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भाजपा-संघ से डरीं ममता! माकपा, कांग्रेस से मिलायेंगी हाथ, विमान बसु संग की बैठक

Updated at : 18 Jul 2017 1:03 PM (IST)
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भाजपा-संघ से डरीं ममता! माकपा, कांग्रेस से मिलायेंगी हाथ, विमान बसु संग की बैठक

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं. उन्होंने कांग्रेस और वामदलों को सचेत किया है कि यदि अभी नहीं संभले, तो भाजपा और संघ को रोकना मुश्किल हो जायेगा. उन्होंने दोनों दलों से आग्रह किया है कि […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं. उन्होंने कांग्रेस और वामदलों को सचेत किया है कि यदि अभी नहीं संभले, तो भाजपा और संघ को रोकना मुश्किल हो जायेगा. उन्होंने दोनों दलों से आग्रह किया है कि इस मुश्किल घड़ी में वे तृणमूल कांग्रेस का हाथ मजबूत करें, ताकि सांप्रदायिक ताकतों को हावी होने से रोका जा सके.

मुख्यमंत्री ने दोनों पार्टियों से कहा है कि वे इस बात को सुनिश्चित करें कि उनका कोई भी नेता भाजपा में शामिल न हो. लोकसभा चुनावों में पार्टी छोड़ कर गये नेताअों की घरवापसी पर चर्चा करने के लिए विमान बसु के नेतृत्व में वामदलों के नेता राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने पहुंचे थे. मुलाकात विधानसभा के स्पीकर विमान बंद्योपाध्याय के कार्यालय में हुई. इसमें कांग्रेस और वामदलों के नेता शामिल थे.

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मुलाकात के दौरान ममता बनर्जी और वामदलों के नेताअों ने चाय के साथ फिश फ्राई का भी आनंद लिया. इस दौरान ममता दी ने कहा, ‘मैंने पहले भी कहा था कि अपने घर को संभालें. भाजपा सिर उठा रही है.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले भी कहा था. एक बार फिर कह रही हूं कि नरेंद्र मोदी सरकार से मुकाबले के लिए यदि जरूरत पड़ी तो मैं कोलकाता स्थित सीपीएम मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट जाकर चर्चा करने के लिए तैयार हूं.’

तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट होना होगा. इसके लिए उन्होंने माकपा महासचिव सीताराम येचुरी से भी एक बार बातचीत की थी. मुख्यमंत्री के साथ बैठक में कांग्रेस और वामदलों के नेताअों के साथ बातचीत में भी ममता ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध और भाजपा को मजबूत होने से रोकने के लिए राज्य में सभी दलों की एकजुटता पर बल दिया.

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हालांकि, विधानसभा में विरोधी दल के नेता अब्दुल मन्नान और सदन में वामदलों के नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य में सांप्रदायिक शक्तियों के मजबूत होने के लिए तृणमूल सरकार ही जिम्मेदार है. दोनों नेताअों ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष ताकतें भाजपा से लड़ने के लिए सदैव तैयार हैं. लेकिन, तृणमूल कांग्रेस ने पार्टियों को तोड़ कर कांग्रेस और माकपा को कमजोर करने का अभियान चला रखा है.

कांग्रेस और वाम नेताअों ने रायगंज पौरसभा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि वहां तृणमूल ने कांग्रेस पार्षदों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया. ममता ने इस मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं की. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यदि कोई पार्टी छोड़ कर तृणमूल में शामिल होना चाहता है, तो क्या किया जा सकता है.

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कांग्रेस और वामदलों के साथ एकजुटता दर्शाने की ममता बनर्जी की इस नीति पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने चुटकी ली है. उन्होंने कहा कि सारदा, नारद घोटाले में ममता बनर्जी ऐसी फंस चुकी हैं कि अब उनके लिए बचने का कोई रास्ता ही नहीं रह गया है. इसलिए अब कांग्रेस और वामदलों की आड़ ले रही हैं.

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