देवोत्तर संपत्ति के तालाब को पाट कर बना दिया व्यावसायिक प्रतिष्ठान

शिल्पांचल में तालाबों की भरायी के मामले में मुख्यमंत्री के कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद जमीन कारोबारियों पर कार्रवाई शुरू हुई और एक के बाद एक बड़े कारोबारी गिरफ्तार हुए. इसके बाद भी तालाबों की भरायी का सिलसिला चलता रहा.
आसनसोल/कुल्टी.
शिल्पांचल में तालाबों की भरायी के मामले में मुख्यमंत्री के कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद जमीन कारोबारियों पर कार्रवाई शुरू हुई और एक के बाद एक बड़े कारोबारी गिरफ्तार हुए. इसके बाद भी तालाबों की भरायी का सिलसिला चलता रहा. आसनसोल नगर निगम की ओर से अनेकों प्राथमिकियां दर्ज करायी गयी. कुल्टी थाना में तालाब भरायी से जुड़ा एक मामला दर्ज हुआ है, जिसमें देवोत्तर संपत्ति के तालाब को भरकर वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बनाने का मामला सामने आया है. इसमें देवोत्तर संपत्ति को हड़पने के लिए भूमि रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों में हेरफेर कर संपत्ति को व्यक्तिगत मालिकाना के नाम पर करने का भी आरोप लगाया है. कुल्टी थाना क्षेत्र के बनडांगा इलाके के निवासी सव्यसाची मुखर्जी ने स्थानीय जोसैडीह इलाके के निवासी एक ही परिवार के तीन लोगों (पिता पुत्र) को इस मामले में आरोपी बनाकर अदालत में शिकायत की. अदालत के निर्देश पर कुल्टी थाना में उक्त पिता पुत्र को नामजद आरोपी बनाकर केस नंबर 42/26 में बीएनएस की धारा 314/316(2)/318(2)/318(4)/336(3)/338/340(2)/351(2)/61(2)/3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.गौरतलब है कि शिल्पांचल में जमीन को लेकर काफी घोटाले सामने आया है और यह सिलसिला जारी है. जीवित व्यक्ति को मृत बताकर उसका जमीन बेच देना, सरकारी जमीन को रैयती बनाकर बेचने के अनेकों मामले सामने आई, इसमें एक बीएलएंडएलआरओ को नौकरी गंवानी पड़ी, तालाबों की भरायी कर उसका चरित्र बदलने का भी अनेकों मामला सामने आया. आया दिन इसे लेकर शिकायतें होती रहती है और थानों में मामला होता है.देवोत्तर संपत्ति की तालाब भराई को लेकर स्थानीय लोगों में रोष
बनडांगा इलाके के निवासी श्री मुखर्जी ने अपनी शिकायत में कहा कि कुल्टी ब्लॉक के पुनुरी मौजा में सीएस एंड एसआर प्लॉट नम्बर-740, आरएस खतियान नम्बर-19, जेएल नम्बर-22 में देवोत्तर संपत्ति के तालाब की भरायी कर उसपर वाणिज्यिक प्रतिष्ठान खड़ा कर दिया गया है. इस इलाके के बड़े रैयत स्वर्गीय मुकुंद लाल लायक ने एक जुलाई 1917 में यह देवोत्तर संपत्ति इस तालाब को धार्मिक और सार्वजनिक कल्याण के उद्देश्य से अपरिवर्तनीय रूप से समर्पित किया था. उक्त तीनों आरोपियों ने धोखाधड़ी से भूमि रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों में हेरफेर किया तथा जालसाजी, प्रतिरूपण व महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर इस देवोत्तर संपत्ति तालाब को अवैध तरीके से अपनी पत्नी के नाम पर म्यूटेशन करवा लिया. इस पवित्र तालाब को भर दिया गया और चारदीवारी करके यहां एक गोदाम और व्यवसायिक संरचनाएं खड़ी करने का आरोप लगाया है. जिसकी जांच शुरू हुई है.
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