ePaper

आसनसोल : केएनयू में मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

Updated at : 23 Jan 2019 12:14 AM (IST)
विज्ञापन
आसनसोल :  केएनयू में मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

आसनसोल : काजी नजरूल यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन स्थित सभागार में मंगलवार को यूनिवर्सिटी के एप्लाईड साइकॉलोजी विभाग एवं सेंटर फॉर काउंसिलिंग एंड पोजीटिव साइकॉलोजी (काजी नजरूल यूनिवर्सिटी) द्वारा मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. उदघाटन कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती, कोलकाता यूनिवर्सिटी के साइकॉलोजी विभाग की सहायक प्रोफेसर संयुक्ता […]

विज्ञापन
आसनसोल : काजी नजरूल यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन स्थित सभागार में मंगलवार को यूनिवर्सिटी के एप्लाईड साइकॉलोजी विभाग एवं सेंटर फॉर काउंसिलिंग एंड पोजीटिव साइकॉलोजी (काजी नजरूल यूनिवर्सिटी) द्वारा मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी.
उदघाटन कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती, कोलकाता यूनिवर्सिटी के साइकॉलोजी विभाग की सहायक प्रोफेसर संयुक्ता दास, रांची इंस्टिच्यूट ऑफ न्यूरोसाईकेट्री एवं एलाईड साइंस, रांची (झारखंड) के क्लिनिकल साइकॉलोजी विभाग के प्रोफेसर अमूल रंजन सिंह ने किया.
आयोजक कमेटी के संयोजक सह केएनयू के एप्लाइड साइकॉलोजी विभाग सहायक प्रोफेसर सह शुभव्रत पोद्दार, परामर्श एवं सकारात्मक मनोविज्ञान केंद्र की संयोजक उर्वी मुखर्जी, संयुक्त संयोजक सह एप्लाइड साइकॉलोजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ रौशनलाल देवांगन, परामर्श एवं सकारात्मक मनोविज्ञान केंद्र के सह संयोजक अनन्या पॉल आदि उपस्थित थीं. संचालन सह संयोजक उर्वी मुखर्जी ने किया. स्वागत रजिस्ट्रार शितांशु गुहा ने किया.
कुलपति डॉ चक्रवर्ती ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों एवं समस्याओं को समाज में गंभीरता से न लेकर सिरे से नकार दिये जाने की परंपरा है. इस तरह की समस्याओं को समाज उतनी गंभीरता से नहीं लेता, जिससे कि प्रभावित व्यक्ति कई तरह की जटिल समस्याओं में जकडता जाता है. देश में शारीरिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा को केंद्र कर हजारों अस्पताल बने हैं.
परंतु मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उतने स्वास्थ्य केंद्र और काउसिंगलिंग सेंटर नहीं खोले गये हैँ.उन्होंने कहा कि विकसित देशों अमेरिका, रूस, फ्रांस आदि में मानसिक समस्याओं एवं तनाव से निबटने को लेकर अलग से पर्याप्त संख्या में मानसिक स्वास्थ्य केंद्र एवं परामर्श केंद्र निर्मित किये गये हैँ.
कोलकाता यूनिवर्सिटी की संयुक्ता दास ने अवसाद (डीप्रेशन) एवं इसके जागरूकता को लेकर व्याख्यान प्रस्तुत किये. उन्होंने कहा कि मानव जीवन में अवसाद कई कारणों से हो सकता है.
उन्होंने संगोष्ठी में उपस्थित स्टूडेंटस से तनाव एवं जागरूकता को गंभीरता से समझने एवं इससे बचने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कामकाजी लोगों एवं अध्यनरत स्टूडेंटस में तनाव आम बात है.
उन्होंने लोगों को तनाव एवं तनाव के कारणों को पहचान कर इसका इलाज करने और तनाव मुक्त जीवन यापन करने का आग्रंह किया. तनाव को अनदेखा करने से बढता तनाव मनुष्य के जीवन में विभिन्न शारीरीक बिमारियों को जनम देता है.
प्रो. सिंह ने तनाव एवं इसके प्रबंधन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किये. उन्होंने कहा कि तनाव प्रत्येक मनुष्य के जीवन में जीवन के प्रत्येक क्षण साथ साथ चलता रहता है. तनाव मनुष्य के साथ आदि अनंतकाल से विधमान है और इससे बचा नहीं जा सकता है.
उन्होंने कहा कि तनाव प्रबंधन के जरीये तनाव को कम कर स्वस्थ, सुखी एवं संतुष्ट जीवन जीया जा सकता है. बशर्ते तनाव प्रबंधन को सीखना और जीवन में लागू करना होगा. संगोष्ठी के बाद स्टूडेंटस द्वारा तनाव एवं अवसाद पर पूछे गये प्रश्नों का जवाब दिया गया.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola