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पीजी की पढ़ाई बंद होने के खिलाफ आंदोलन

Updated at : 13 Aug 2025 1:01 AM (IST)
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पीजी की पढ़ाई बंद होने के खिलाफ आंदोलन

टीडीबी कॉलेज के पांच विभागों में पढ़ाई रोकने के फैसले का छात्रों ने किया विरोध

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रानीगंज. रानीगंज के टीडीबी कॉलेज के सामने तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) नेता रेहान साकिब के नेतृत्व में सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया. यह विरोध कॉलेज प्रबंधन द्वारा स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर पांच विभागों में अचानक पढ़ाई बंद करने के फैसले के खिलाफ हो रहा है.

छात्रों की नाराजगी और आंदोलन का रुख : रेहान साकिब ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों से इस कॉलेज में एमएससी और एमकॉम सहित कुल आठ विभागों में पीजी की पढ़ाई होती रही है, लेकिन 8 अगस्त को कॉलेज प्रबंधन ने अचानक एक नोटिस जारी कर पांच विभागों की पीजी पढ़ाई बंद कर दी. उनका कहना है कि यह निर्णय खासकर आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए गंभीर परेशानी खड़ी करेगा.

उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कॉलेज प्रबंधन अपना यह “तुगलकी फरमान ” वापस नहीं लेता, आंदोलन जारी रहेगा. रेहान साकिब ने रानीगंज की सभी सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक संस्थाओं से आंदोलन में सहयोग की अपील की. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस निर्णय से कॉलेज की नैक रैंकिंग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, क्योंकि पहले नैक मूल्यांकन में कॉलेज को बी प्लस और पिछले मूल्यांकन में केवल बी ग्रेड मिला था.

गवर्निंग बॉडी की दलील

गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष तापस बनर्जी ने कहा कि कुछ विभागों में छात्रों की संख्या अत्यंत कम है. उदाहरण के लिए, केमिस्ट्री में केवल दो और अंग्रेजी में 12-14 छात्र प्रवेश ले रहे थे, जिनमें से भी बहुत कम नियमित कक्षाओं में आते थे. कॉलेज के पास न तो इतने कम छात्रों के लिए अलग कक्षा की व्यवस्था है, न विज्ञान विभाग के लिए प्रयोगशालाएं, और न ही पर्याप्त फंड. इन कारणों से पांच पीजी विभागों को बंद करना अनिवार्य हो गया.

कॉलेज प्रबंधन का पक्ष

प्रिंसिपल मिलन मुखर्जी की अनुपस्थिति में टीचर इंचार्ज डॉ सर्बानी मुखर्जी ने बताया कि यह निर्णय मजबूरी में लिया गया. उनके अनुसार, 2020 में केंद्रीय स्तर पर सिलेबस में बदलाव के कारण पीजी कक्षाएं जारी रखना कठिन हो गया है. साथ ही, छात्र अब पेशेवर कोर्सों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जिससे पीजी में प्रवेश लेने वालों की संख्या घटी है और जो छात्र नामांकन लेते हैं, वे नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं रहते. डॉ मुखर्जी ने यह भी कहा कि पीजी की पढ़ाई में खर्च अधिक है और फिलहाल कॉलेज के पास इतने संसाधन नहीं हैं. इस मुद्दे पर काजी नजरुल विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी और गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष तथा रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी की सहमति से यह निर्णय लिया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी, बांग्ला और उर्दू विषय में पीजी की पढ़ाई जारी रहेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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