भोजपुर में एक करोड़ का किया गया भुगतान
Updated at : 22 May 2019 6:22 AM (IST)
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कार चालक रवि कुमार भी लौटा सकुशल, पुलिस अधिकारी कर रहे पूछताछ डिप्रेशन में रहे तेजपाल को जांच के बाद चिकित्सकों ने दी आराम की सलाह पुलिस आयुक्त लक्ष्मी नारायण मीणा ने किया दावा- शीघ्र गिरफ्तार होंगे गिरोह के सदस्य सकुशल वापसी की रणनीति पर कार्य कर रही थी कमिश्नरेट पुलिस, सीआइडी आसनसोल / रूपनारायणपुर […]
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कार चालक रवि कुमार भी लौटा सकुशल, पुलिस अधिकारी कर रहे पूछताछ
डिप्रेशन में रहे तेजपाल को जांच के बाद चिकित्सकों ने दी आराम की सलाह
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी नारायण मीणा ने किया दावा- शीघ्र गिरफ्तार होंगे गिरोह के सदस्य
सकुशल वापसी की रणनीति पर कार्य कर रही थी कमिश्नरेट पुलिस, सीआइडी
आसनसोल / रूपनारायणपुर : सालानपुर थाना क्षेत्र के नेकड़ाजोड़िया इलाके से बीते 16 अप्रैल, 2019 को अपहृत युवा उद्योगपति सह बराकर निवासी तेजपाल सिंह और उनका कार चालक रवि कुमार मंगलवार की सुबह सकुशल घर वापस लौट आये. परिजनों ने इस संबंध में कोई टिप्पणी करने से इंकार करते हुए सकुशल घर वापसी पर खुशी जताई है.
हालांकि इस मामले में रविवार को बिहार के भोजपुर जिले में एक करोड़ रूपये की फिरौती देने का बात सामने आई है. घर लौटने के बाद तेजपाल की मेडिकल जांच की गई. रवि को दोपहर बाद पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में लिया. पुलिस आयुक्त लक्ष्मी नारायण मीणा ने कहा कि पुलिस को विशेष जानकारी नहीं मिल पाई है. अपराधी जल्द गिरफ्तार होंगे और फिरौती की राशि भी बरामद कर ली जायेगी.
क्या है मामले का फ्लैश बैक
बराकर हनुमान चढ़ाई निवासी व उद्योगपति जोगिंदर सिंह के इकलौते पुत्र तेजपाल का अपहरण 16 अप्रैल की सुबह सवा 11 बजे सालानपुर थाना के नेकड़ाजोड़िया इलाके से हुआ था. वह प्रतिदिन की तरह सुबह अपने घर से नेकड़ाजोड़िया में स्थित अपना कारखाना आसनसोल एलॉय फेरो स्टील प्लांट के लिए निकले थे. कारखाना गेट से मात्र सौ मीटर की दूरी पर पहले से ही घात लगाकर बैठे अपराधियों ने उनके साथ उनके साथ-साथ चालक रवि कुमार का भी अपहरण कर लिया. इनका अपहरण सफेद रंग के स्कार्पियों से किया गया था. अपहरण के 34 दिन बाद दोनों सकुशल घर वापस हुए.
रविवार को फिरौती का हुआ भुगतान
सूत्रों के अनुसार अपराधी पुलिस को गुमराह करने के लिए तेजपाल के मोबाइल फोन के सिम का उपयोग देश के विभिन्न कोने से कर रहे थे. अपहरण के चार दिन बाद फोन का टावर लोकेशन सिलीगुड़ी में पाया गया. तेजपाल के मोबाइल नंबर से घर के नंबर पर कॉल आया. उसके बाद से 19 मई तक कुल 12 बार फोन आया. लोकेशन तमिलनाडु और पुणे का मिला. दोनों शहरों से तेजपाल के नंबर से से ही घरवालों को फोन आता था. रविवार को पुणे से तेजपाल के नंबर पर घरवालों को 45 बार फोन आया.
