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आसनसोल संसदीय क्षेत्र से कभी नहीं जीत पायी है तृणमूल कांग्रेस

Updated at : 14 Mar 2019 1:47 AM (IST)
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आसनसोल संसदीय क्षेत्र से कभी नहीं जीत पायी है तृणमूल कांग्रेस

पांच बार लगातार मलय घटक को चुनावी मैदान में उतारा पार्टी ने पिछले चुनाव में श्रमिक नेता दोला सेन भी नहीं दिखा पायीं करामात मुनमुन के समक्ष चुनौती है अब तक की निराशा को जीत में बदलने की आसनसोल : 26 सालों तक कांग्रेस की राजनीति करने के बाद ममता बनर्जी ने पहली जनवरी, 1998 […]

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पांच बार लगातार मलय घटक को चुनावी मैदान में उतारा पार्टी ने

पिछले चुनाव में श्रमिक नेता दोला सेन भी नहीं दिखा पायीं करामात
मुनमुन के समक्ष चुनौती है अब तक की निराशा को जीत में बदलने की
आसनसोल : 26 सालों तक कांग्रेस की राजनीति करने के बाद ममता बनर्जी ने पहली जनवरी, 1998 को तृणमूल कांग्रेस का गठन किया. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने आसनसोल संसदीय क्षेत्र से छह बार चुनाव लड़ा. हर बार मुख्य प्रतिद्वंदिता में रहने के बाद भी अब तक तृणमूल अपनी जीत का परचम नहीं लहरा पायी है.
वर्ष 1998 में हुए संसदीय चुनाव में पार्टी ने अजीत कुमार घटक उर्फ मलय घटक को प्रत्याशी बनाया. पहले ही चुनाव में पार्टी मुख्य प्रतिस्पर्धा में आ गयी. लेकिन उसे जीत नहीं मिली. सीपीआई (एम) के प्रत्याशी विकास चौधरी ने श्री घटक को 26 हजार से अधिक मतों से पराजित किया. कुल 12,42,690 मतदाताओं में से 70.87 फीसदी यानी 8,80,747 मतदाताओं ने मतदान किया. सीपीआई (एम) को 3,55,382 मत तथा श्री घटक को 3,29,233 मत मिले. तीसरे स्थान पर रही कांग्रेस के प्रत्याशी एसएस अहलूवालिया को 1,10,618 मत मिले.
वर्ष 1999 में हुए मध्यावधि चुनाव में आसनसोल संसदीय क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस ने पुन: अजीत घटक उर्फ मलय घटक को प्रत्याशी बनाया. लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. उल्टे जीत के मतों का अंतर और भी बढ़ गया. इस बार कुल मतदाता 12,65,330 मतदाताओं में से 65.52 फीसदी यानी 8,29,147 मतदाताओं ने मतदान किया. सीपीआई (एम) प्रत्याशी विकास चौधरी को 3,77,265 मत तथा श्री घटक को 3,39,401 मत मिले. जीत का अंतर 26 हजार से बढ़ कर 38 हजार हो गया.
वर्ष 2004 में हुए संसदीय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने फिर से मलय घटक को अपना प्रत्याशी बनाया. इस बार भी उसकी टक्कर सीपीआई (एम) प्रत्याशी विकास चौधरी से ही हुआ. कुल मतदाताओं की संख्या 10,92,141 मतदाताओं में से 66.40 फीसदी यानी 7,25,198 मतदाताओं ने मतदान किया. श्री चौधरी को 3,69,832 मत मिले जबकि श्री घटक को 2,45,514 मत मिले. इस चुनाव में श्री घटक को 1.25 लाख से अधिक मतों से पराजय का सामना करना पड़ा.
पहली अगस्त 2005 को सांसद श्री चौधरी की मौत हो गई. इसके कारण पांच सितंबर को मध्यावधि चुनाव हुआ. मध्यावधि चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पुन: मलय घटक को अपना प्रत्याशी बनाया. जबकि सीपीआई (एम) ने राज्य सरकार के तत्कालीन मंत्री वंशगोपाल चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया. कुल 6,69,740 मतदाताओं ने मतदान किया. सहानुभूति के आधार पर माकपा ने तृणमूल को 2.30 लाख मतों के अंतर से पराजित किया. माकपा प्रत्याशी श्री चौधरी को 4,10,740 मत तथा तृणमूल प्रत्याशी श्री घटक को 1,80,799 मत मिले.
वर्ष 2009 में हुए संसदीय चुनाव में तृणमूल ने फिर से मलय घटक को ही अपना प्रत्याशी बनाया. जबकि सीपीआई (एम) ने पुन: श्री चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा. इस बार कुल 8,93,704 मतदाताओं ने मतदान किया. इनमें से सीपीआई (एम) प्रत्याशी श्री चौधरी को 4,35,161 मत तथा तृणमूल प्रत्याशी श्री घटक को 3,62,205 मत मिले.
तृणमूल कांग्रेस को करीब 77 हजार मतों के अंतर से मात मिली. वर्ष 2014 में मलय घटक राज्य सरकार में मंत्री थे. इस बार तृणमूल ने श्रमिक नेत्री दोला सेन को प्रत्याशी बनाया. भाजपा ने नरेन्द्र मोदी की सुनामी में पार्श्वगायक बाबुल सुप्रिय को प्रत्याशी बनाया जबकि सीपीआई(एम) ने वंशगोपाल चौधरी को ही मैदान में उतारा.
लेकिन बाजी भाजपा ने मारी तथा तृणमूल फिर दूसरे स्थान पर ही रह गई. भाजपा प्रत्याशी श्री सुप्रिय को 4,19,983 मत, तृणमूल प्रत्याशी दोला सेन को 3,49,503 मत तथा सीपीआई (एम) प्रत्याशी श्री चौधरी को 2,55,829 मत मिले. भाजपा ने तृणमूल को 70 हजार मतों से पराजित किया.
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