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कोल इंडिया के 20 हजार अधिकारियों को फिर मिली निराशा, नहीं मिलेगा महारत्न कंपनी का स्केल

Updated at : 06 Jul 2019 1:20 AM (IST)
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कोल इंडिया के 20 हजार अधिकारियों को फिर मिली निराशा, नहीं मिलेगा महारत्न कंपनी का स्केल

डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज ने रिजेक्ट किया इसकी संचिका सांकतोड़िया : कोयला अधिकारियों को ओएनजीसी या दूसरे महारत्न कंपनियों की तरह वेतन देने पर कोयला मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान कर उसे डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (डीपीई) को पत्र भेजा था. डीपीई की स्वीकृति के बाद कोयला अधिकारियों को बढ़े वेतन का लाभ मिलने की उम्मीद […]

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डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज ने रिजेक्ट किया इसकी संचिका
सांकतोड़िया : कोयला अधिकारियों को ओएनजीसी या दूसरे महारत्न कंपनियों की तरह वेतन देने पर कोयला मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान कर उसे डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (डीपीई) को पत्र भेजा था. डीपीई की स्वीकृति के बाद कोयला अधिकारियों को बढ़े वेतन का लाभ मिलने की उम्मीद थी.
लेकिन डीपीई के रुख से एक बार फिर कोयला अधिकारियों को झटका लगा है. क्योंकि कोयला अधिकारियों की वेतन बढ़ोत्तरी की मांग या पे-अपग्रेडेशन से जुड़े मामले को डीपीई ने खारिज कर दिया है.
एआईएसीई के संयोजक पीके सिंह राठौर ने कहा कि डीपीई ने पे-अपग्रेडेशन के विषय में आगे केबिनेट को भेजा ही नहीं गया. थर्ड-पीआरसी के लागू होने के बाद से ही कोयला अधिकारियों के वेतन में कम बढ़ोत्तरी को लेकर निराशा थी. सबसे ज्यादा जूनियर अधिकारियों में नाराजगी थी. एक बार फिर कोयला अधिकारियों को निराशा हाथ लगी है.
उन्होंने कहा कि डीपीई ने भले ही मंजूरी नहीं दी. लेकिन निराश नहीं हैं. आगे भी इसके लिए प्रयास जारी रखेंगे. विगत 28 जून को इस सिलसिले में संगठन ने डीपीई के सचिव व कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव से मुलाकात कर इस संदर्भ में अधिकारियों की मांग से अवगत कराया गया था. उन्होनें कहा कि कोयला अधिकारियों का तीसरा वेतन पुनरीक्षण एक जनवरी, 2017 को किया गया है.
लेकिन यह करीब डेढ़ वर्ष बाद अगस्त 2018 में लागू किया गया. अधिकारी ओएनजीसी या दूसरे महारत्न कंपनी की तर्ज पर लागू करने की मांग कर रहे थे. इसके लिए धरना-प्रदर्शन तक किया था. विरोध बढ़ने पर कोल इंडिया ने दो कमेटी का गठन किया गया था. कमेटी ने कोल इंडिया की अनुशंसा को मानते हुए कोयला मंत्रालय ने वेतन बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी थी. लेकिन डीपीई ने इसे मंजूर नहीं किया. श्रीराठौर ने कहा कि अगर डीपीई से मंजूरी होती तो इस इस तरह होता बढ़ा वेतन मिलता.
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