पैसे का भुगतान भोजपुर में हुआ
सूत्रों के अनुसार रविवार को जोगिंदर सिंह अपने किसी एक रिश्तेदार को लेकर भोजपुर जिला के नक्सल प्रभावित थाने में पहुंचे. उन्होंने तय स्थल पर एक करोड़ रुपये का भुगतान किया. उन्हें पोन के जरिये ही स्थल का निर्देशन दिया जा रहा था.
फिरौती में 75 करोड़ रुपये की मांग
दोनों अपहृत को मुक्त करने के लिए अपहरणकर्ताओं ने 75 करोड़ रुपये की मांग की थी. यह राशि एक करोड़ रुपये में सलटने की खबर है.पुलिस अपने स्तर से इसकी जांच में जुटी है. मंगलवार को अहले सुबह तेजपाल ने अपने परिजनों को सूचित किया कि उसे मुक्त कर दिया गया है. परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी तथा वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर परिजन दोनों को घर ले कर आये. यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कहां से लाया गया.
सुरक्षित लौटने की रणनीति पर सक्रिय थी पुलिस
तेजपाल के स्वभाव के बारे में मिली जानकारी तथा परिजनों के आग्रह पर पुलिस ने दोनों के सुरक्षित लौटने की नीति पर कार्य शुरू किया था. अपहरण के चार दिन के बाद ही फिरौती की मांग शुरू हो गई थी. लेकिन राशि काफी बड़ी थी. इस कारण से काफी दिनों तक तोल-मोल चलता रहा. पुलिस दूर से ही पूरे मामले पर नजर रख रही थी. उसके सकुशल लौट आने के बाद पुलिस अधिकारी रेस हो गये.
सीआइडी भी था सक्रिय
इस मामले में राज्य मुख्यालय का सीआइडी भी कमीश्नरेट पुलिस को पूरा सहयोग दे रहा था. कमीश्नरेट पुलिस तथा सीआइडी अधिकारियों के बीच सूचना और तकनीक का आदान-प्रदान चल रहा था. पुलिस ने परिजनों की भावनाओं को देखते हुए कई बार अपनी रणनीति बदली और कार्रवाई करने से बचती रही.
तेजपाल से पूछताछ नहीं, रवि हिरासत में
घर सकुशल लौटने के बाद तेजपाल काफी डिप्रेशन में था. परिजनों ने उसकी जांच चिकित्सकों से कराई. चिकित्सकों ने उसे आराम करने की सलाह दी. इस कारण पुलिस अधिकारी उससे पूछताछ नहीं कर सके. इधर उसका कार चालक रवि कुमार भी अपने घर कुमारधुबी उड़ियाधौड़ा लौट आया. सुबह उसने पड़ोसियों से बात भी की. पड़ोसियों के अनुसार उसने बताया कि अपराधियों ने उसकी काफी पिटाई की है. वह पैर से लंगड़ा कर चल रहा था. उसकी पीट पर भी पिटआई के दाग थे. ऐसा लगता है कि अपराधियों ने चैन से उसकी पिटाई की है. दोपहर बाद सालानपुर थाना पुलिस की टीम उसके घर पहुंची तथा उसे हिरासत में लेकर वापस लौट आई. उससे वरीय अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं. पूचताछ का ब्यौरा नहीं मिल पाया है.
चालक को लेकर उठे सवाल
आमतौर पर अपहरण की घटनाओं में अपराधी अपहृत के कार चालक को अपने साथ नहीं ले जाते हैं. या तो हाथ-पैर बांध कर उसे कहीं फेंक देते हैं या फिर उसकी हत्या कर देते हैं. क्योंकि उन्हें अपहृत की सुरक्षा करनी पड़ती है. एक साथ वे दो की सुरक्षा लेने से परहेज करते हैं. लेकिन इस मामले में कार चालक रवि को अपराधी न सिर्फ अपनी साथ ले गये बल्कि इतने दिनों बाद उसे भी सकुशल रिलीज कर दिया. पुलिस अधिकारी उससे विभिन्न मुद्दों पर पूछताछ कर रहे हैं.
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