कन्यापुर सेटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट में अवैध निर्माण के खिलाफ आसनसोल नॉर्थ थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी

Updated at : 01 Jan 2020 5:24 AM (IST)
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कन्यापुर सेटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट में अवैध निर्माण के खिलाफ आसनसोल नॉर्थ थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी

पूर्व में दो बार शिकायत करने के बावजूद भी दर्ज नहीं हुई थी प्राथमिकी पुलिस ने बताया कि शिकायत में तकनीकी त्रुटि के कारण नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी पुलिस अधिकारी ने अड्डा कार्यालय में जाकर नये सिरे से प्रक्रिया पूरी कर दर्ज की प्राथमिकी आसनसोल : कन्यापुर सेटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट (केएसटीपी) के आवासीय क्षेत्र सेक्टर […]

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  • पूर्व में दो बार शिकायत करने के बावजूद भी दर्ज नहीं हुई थी प्राथमिकी
  • पुलिस ने बताया कि शिकायत में तकनीकी त्रुटि के कारण नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी
  • पुलिस अधिकारी ने अड्डा कार्यालय में जाकर नये सिरे से प्रक्रिया पूरी कर दर्ज की प्राथमिकी
आसनसोल : कन्यापुर सेटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट (केएसटीपी) के आवासीय क्षेत्र सेक्टर एच में प्लॉट संख्या सीबी/14 पर बने जी+6 बहुमंजिली इमारत के निर्माण को अवैध करार देते हुए पट्टेदार मोहम्मद अनवर अली के खिलाफ आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (अड्डा) द्वारा की गई शिकायत पर आसनसोल नॉर्थ थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई.
इससे पूर्व एक जून 2018 को शिकायत की गयी थी. शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज हुई या नहीं, क्या कार्रवाई हुई इसकी सूचना पाने के लिए 15 जनवरी 2019 को पत्र लिखा गया, लेकिन इस संबंध में थाने से अड्डा को कोई सूचना नहीं दी गयी.
दोनों चिट्ठियों का हवाला देकर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने पुनः पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) को 20 दिसम्बर 2019 को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया. जिसके उपरांत आसनसोल नॉर्थ थाने के अधिकारी अड्डा कार्यालय में जाकर प्राथमिकी की सारी औपचारिता पूरी करने के बाद नए सिरे से शिकायत लेकर प्राथमिकी दर्ज की.
क्या है मामला?
केएसटीपी के आवासीय क्षेत्र में प्लॉट संख्या सीवी/14 कोलकाता निवासी मोहम्मद अनवर अली को वर्ष 1993 में आवंटित हुआ. प्लॉट का लीज डीड सात मार्च 2002 को लागू हुआ. वर्ष 2012 में अड्डा के सर्वे टीम ने जांच में पाया कि ऊक्त प्लॉट पर जी+5 की बहुमंजिली इमारत बन रही है. जिसकी कोई मंजूरी नहीं थी.
अड्डा द्वारा सभी प्रक्रिया को पूरी करने के बाद चार जनवरी 2013 को ऊक्त प्लॉट का लीज रद्द कर दिया गया और निर्माण कार्य को तोड़ने का नोटिस जारी किया गया. ऊक्त निर्माण के प्लान को आसनसोल नगर निगम से 20 अप्रैल 2015 को मंजूरी मिल गयी.
15 नवम्बर 2017 को अड्डा की सर्वे टीम ने पुनः जांच में पाया कि ऊक्त प्लॉट पर जी+6 बहुमंजिली इमारत का निर्माण हो गया है. पट्टेदार श्री अली को पुनः कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. संतोषजनक उत्तर न मिलने पर कनूनी प्रक्रिया के तहत आसनसोल नॉर्थ थाने में पट्टेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए शिकायत की गई.
कानूनी सलाहकार के सुझाव पर दर्ज हुई प्राथमिकी
अड्डा प्रबंधन ने ऊक्त निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आरम्भ करने के लिए पूरे मामले को आसनसोल अदालत के अधिवक्ता व कनूनी सलाहकार तपन कुमार चट्टोपाध्याय के पास भेजा था.
श्री चट्टोपाध्याय ने सुझाव देते हुए कहा था कि टाऊन एंड कंट्री प्लनिंग एक्ट 1979 की धारा 67(2) में मामले में पुलिस की मदद लेने का प्रावधान है. जिसके तहत एक जून 2018 को सीईओ ने पूरी घटना की जानकारी और उससे जुड़े सभी कागजात देकर आसनसोल नॉर्थ थाने में ऊक्त प्लॉट के पट्टेदार श्री अली के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए शिकायत की.
इस बीच ऊक्त निर्माण को लेकर स्थानीय एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री, राज्य के शहरी विकास मंत्री सह जिला के सभी आधिकरियों को शिकायत भेजी. शिकायत मिलते ही सीईओ ने पुनः 15 जनवरी 2019 को आसनसोल नार्थ थाना के प्रभारी को पत्र लिखा.
जिसमें कहा गया कि कार्यालय को स्थानीय एक व्यक्ति से इस मुद्दे पर शिकायत प्राप्त हुआ है, जिसकी प्रति संदर्भ के लिए संलग्न करके भेजा गया है. आपसे अनुरोध है कि कार्यालय को सूचित करें कि क्या आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में आरोपी के खिलाफ आगे की कार्यवाही शुरू की गई थी या नहीं.
इसकी आधिकारिक सूचना थाना से अड्डा को प्राप्त नहीं हुई. सीईओ ने पुनः 20 दिसम्बर 2019 को मामले में पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) को पत्र भेजकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. जिसमें थाना को भेजी गई पूर्व की सभी चिट्ठियों का भी उल्लेख किया गया. इसके बाद पुलिस हरकत में आई और मामले में प्राथमिकी दर्ज की.
पुलिस ने क्यों नहीं की दर्ज प्राथमिकी?
पुलिस सूत्रों के अनुसार अड्डा से मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की शिकायत मिलते ही मामले की जांच की गई. शिकायत में कुछ तकनीकी त्रुटि थी. इस त्रुटि को दूर करने के लिए थाने से अधिकारी दो बार अड्डा के सीईओ से मिलने के लिए उनके कार्यालय गए. उनसे मुलाकात नहीं हुई.
उनके नीचे के आधिकरियों ने त्रुटि का संशोधन करने में खुद को असमर्थ बताया. जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई. तकनीकी त्रुटि दूर होते ही प्राथमिकी दर्ज हो गयी.
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