प्लास्टिक से भरे पड़े हैं शहर के अधिसंख्य हाई ड्रेन
Updated at : 10 Jul 2018 2:02 AM (IST)
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आसनसोल : आसनसोल में मानसून की पहली बारिश ने ही शहर के निचले इलाकों के कई घरों में पानी भर दिया. घरों में पानी जाने का सबसे बड़ा कारण है शहर में जल निकासी का सही इंतजाम नहीं होना है. शहर में हर हिस्से में नाली तो है लेकिन नियमित रुप से सफाई नहीं हो […]
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आसनसोल : आसनसोल में मानसून की पहली बारिश ने ही शहर के निचले इलाकों के कई घरों में पानी भर दिया. घरों में पानी जाने का सबसे बड़ा कारण है शहर में जल निकासी का सही इंतजाम नहीं होना है. शहर में हर हिस्से में नाली तो है लेकिन नियमित रुप से सफाई नहीं हो पाने के कारण लगभग आधा हिस्सा इसका भरा हुआ है.
किसी भी शहर में जल निकासी के लिए तीन तरह की नालियां बनाई जाती है. इनमें सबसे बड़ी नाली है शहर का सारा कचड़ा बाहर ले जाकर किसी नदी या नाले में फेंकती है. लेकिन आसनसोल में बड़ी नालियों का हाल भी इस मामले में बेहाल है. आसनसोल में बस्तीन बाजार और चेलीडंगाल की हाई ड्रेन का पानी गारूई नदी में जाता है. लेकिन नियमित रुप से इनकी सफाई न हो पाने के कारण इनसे जल की निकासी नहीं हो पा रही है.
साल 2011 की जनगणना के अनुसार आसनसोल की जनसंख्या 5,63,917 है. जबकि प्रतिवर्ष बारिश औसतन 300 मिलीमीटर तक होती है. इतनी बारिश के लिए शहर में जल निकासी का व्यवस्था भी मजबूत होना चाहिए थी. शहर के बस्तीन बाजार और चेलीडंगाल की दो हाई ड्रेन ही शहर के अधिकांश इलाकों का कूडा ढ़ो रही हैं. बारिश के पानी को शहर से बाहर निकालने में ये सक्षम नहीं हो पा रही है. मेयर परिषद स्दस्य (सेनेटरी) लखन ठाकुर ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि नालियों तथा हाई ड्रेन की सफाई नियमित रूप से होती हैं. लेकिन इसके साथ ही नागरिकों की जागरूकता भी जरूरी है.
प्लास्टिक का उपयोग ज्यादा
केंद्र सरकार और राज्य सरकार के प्लास्टिक में लगे बैन के बावजूद भी शहर में धड़ल्ले से प्लास्टिक का प्रयोग किया जा रहा है. प्रयोग कर इसे नालियों में फेंक देते हैं. जिसके कारण नालियों से होता हुआ यह हाई ड्रेन तक पहुंच जाता है. इससे हाई ड्रेन अवरुद्ध हो जाती है तथा जल प्रवाह रूक जाता है. पंपू तालाब के पास हाई ड्रेन में प्लास्टिकों का ढेर लगा हुआ. जिसके कारण ही बारिश के दिनों में हाई ड्रेन उफान से बहने लग जाती है. उन्होंने कहा कि जनता को भी इसमें सहयोग करना चाहिए. प्लास्टिक का प्रयोग न करें. कपड़े के थैले का प्रयोग किया जाये ताकि पर्यावरण भी सुरक्षित बना रहें.
लगातार बन रही है बिल्डिंग
शहर में आवास निर्माण के कारण कहीं भी मिट्टी वाली नाली नहीं रह गयी है. इसके कारण नालियों का पानी भूमि के अंदर नहीं जा पाता है. नालियों का सारा पानी हाई ड्रेन तक जाता है.
सीमेंट की सीमेंट की पक्की गली के कारण भी पानी का भूमिगत संरक्षण नहीं हो पा रहा है. यदि डायमंड शेप के पत्थर का इस्तेमाल किया जाये तो इसके प्रयोग से उनके गैप से पानी नीचे मिट्टी में चल जायेगा. कई जगहों में पानी भर जाने के कारण बारिश के दिनों में मच्छर पनपने लगते हैं. जिसके कारण ही डेंगू, चिकनगुनिया, हैजा जैसी बीमारियां होने लगती है.
रेल प्रशासन से मांगा सहयोग
जल निकासी की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेयर जितेंद्र तिवारी के निर्देश पर आसनसोल नगर निगम प्रशासन ने डीआरएम से पंपू तालाब में हाई ड्रेन के समानान्तरण एक और हाई ड्रेन बनाने का प्रस्ताव दिया है. लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली है. रेलवे का तर्क था कि इस तालाब का पानी सप्लाई किया जाता है. गंदे पानी की सप्लाई से लोग बीमार हो सकते हैं.
आसनसोल रेल मंडल के डीईएन (वन) एमके मुखोपाध्याय ने बताया कि नगर निगम के द्वारा नालियां तो बनाई गई है, लेकिन उनकी नियमित रुप से सफाई नहीं होती है. बस्तीन बाजार वाले नाले में घरों के कचड़े के साथ-साथ बाजार का भी कचड़ा आता है. कचड़ा अत्यधिक होने के कारण इसमें पानी का बहाव सही रुप से नहीं हो पाता है. जिसके कारण रेलवे कॉलोनी में बारिश के दिनों में नाले का गंदा पानी आ जाता है.
शहर से बाहर पानी निकलने की व्यवस्था
एमएमआइसी श्री ठाकुर ने बताया कि शहर में कई हाई ड्रेन है. जिनकी क्षमता इतनी है कि मूसलाधार बारिश का पानी भी आधे घंटे में पूरी तरह से बह जाएगा. लेकिन शहर में प्लास्टिकों का अत्यधिक प्रयोग और कचड़े का सही जगह पर नहीं फेंकने के कारण यह नाले पूरी तरह से भरते जा रहे हैं. जिसके कारण नाले उफान पर आ जाते हैं. नेहरू पार्क के पास, किरंडीह, श्यामडीह , बांगो गांवों में नाली बनाने का काम चल रहा है. इसके साथ ही साथ संथालपाड़ा में नाली निर्माण चल रहा है. अड्डा द्वारा हीरापुर रीवरसाइड हॉस्टल मोड़ के पास एक नाला बनाया गया है.
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