प्रशासन ने रोकी नाबालिग की शादी, नाबालिग कॉलेज छात्रा ने शादी रोकने की लगायी थी गुहार
Updated at : 09 Nov 2018 12:34 AM (IST)
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आसनसोल : पाण्डवेश्वर थाना अंतर्गत बैधनाथपुर ग्राम पंचायत के महाल गांव की निवासी तथा पाण्डवेश्वर कॉलेज में कला संकाय की प्रथम वर्ष की छात्रा सुदेशना मंडल ने अपनी शादी का विरोध किया है. उसने खुद को नाबालिग होने के प्रमाणपत्र के साथ कन्याश्री परियोजना के जिला नॉडल अधिकारी सह डिप्टी मजिस्ट्रेट मानस पांडा से गुरुवार […]
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आसनसोल : पाण्डवेश्वर थाना अंतर्गत बैधनाथपुर ग्राम पंचायत के महाल गांव की निवासी तथा पाण्डवेश्वर कॉलेज में कला संकाय की प्रथम वर्ष की छात्रा सुदेशना मंडल ने अपनी शादी का विरोध किया है. उसने खुद को नाबालिग होने के प्रमाणपत्र के साथ कन्याश्री परियोजना के जिला नॉडल अधिकारी सह डिप्टी मजिस्ट्रेट मानस पांडा से गुरुवार को फोन पर अपनी शादी रुकवाने की गुहार लगाई.
श्री पांडा की पहल पर सुदेशना की शादी उसके माता-पिता ने रोक दी तथा बालिग होने पर ही विवाह का आश्वासन दिया. महाल गांव निवासी साधन मंडल तथा उनकी पत्नी रीना मंडल की संतान सुदेशना है. परिजनों ने उसकी शादी की तैयारी शुरू कर दी थी. पहले तो उसने अपने परिजनों को समझाया कि अभी वह शादी नहीं करना चाहती है और आगे पढ़ना चाहती है.
लेकिन परिजनों ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया तथा दावा किया कि शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखी जा सकती है. इसके बाद विवश होकर सुदेशना ने प्रशासन से गुहार लगाने का निर्णय लिया. उसने जिला के वेब पोर्टल से कन्याश्री के नॉडल अधिकारी श्री पांडा का मोबाइल फोन नंबर खोज निकाला और गुरुवार की सुबह उन्हें फोन करके पूरी जानकारी दी.
अपने घर का पूरा पता और मोबाइल नंबर भी उन्हें दिया. महाल गांव के निवासी और होटल व्यवसायी श्री मंडल की दो पुत्रियों में सुदेशना बड़ी है. उसने पाण्डवेश्वर आरसी बालिका विद्यालय से इस वर्ष उच्च माध्यमिक परीक्षा उतीर्ण होकर पाण्डवेश्वर कॉलेज के कला संकाय में अपना नामांकन कराया है. उसे कन्याश्री केवन परियोजना के तहत आर्थिक वर्ष 2018-19 में एक हजार रुपये का सरकारी अनुदान मिला है. उसकी उम्र 17 साल चार माह है.
उसके पिता ने उसकी शादी बीरभूम जिला के खयरासोल प्रखण्ड के लाउबेड़िया गांव के निवासी श्यामल मंडल के पुत्र सुशांत मंडल से तय कर दी. 24 नवंबर को दोनों की शादी का दिन निर्धारित था. जिसे लेकर आमंत्रण कार्ड भी बंटना आरम्भ हो गया था. कन्याश्री परियोजना के जिला नॉडल अधिकारी श्री पांडा ने कहा कि सुदेशना ने उसे फोन कर बताया कि वह आगे पढ़ाई करना चाहती है. इसमें प्रशासन उसकी मदद करे. उन्होंने तत्काल इस मुद्दे पर कार्रवाई के लिए स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) कौशिक समादार से संपर्क किया.
कार्यालय बंद रहने के बावजूद बीडीओ श्री समादार ने अपने कार्यालय के कन्याश्री डाटा प्रबंधक को पुलिस के साथ सुदेशना के घर भेजा. अधिकारियों ने उसके पिता और माता को समझाया कि नाबालिग लड़की की शादी कराना कानूनन जुर्म है. छात्रा को कन्याश्री परियोजना के तहत केवन का लाभ मिल रहा है. यदि उसने लगातार पढ़ाई जारी रखा तो उसे कन्याश्री केटू के तहत एकमुश्त 25 हजार रुपये की राशि मिलेगी. इसके साथ ही शादी के लिए रूपश्री परियोजना के तहत भी एकमुश्त 25 हजार रुपये मिलेंगे.
ऐसे में शादी करने से उसे सभी लाभ से वंचित होना पड़ेगा और उसकी पढ़ाई भी अधूरी रह जायेगी. इसके बाद परिजन मान गये और फिलहाल शादी स्थगित करने का फैसला किया.
श्री मंडल ने अधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे अपनी बेटी की शादी उसके 18 वर्ष की उम्र पूरा होने के बाद ही करेंगे. इस साहसिक कदम के लिए जिलाशासक शशांक सेठी ने छात्रा की हौसला अफजाही की और प्रशासनिक अधिकारियों को इस मामले में त्वरित करवाई के लिए उनकी सराहना की.
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