70 हजार मतों से होगी तृणमूल की जीत

Updated at : 01 May 2019 1:02 AM (IST)
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70 हजार मतों से होगी तृणमूल की जीत

हर विधानसभा क्षेत्र से मिलेगी बढ़त, पांडवेश्वर-बाराबनी निर्णायक हिंदीभाषी मतदाताओं का पूरा मिला समर्थन, सांप्रदायिकता परास्त भविष्य की राजनीति में हिंदीभाषियों की भूमिका और होगी निर्णायक भाजपा से अप्रत्यक्ष गठबंधन बना कर माकपा ने खो दी बची जमीन आसनसोल : मेयर सह पांडवेश्वर के विधायक जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि सोमवार को हुए मतदान के […]

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हर विधानसभा क्षेत्र से मिलेगी बढ़त, पांडवेश्वर-बाराबनी निर्णायक

हिंदीभाषी मतदाताओं का पूरा मिला समर्थन, सांप्रदायिकता परास्त
भविष्य की राजनीति में हिंदीभाषियों की भूमिका और होगी निर्णायक
भाजपा से अप्रत्यक्ष गठबंधन बना कर माकपा ने खो दी बची जमीन
आसनसोल : मेयर सह पांडवेश्वर के विधायक जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि सोमवार को हुए मतदान के बाद इस क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस प्रार्थी मुनमुन सेन की जीत कम से कम 70 हजार मतों से होगी. मंगलवार को विशेष भेंट में उन्होंने कहा कि इस बार हिंदीभाषी मतदाताओं ने बड़ी संख्या में तृणमूल के पक्ष में मतदान किया है तथा आनेवाले समय में राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका नये रूप में सामने आयेगी. उन्होंने जीत का श्रेय पार्टी नेत्री ममता बनर्जी तथा आम मतदाताओं को दिया, जिन्होंने सांप्रदायिक शक्तियों को करारी शिकस्त दी.
श्री तिवारी ने कहा कि पूरे संसदीय क्षेत्र में चुनाव शांतिपूर्ण तथा पूरी निष्पक्षता के साथ संपन्न हुआ. अगर कहीं कोई विवाद हुआ तो उसे भाजपा प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो ने या तो किया या कराया. पारा मिलिट्री फोर्स की तैनाती को लेकर इतना हंगामा हुआ, लेकिन उसकी उपस्थिति में भी चुनाव से विपक्षी पार्टी संतुष्ट नहीं है.
उन्होंने कहा कि जमुआ में श्री सुप्रियो के समर्थकों ने बूथ पर सुबह से ही भारी हंगामा किये रखा. बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के स्थिति नियंत्रित हुई तथा पूरे दिन शांतिपूर्ण मतदान होता रहा. इसी तरह बाराबनी में भी श्री सुप्रियो ने खुद जाकर हंगामा किया. पीठासीन अधिकारियों तथा चुनाव कर्मियों को धमकी दी. मतदान बाधित करने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तो भाजपा के लिए ही कार्य कर रहा है. आखिरकार चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज की?
उन्होंने कहा कि श्री सुप्रियो को पहले से ही अहसास हो चुका था कि वे चुनाव हारनेवाले हैं. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान वे काफी हमलावर बने रहे. तृणमूलकर्मियों तथा आम जनता की पिटाई करते तथा करवाते रहे. लेकिन तृणमूल कर्मियों ने संयम बरता. चुनाव के दिन भी उन्होंने कई स्थानों पर विवाद करने की कोशिश की. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. उन्हें पता था कि उन्हें सबसे बड़ी शिकस्त बाराबनी तथा पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र में मिलनेवाली है, इसलिए वे झूठा प्रचार कर रहे हैं.
मेयर श्री तिवारी ने दावा कि पार्टी प्रत्याशी सुश्री सेन की जीत पक्की है. उन्हें पांडवेश्वर तथा बाराबनी विधानसभा क्षेत्र से कम से कम 40 हजार से अधिक मतों के अंतर से बढ़त मिलेगी. रानीगंज विधानसभा तथा आसनसोल नॉर्थ से भी निर्णायक बढ़त मिलेगी. जबकि कुल्टी, जामुड़िया तथा आसनसोल साउथ विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन पहले की तुलना में काफी बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि भाजपा की हार तय मानकर ही अधिकांश भाजपा कर्मी चुनावी सक्रियता से अलग हो गये थे.
पांडवेश्वर, बाराबनी तथा जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र में चुनावी रीगिंग के बारे में पूछने पर श्री तिवारी ने कहा कि अधिसंख्य बूथों पर पारा मिलिट्री फोर्स तैनात थे. मतदान का संचालन चुनाव आयोग कर रहा था. इसके बाद भी रीगिंग का आरोप किस मुंह से लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ही मुख्य चुनाव आयुक्त बनाकर श्री सुप्रियो चुनाव करा लें, इसके बाद भी जनता के रूख का पता चल जायेगा. उन्होंने कहा कि क्या विपक्षी पार्टियों को पोलिंग एजेंट उपलब्ध कराना भी तृणमूल का ही दायित्व है?उन्होंने कहा कि इस चुनाव में भाजपा तथा माकपा ने मिल कर चुनाव लड़ा.
कई स्थानों पर दोनों के कर्मियों तथा नेताओं ने संयुक्त रणनीति बनाई. दोनों में कोई अंतर ही नहीं रहा. उन्होंने पहले ही कहा था कि माकपा नेताओं ने भाजपा से सांठगांठ कर ली है. मतदान के दिन वह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया. माकपा तथा भाजपा दोनों कहीं भी एक-दूसरे को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं और न उनके बीच कोई टकराव हो रहा है. माकपा नेताओं ने इस चुनाव में अपनी बची-खुची जमीन भी खो दी है.
मेयर श्री तिवारी ने कहा कि इस चुनाव में हिंदीभाषी मतदाताओं ने खुलकर तृणमूल के पक्ष में मतदान किया. इसके लिए उन्होंने उनके प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि भाजपा प्रार्थी श्री सुप्रियो की पहली जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, लेकिन श्री सुप्रियो ने इन मतदाताओ की न सिर्फ उपेक्षा की, बल्कि उन्हें अपना शिकार भी बनाया. उन्होंने चुनचुन कर हिंदीभाषी नेतआओं की पिटाई की तथा उन्हें झूठे मामलों में फंसाया. इसका परिणाम भी उनके सामने मिल गया. उन्होंने दावा किया कि आनेवाले समय में हिंदीभाषी मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका और मजबूत होगी.
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