95 फीसदी से अधिक परीक्षार्थी सफल

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आसनसोल : पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा पर्षद संचालित उच्च माध्यमिक परीक्षा का रिजल्ट सोमवार को जारी हुआ. आसनसोल शहर के अधिसंख्य स्कूलों ने 95 फीसदी से अधिक सफलता हासिल की. लड़कों की तुलना में लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर रहा. आर्य समाज संचालित स्कूल आर्य कन्या बालिका विद्यालय तथा उमा रानी महिला कल्याण गल्र्स स्कूल […]

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आसनसोल : पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा पर्षद संचालित उच्च माध्यमिक परीक्षा का रिजल्ट सोमवार को जारी हुआ. आसनसोल शहर के अधिसंख्य स्कूलों ने 95 फीसदी से अधिक सफलता हासिल की. लड़कों की तुलना में लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर रहा.

आर्य समाज संचालित स्कूल आर्य कन्या बालिका विद्यालय तथा उमा रानी महिला कल्याण गल्र्स स्कूल (एचएस) का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा. शांतिनगर विद्यापीठ से विज्ञान संकाय से परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी शंख शुभ्र महंती ने 483 अंक हासिल कर महकमा में टॉपर किया. इस बार भी बांग्ला माध्यम स्कूलों की तुलना में हिंदी माध्यम स्कूल पिछड़ गये. इसका मुख्य कारण हिंदी में प्रश्नपत्र न होना तथा हिंदी माध्यम स्कूलों में प्रतिस्पर्धी शिक्षण परिवेश का न होना है.

सुबह से ही रिजल्ट को लेकर परीक्षार्थियों व गाजिर्यनों में उत्सुकता बनी हुयी थी. रिजल्ट जारी होते ही परीक्षार्थियों के चेहरे खिल उठे. मोबाइल स्मार्ट फोन, लैपटॉप व साइबर कैफे में परीक्षार्थियों में रिजल्ट देखने के लिए आपाधापी का माहौल रहा. रिजल्ट देखते ही एक दूसरे को बधाई देने तथा सहपाठियों की जानकारी लेने की होड़ मच गयी. शहर के अधिसंख्य स्कूलों के रिजल्ट 95 फीसदी से अधिक रिजल्ट रहे.

प्रथम श्रेणी हासिल करनेवाले परीक्षार्थियों की संख्या भी अधिक रही. इसके साथ ही परीक्षार्थियों ने स्कूलों का रुख किया. स्कूलों में खुशी का माहौल रहा. सभी ने जम कर खुशी मनायी तथा एक-दूसरे को बधाई दी. इसके बाद ही विभिन्न कॉलेजों व पेशागत कोर्स में नामांकन की योजना को अंजाम देने की कवायद शुरू हो गयी.

बांग्ला माध्यम स्कूलों की तुलना में हिंदी माध्यम के स्कूल इस बार भी पिछड़ते आये. आर्य समाज संचालित तीन स्कूलों के रिजल्ट संख्या के लिहाज से बेहतर रहे. लेकिन अंकों के मामले में वे भी पिछड़े रहे. आर्य कन्या बालिका विद्यालय का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा.

लेकिन स्कूल टॉपर को वाणिज्य की शिवानी साहु को 413 अंक मिले. डीएवी हाइ स्कूल (एचएस) का रिजल्ट 95 फीसदी रहा. लेकिन स्कूल टॉपर वाणिज्य के रवि श्रीवास्तव को 451 अंक मिले. दयानंद विद्यालय का रिजल्ट 98 फीसदी रहा. स्कूल टॉपर वाणिज्य के परीक्षार्थी राजू कुमार राय को 422 अंक मिले. सरकारी स्कूलों की स्थिति तो और भी खराब रही.

इस मामले में परीक्षार्थियों व गाजिर्यनों का कहना है कि रिजल्ट बेहतर न होने के कई कारण हैं. इनमें एचएस के परीक्षार्थियों को हिंदी में प्रश्नपत्र न मिंलना, हिंदी माध्यम स्कूलों में प्रतिस्पर्धी शिक्षण माहौल का न होना तथा हिंदी माध्यम छात्रों के गाजिर्यनों का शिक्षा के प्रति गंभीर न होना है.

प्रश्नपत्र का मामला जहां सरकारी नीति से जुड़ा है, वहीं शिक्षण माहौल शिक्षकों का दायित्व है. लेकिन हिंदी माध्यम स्कूलों के अधिसंख्य शिक्षकों में प्रतिस्पर्धा की मानसिकता ही नहीं है. वे स्कूलों को सरकारी कार्यालयों की ही तरह ट्रीट करते हैं. इसके कारण गाजिर्यन भी पूरी तरह से नहीं जुड़ पाते हैं. छात्रों के घर में भी शैक्षणिक परिवेश नहीं मिलता है.

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