बर्दवान स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव से स्थानीय लोग नाराज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Jul 2019 4:11 AM

विज्ञापन

बर्दवान : पूर्व बर्दवान के खंडघोष थाना अंतर्गत स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि बर्दवान स्टेशन नहीं, खंडघोष के बोयाईचंडी स्टेशन का नाम क्रातिकारी बटुकेश्वर दत्त के नाम पर होना आवश्यक, स्थानीय निवासियों के मुताबिक खंडघोष थाना अंतर्गत ओयांडी गांव में क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का जन्मभूमि, कोई इतिहास है. आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण पथीक्रत […]

विज्ञापन

बर्दवान : पूर्व बर्दवान के खंडघोष थाना अंतर्गत स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि बर्दवान स्टेशन नहीं, खंडघोष के बोयाईचंडी स्टेशन का नाम क्रातिकारी बटुकेश्वर दत्त के नाम पर होना आवश्यक, स्थानीय निवासियों के मुताबिक खंडघोष थाना अंतर्गत ओयांडी गांव में क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का जन्मभूमि, कोई इतिहास है.

आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण पथीक्रत बटुकेश्वर दत्त और क्रांतिकारी भगत सिंह ने ओंयाडी में गुप्त रुप से कई दिनों तक पनाह ली थी. ओंयारी और नजदीक गांव बोयाईचंडी में कोई यादगार स्मृति भी जुड़े हैं. एक हिस्से के स्थानीय निवासियों ने बर्दवान-बांकुड़ा रेल पटरी के बोयाईचंडी स्टेशन को बटुकेश्वर दत्त के नाम पर करने की मांग की, जबकि दूसरे हिस्से के स्थानीय निवासियों ने बर्दवान स्टेशन को क्रातिकारी बटुकेश्वर दत्त के नाम पर करने की मांग की है.

इन निवासियों के मुताबिक ओंयारी तथा बोयाईचंडी के बदले में बर्दवान स्टेशन का नाम बटुकेश्वर दत्त के नाम पर करने के लिए मांग की गयी, ओंयारी के निवासी तथा बटुकेश्वर दत्त स्मारक कमिटी के सचिव मधुसूदन चंद ने दावा किया कि 2012 में केंद्र में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी के जमाने में बर्दवान नगर का नाम परिवर्तन करने की अपील की गयी थी, जबकि रेलवे दफ्तर की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया. सनद रहे कि पिछले 20 जुलाई को आयोजित क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त को श्रद्धा झापन समारोह में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने घोषणा की है कि बर्दवान स्टेशन का नाम बटुकेश्वर दत्त के नाम पर करने का प्रस्ताव पारित किया गया है.

स्मारक कमिटी की ओर से सूचना मिलते ही बर्दवान स्टेशन का नाम बटुकेश्वर दत्त के नाम पर प्रस्ताव पारित होने पर बधाई दी है. इससे क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त के बारे में देशभर के लोगों को जानकारी मिलेगी. बर्दवान के जैन समुदाय ने दावा किया कि बर्दवान स्टेशन के नाम जैन धर्मगुरु बर्दवान के नाम पर रखा गया है. बर्दवान महाराज की बर्दवान आगमन के दौरान के कई इतिहास और परंपरा जुड़े हैं, इस दौरान जैन समुदाय ने इस मुद्दे पर बर्दवान-दुर्गापुर संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरिंदर सिंह अहलुवालिया को पत्र भेजा है.

स्थानीय सूत्रों के मुताविक बटुकेश्वर दत्त के पिता गोष्ठबिहारी दत्त भारतीय रेलवे में नौकरी करते थे. मां सामान्य गृहबधु कमलाकामिनी दत्त, आठवीं कक्षा में पढ़ने के समय क्रांतिकारी गणेश दत्त की अगुवाई में आजादी के जंग में शामिल हुई थीं. बटुकेश्वर 1927 के 17 दिसंबर को अंग्रेज अफसर सैंडरसन के हत्याकांड के बाद बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह ने खंडघोष के ओंयारी गांव में पाताल घर में शरण ली थी. लगभग 15 दिनों तक गुप्त स्थान पर रहने के बाद दोनों छद्मवेश में दोनो क्रांतिकारी बोयाईचंडी स्टेशन पहुंचे.
पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर ट्रेन में सवार होकर दोनों दिल्ली रवाना हुए थे. दिल्ली में असेंबली हाउस में हमला किया. बटुकेश्वर की अगुवाई में पुलिस अफसर हत्याकांड में भगत सिंह काे फांसी दी गयी और बटुकेश्वर दत्त काे उम्रकैद हुआ. आजादी के बाद 1965 में लंबे अरसे से बीमारी के बाद बटुकेश्वर ने आखिरी सांस ली थी.
एक ओर, बर्दवान के जैन समुदाय के प्रमुख कार्यकर्ता राजकुमार भुतोड़िया ने दावा किया कि बर्दवान एक पुराना जनपद है. इस मुद्दे पर सांसद सुरिंदर सिंह अहलूवालिया ने बताया कि बर्दवान स्टेशन का नाम परिवर्तन के मामले में रेल तथा केंद्र सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola