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मिरिक झील की घेराबंदी से बढ़ेगी सुंदरता

Updated at : 19 Jun 2019 1:58 AM (IST)
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मिरिक झील की घेराबंदी से बढ़ेगी सुंदरता

मिरिक : मिरिक झील के चारो ओर खुला रहने के कारण समय-समय पर झील में कूदकर आत्महत्या की घटनाएं हो जाती है, जिससे लोगों का दिल दहल जाता है. विगत सत्तर के दशक में इलाके के झाड़ियों को काटने के बाद जमीन खोदकर झील का निर्माण किया गया था. उस दौरान पश्चिम बंगाल में कांग्रेस […]

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मिरिक : मिरिक झील के चारो ओर खुला रहने के कारण समय-समय पर झील में कूदकर आत्महत्या की घटनाएं हो जाती है, जिससे लोगों का दिल दहल जाता है. विगत सत्तर के दशक में इलाके के झाड़ियों को काटने के बाद जमीन खोदकर झील का निर्माण किया गया था. उस दौरान पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय थे.

मिरिक को पर्यटक केंद्र के उद्देश्य से ही तत्कालीन राज्य सरकार ने झील का निर्माण शुरू किया था, जो 1976 में जाकर पूरा हुआ. उस दौरान झील का आयतन 3.5 किलोमीटर है. बताया जाता है कि उसी दौरान से झील के चारो ओर घेराबंदी की व्यवस्था नहीं की गयी थी. इसी के चलते झील को आत्महत्या करने का सबसे परिचित जगह हो गया है.

स्थानीय बुजुर्ग नागरिकों की मानें तो विगत वर्ष तक झील में करीब 50 लोगों ने डूबकर आत्महत्या कर ली थी. मिरिक बाजार से कृष्ण नगर तक के 3.5 किलोमीटर लम्बाई वाला यह झील देशी-विदेशी सैलानियों के लिए सबसे पंसदीदा जगह है. यहां नौका विहार के लिए काफी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं. पर्यटन केंद्र का प्रमुख आकर्षण मिरिक झील में वास्तव में बिना फेंसिंग के सुंदर और आकर्षक दिखता है. परंतु आम नागरिकों की सुरक्षा हेतु झील के आसपास एवं चारो ओर व्यवस्थित घेराबंदी के पक्ष में कुछ लोगों ने अपनी राय व्यक्त की है.
स्थानीय शिक्षक सुरेश प्रधान ने मिरिक झील की सुंदरता को बरकरार करने लिए तथा मानव को आत्महत्या जैसी घटनाओं से बचाने के लिए घेराबंदी का होना नितांत जरूरी है.
वहीं स्थानीय व्यवसायी दिनेश गुप्ता ने कहा कि पर्यटकों के लिए झील आकर्षण का केंद्र है. यहां आनेवाले पर्यटकों में यह संदेश न जाये कि यह झील सुसाइड प्वाइंट हो गया है. इसके लिए संबंधित विभाग फेंसिंग के लिए उचित पहल करे. ऐसा करने से झील में कचरा भी नहीं जा सकेगा और ना ही आत्महत्या की घटनाएं होंगी. स्थानीय युवा भरत प्रधान ने झील के चारोओर मजबूत फेंसिंग की वकालत करते हुए कहा कि पर्यटन विभाग और संबंधित निकाय द्वारा पहल किया जा सके तो झील की सुन्दरता और गरिमा बढ़ने के साथ-साथ झील को प्रदूषण से भी मुक्ति भी मिलेगी.
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