टैक्सी किराया बढ़ा पर रिफ्यूजल जारी
Updated at : 28 Jun 2018 2:03 AM (IST)
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कोलकाता : राज्य सरकार ने परिवहन उद्योग की परेशानियों को देखते हुए बस व टैक्सी के किराये में वृद्धि करने का फैसला किया. परिवहन संगठनों की ओर से काफी दिनों से इसकी मांग की जा रही थी. यहां तक कि किराये में वृद्धि के लिए इन संगठनों ने हड़ताल की धमकी भी दी थी. पर […]
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कोलकाता : राज्य सरकार ने परिवहन उद्योग की परेशानियों को देखते हुए बस व टैक्सी के किराये में वृद्धि करने का फैसला किया. परिवहन संगठनों की ओर से काफी दिनों से इसकी मांग की जा रही थी. यहां तक कि किराये में वृद्धि के लिए इन संगठनों ने हड़ताल की धमकी भी दी थी. पर किराये में वृद्धि के बाद भी आम जनता को आज भी रिफ्यूजल जैसी समस्या से आये दिन दो-चार होना पड़ रहा है. प्रस्तुत है प्रभात खबर की ओर से मार्निंग वॉकरो से बातचीत के प्रमुख अंश.
सुनील अग्रवाल कहते हैं कि किराया बढ़ने पर भी टैक्सी चालकों का रवैया वैसा ही है. मीटर टैक्सी भी शहर में फिक्स रेट में ही चलती है. मीटर का ऐसे में क्या उपयोग है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए.घनश्याम शर्मा ने कहा कि आज कल कैब के प्रति लोगों का रुझान अधिक है. जिससे बस और टैक्सी को हानि हो रही है. इसीलिए टैक्सी वाले मनमना भाड़ा वसूलते हैं.
गुलाब जायसवाल ने कहा कि टैक्सीवालों की मनमानी की वजह से ही कैब को लोग विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.अभय कुमार टिकमानी बताते हैं कि भाड़ा बढ़ने पर भी हाल पहले के जैसा ही है. काेलकाता में घंटों तक ट्रैफिक जाम सहित बस तथा टैक्सी चालकों की मनमानी आम बात है.
ओम दरयानी ने बताया कि बस और टैक्सी का किराया बढ़ा पर अभी भी राहत जैसी कोई बात नहीं है. बसें अनियंत्रित ढंग से चलती हैं और टैक्सी वाले अपने मन की करते हैं.
राजमणि साव ने कहा कि टैक्सीवाले आज भी नो रिफ्यूजल को नहीं मानते हैं. सरकार और प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है.
पवित्र कुमार यादव ने कहा कि आजकल टैक्सी की जगह कैब का चलन आम है. इसका मुख्य कारण टैक्सीवालों की मनमानी है.
राज देव शर्मा कहते हैं कि सरकार के साथ टैक्सी वालों को भी इस बाबत सोचना होगा. नहीं तो आनेवाले समय में टैक्सी के चलन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है.
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