अवैध खनन में मौत के बाद कर दिया दाह-संस्कार

Updated at : 24 Feb 2025 9:28 PM (IST)
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अवैध खनन में मौत के बाद कर दिया दाह-संस्कार

कोयला माफियाओं का आतंक इसकदर बरकरार है कि अवैध खनन में मारे गये अपने बेटे की जानकारी माता-पिता किसी को नहीं दे सकते हैं. 25 वर्षीय बेटे का अंतिम संस्कार हो गया, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट तक नहीं बना. क्योंकि दुर्घटना में मारे जाने के बाद शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया. आनन-फानन में उसे जला दिया गया ताकि खदान में हुई दुर्घटना की जानकारी का कोई सबूत नहीं रहे. डेथ सर्टिफिकेट नहीं होने से कागजों में भी युवक का अस्तित्व समाप्त हो गया.

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आसनसोल.

कोयला माफियाओं का आतंक इसकदर बरकरार है कि अवैध खनन में मारे गये अपने बेटे की जानकारी माता-पिता किसी को नहीं दे सकते हैं. 25 वर्षीय बेटे का अंतिम संस्कार हो गया, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट तक नहीं बना. क्योंकि दुर्घटना में मारे जाने के बाद शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया. आनन-फानन में उसे जला दिया गया ताकि खदान में हुई दुर्घटना की जानकारी का कोई सबूत नहीं रहे. डेथ सर्टिफिकेट नहीं होने से कागजों में भी युवक का अस्तित्व समाप्त हो गया.

कुल्टी अंतर्गत बोड़ीरा ओसीपी में अवैध खनन के दौरान शुक्रवार तड़के हुए हादसे की जानकारी सभी को होने के बावजूद भी किसी ने कोई आवाज नहीं उठाई. मजे की बात तो यह है कि कुल्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत रांचीग्राम इलाके के युवक बिक्रम की मौत हुई, शव का अंतिम संस्कार हुआ, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं मिली. कोलियरी प्रबंधन और पुलिस ने इस प्रकार की किसी दुर्घटना की जानकारी से ही इंकार कर दिया. क्या यह कोयला माफियाओं के आतंक है? या और कुछ? हर कोई इस सवाल के जवाब के इंतजार में है. स्थानीय पार्षद व भाजपा नेता ललन मेहरा ने इस मुद्दे पर मृतक को न्याय व उचित मुआवजा दिलाने के लिए कुंभ की यात्रा बीच में ही छोड़कर वापस लौट आये और मृतक के परिजनों से जाकर मुलाकात की. श्री मेहरा ने बताया कि मृतक के माता-पिता, भाई सभी हाथ जोड़ लिए और कहा कि इस मुद्दे पर कुछ करें. जो गया सो गया अब नयी मुसीबत क्यों लें? जिसके बाद श्री मेहरा भी रुक गए, लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर कानूनी सलाहकारों से बात करके आगे की रणनीति तैयार करेंगे.

गौरतलब है कि बीसीसीएल सीबी एरिया अंतर्गत बोड़ीरा ओसीपी में शुक्रवार तड़के अवैध खनन के दौरान चाल धंसने से एक दर्जन लोग घायल हुए थे और एक युवक की मौत हुई थी. स्थानीय सूत्रों के अनुसार जिस समय यह दुर्घटना हुई, उस समय सुरंग के अंदर करीब 35 लोग कार्य कर रहे थे. घटना की सूचना आग की तरह फैली और कोयला माफियाओं के लोग वहां पहुंचे और सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के काम में जुट गये. जितने लोगों को निकाल सके निकाला बाकी को छोड़ दिया. यह सिर्फ बोड़ीरा ओसीपी की कहानी ही नहीं, जितने भी खदानों में अवैध खनन के दौरान दुर्घटनाएं होती है, सभी जगह ऐसा ही होता है.

पुलिस की मौजूदगी में खदान से निकाला शव, बताया सड़क हादसा

21 अक्टूबर 2024 को बाराबनी थाना क्षेत्र अंतर्गत एक कोयला खदान में अवैध खनन के दौरान चाल धंसने की घटना में एक युवक की घटनास्थल पर मौत हो गयी, दो युवकों का इलाज के दौरान मौत हुई थी. खदान में दुर्घटना की सूचना पर पुलिस भी पहुंची थी. जिसका वीडियो जमकर वायरल हुआ. जिसमें कोयला माफियाओं के गुर्गों को पुलिस की मौजूदगी में यह कहते सुना गया कि इसकी जानकारी बाहर नहीं जाना चाहिए, सभी यह कहेंगे कि यह मौत सड़क दुर्घटना में हुई है. हालांकि इस घटना के कुछ दिनों बाद ही बाराबनी थाना प्रभारी को ससपेंड कर दिया गया था. इस वीडियो की पुष्टि प्राभात खबर नहीं करता है.

कुंभ की यात्रा बीच में छोड़कर लौटे पार्षद को मृतक के परिजनों से मिली निराशा

स्थानीय पार्षद श्री मेहरा ने बताया कि शुक्रवार रात को उन्हें खदान में हुई दुर्घटना ने बिक्रम के मारे जाने की सूचना मिली. वह उन्ही के वार्ड में उनके घर के पास ही रहता था. सूचना मिलते ही यात्रा को बीच में ही स्थगित करना पड़ा. अयोध्या और काशी का प्रोग्राम रद्द करके रविवार इलाके में पहुंचे. रविवार रात को वे मृतक के घर गए और उनलोगों से बात की. मृतक के माता-पिता, भाई ने हाथ जोड़ लिया और कहा कि कृपया इस मामले में कुछ न करें. जब उनसे कहा कि यदि वे भी चुप्पी साध लेंगे तो लोग यही कहेंगे कि पार्षद ने कोयला माफियाओं से समझौता कर लिया. बिक्रम के साथ उचित न्याय और मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन उसके घरवाले बार-बार हाथ जोड़कर अनुरोध करते रहे कि इस मामले को छोड़ दें. श्री मेहरा इससे पहले भी बोड़ीरा ओसीपी में अवैध खनन के दौरान हुई दुर्घटना को लेकर काफी मजबूती से आवाज उठायी थी, जिसके कारण खदान में दो दिनों तक सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का कार्य चला था. श्री मेहरा ने कहा कि वे नहीं रहने के कारण बिक्रम के शव का बिना पोस्टमार्टम का दाह संस्कार कर दिया गया. वे रहते तो पूरे मामले का उजागर होता. अब भी वे लगे हुए हैं.

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