिर से हेल्थ चेकअप व बायोप्सी किया जायेगा. लेकिन फिलहाल वह पूरी तरह फिट है.

वहीं दिलचंद ने भावुक होते हुए कहा कि, मैं उस मां से मिलकर उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं जिसके कलेजे के टुकड़े का दिल मुझ में धड़क रहा है. इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को आभार व्यक्त किया. जोश के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अब मैं भी लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करूंगा. ताकि हर दिलचंद को नयी जिंदगी मिल सके.

विदित हो कि झारखंड के देवघर के सोनारायठाढ़ी के दिलचंद सिंह का हृदय प्रत्यारोपण फोर्टिस हॉस्पिटल में किया गया था. पूर्वी भारत में ऐसा पहली बार हुआ था, जब चार्टर्ड प्लेन व ग्रीन कॉरिडोर बना कर दूसरे राज्य से जीवित हृदय को लाकर किसी अन्य राज्य के अस्पताल में प्रत्यारोपित किया गया था.

इस प्रक्रिया में पांच राज्यों कर्नाटक, झारखंड, तमिलनाडु, दिल्ली व पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग तथा चेन्नई, बेंगलुरु व कोलकाता के डॉक्टर शामिल थे. डॉ तापस राय चैधरी, डॉ के के मनदाना व डॉ के आर बालाकृष्ण ने पूरी व्यवस्था से लेकर ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी.

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