तीन वर्ष से नहीं मिल रहा आसरा, दर-दर भटक रहा आदिवासी परिवार

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डायन के संदेह में घर से बेदखल कर ग्रामीणों ने निकाल िदया था गांव से प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद नहीं हो रही कोई सुनवाई पानागढ़ : पूर्व बर्दवान जिले के मेमारी थानांतर्गत काटाडांगा के आदिवासी परिवार के 17 लोगों को डायन के संदेह में उनके घर से बेदखल कर गांव से निकाल दिया […]

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डायन के संदेह में घर से बेदखल कर ग्रामीणों ने निकाल िदया था गांव से
प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद नहीं हो रही कोई सुनवाई
पानागढ़ : पूर्व बर्दवान जिले के मेमारी थानांतर्गत काटाडांगा के आदिवासी परिवार के 17 लोगों को डायन के संदेह में उनके घर से बेदखल कर गांव से निकाल दिया गया है. वर्ष 2014 से ही सोरेन परिवार दर-दर भटक रहा है. उक्त परिवार खानाबदोश की जिंदगी जीने को मजबूर है. परिवर्तन की सरकार आने के बाद भी आज तक अपने गांव और अपने घर में प्रवेश नहीं कर पाया है.
इलाके के जनप्रतिनिधियों से लेकर राजनीतिक दल के नेताओं तथा प्रशासनिक अधिकारी के पास उक्त आदिवासी परिवार गुहार लगा चुगा है. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. दो मुट्ठी अनाज़ के लिये परिवार को इस गांव से उस गांव भीख मांग कर गुजारा करना पड़ रहा है. स्थानीय बीडीओ, थाना प्रभारी, एसडीओ तथा डीएम तक घटना से अवगत है. प्रशासनिक कार्यालयों को चक्कर लगाते परिवार के सदस्य थक गये हैं. बच्चों की पढ़ायी भी छूट गयी है.
परिवार समस्त सरकारी योजनाओं से भी वंचित हो गया है. महज डायनी अपवाद में एक परिवार के 17 सदस्यों को तीन वर्षों से तड़ीपार कर िदया गया है. बर्दवान जिला परिषद अध्यक्ष देबू टुडू भी आदिवासी परिवार की मदद नहीं कर पा रहे हैं. पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार की समस्या का हल करने का आश्वासन िदया है.
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