वार्ड 47 : जहां-तहां लगा है कचरों का अंबार
Updated at : 15 Jan 2020 2:06 AM (IST)
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नालियों की सफाई नहीं होने से पूरे इलाके में फैली बदबू आसनसोल :नगर निगम के वार्ड संख्या 47 में कूड़ेदान की कमी और जर्जर कूड़ेदान के कारण कचड़ा चारों ओर बिखरा पड़ा है. कचड़ों की नियमित सफाई न होने से यह आवारा पशुओं का चारागाह बन गया है. नालियों की सफाई नहीं होने से इसकी […]
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नालियों की सफाई नहीं होने से पूरे इलाके में फैली बदबू
आसनसोल :नगर निगम के वार्ड संख्या 47 में कूड़ेदान की कमी और जर्जर कूड़ेदान के कारण कचड़ा चारों ओर बिखरा पड़ा है. कचड़ों की नियमित सफाई न होने से यह आवारा पशुओं का चारागाह बन गया है. नालियों की सफाई नहीं होने से इसकी सड़न से इलाके में फैले दुर्गंध से लोग परेशान हैं.
वार्ड पार्षद के निधन के बाद सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. वार्ड की देखरेख कर रहे बोरो चेयरमैन दयामय राय ने का कहना है कि साढ़े आठ हजार की आवादी वाले इस वार्ड में सफाई कर्मियों की कमी के कारण सफाई व्यवस्था को बहाल रखना बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद सीमित संसाधनों में सफाई का बेहतर कार्य किया जा रहा है.
आंखों देखी
वार्ड संख्या 47 अंतर्गत बुधा, राजपाड़ा, गोड़मंडल रोड संलग्न इलाकों में नियमित सफाई नहीं होने से इलाके में जगह जगह गंदगी पसरी है. इलाकों में पर्याप्त कूड़ेदान नहीं होने एवं क्षतिग्रस्त कूड़ेदान के कारण लोग सड़कों पर ही गंदगी फेंक देते हैं. नियमित रूप से कीटनाशक का छिड़काव नहीं होने से नालियों में मच्छरों की भरमार है. नियमित नालियों की सफाई नहीं होने से नालियों की दुर्गंध से लोग परेशान हैं.
क्या कहते हैं बोरो चेयरमैन?
47 नंबर वार्ड की पार्षद दिली माली के निधन के बाद वार्ड का दायित्व बोरो चेयरमैन दयामय राय को दिया गया है. बोरो चेयरमैन श्री राय ने कहा कि लिखित रूप में कोई दायित्व नहीं दिया गया है. परंतु वार्ड में बुनियादी परिसेवाओं की देख रेख करते हैं. यहां की 8500 आबादी पर 14 सफाई कर्मी हैं. इतने कम कर्मियों से वार्ड में संपूर्ण सफाई करवाना चुनौती का कार्य है. उपलब्ध संसाधनों और सफाई कर्मियों को लेकर वार्ड में सफाई व्यवस्था बेहतर रखने का प्रयास किया जाता है. नियमित समय पर फॉगिंग मशीन का उपयोग, ब्लिचिंग पावडर एवं कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है.
गोड़मंडल रोड निवासी बिनोद वर्मा ने कहा कि इलाके में महीने में 15 से 20 दिन ही सफाई होती है. सफाई कर्मी मनमाने ढ़ंग से सफाई करते हैं. रोजाना सफाई नहीं होने से इलाके में गंदगी की भरमार है. कूड़ेदान का भी अभाव है, जिससे लोग घरों का कचड़ा जहां तहां फेंकने को मजबूर हैं.
गोड़मंडल रोड इलाके के निवासी महेंद्र पंडित ने कहा कि इलाके में कूड़ेदान नहीं होने से लोग घरों का कचरा पास के खाली मैदान में फेंकने को मजबूर हैं, जिसे लेकर आपस में विवाद होता रहता है. इलाके में फॉगिंग मशीन का उपयोग नहीं होता है. गंदगी की खुद ही सफाई करनी पड़ती है.
एक और निवासी संजय साहा ने कहा कि कूड़ेदान जर्जर होने के कारण उसमें फेंका गया कचड़ा सड़कों पर बिखर जाता है, जिस कारण उस कचरे पर आवारा पशु का हर समय जमावड़ा लगा रहता है. सड़क पर मवेशियों के झुंड के कारण आने जाने वाले वाहन चालकों एवं राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. शिकायत के बावजूद कूड़ेदानों की मरम्मत को लेकर कोइ पहल नहीं की गयी.
राजपाड़ा निवासी दिप्ती रॉय चौधरी ने कहा कि इलाके में फॉगिंग मशीन का उपयोग दो माह में एक बार किया जाता है. नियमित उपयोग नहीं किये जाने से मच्छरों की भरमार है. रात ही नहीं दिन को भी मच्छरों का आतंक रहता है. लोग मच्छरजनित रोगों के भय से आतंकित रहते हैं.
राजपाड़ा निवासी बिनोद वर्मा ने कहा कि इलाके में सफाई की भारी कमी है. पार्षद के निधन के बाद से इलाके में बुनियादी सुविधाओं का अभाव हो गया है. सफाई कर्मी नियमित रूप से नहीं आते हैं. इलाके में जरूरत के आधार पर कूड़ेदान नहीं है. ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव विशेष अवसरों पर ही किया जाता है.
राजपाड़ा निवासी सौम्यदीप सरकार ने कहा कि पार्षद के निधन के बाद से इलाके में नागरिक परिसेवाएं बाधित हुई है. नालियों की नियमित सफाई नहीं होती है. नालियों के जाम रहने से इलाके में हमेशा बदबू फैली रहती है. सफाई कर्मी मनमाने ढ़ंग से सफाई कर चले जाते हैं.
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