महज कागजों पर ही चला मिशन निर्मल बांग्ला सालानपुर में
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jul 2018 3:25 AM (IST)
विज्ञापन

आसनसोल : मिशन निर्मल बांग्ला (एमएनबी) के तहत निर्मल प्रखण्ड का दर्जा प्राप्त कर चुके सालानपुर प्रखण्ड की जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. सालानपुर को एक दिसंबर, 2016 को निर्मल प्रखण्ड का दर्जा प्राप्त हुआ. राज्य और केंद्रीय टीम ने जांच के बाद इसे निर्मल प्रखण्ड की स्वीकृति दी. लेकिन […]
विज्ञापन
आसनसोल : मिशन निर्मल बांग्ला (एमएनबी) के तहत निर्मल प्रखण्ड का दर्जा प्राप्त कर चुके सालानपुर प्रखण्ड की जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. सालानपुर को एक दिसंबर, 2016 को निर्मल प्रखण्ड का दर्जा प्राप्त हुआ. राज्य और केंद्रीय टीम ने जांच के बाद इसे निर्मल प्रखण्ड की स्वीकृति दी.
लेकिन निर्मल प्रखण्ड बनने के लिए सरकार द्वारा तैयार मानकों पर यह प्रखण्ड में खरा उतरने पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है. हर ग्राम पंचायात क्षेत्र में सैकड़ों लोग है जिन्हें शौचालय नहीं मिला और वे खुले में शौच करते है. प्रखण्ड की 12 संसदों वाली जीतपुर उत्तररामपुर ग्राम पंचायत के आठ संसद ऐसे है जहां सैकड़ो लोग खुले में शौच करते हैं.
बेसलाईन सर्वे के आधार पर शौचालय बना
वर्ष 2012-13 में हुए बेसलाईन सर्वे के आधार सालानपुर प्रखण्ड में 7051 परिवारों के घरों में शौचालय बनाने के लिए चिन्हित किया गया. यह परिवार बीपीएल और प्रतिबंधित एपीएल थे. लेकिन यह बीपीएल और एपीएल की तालिका पर ही सवालिया निशान लगा हुआ है कि यह तालिका सही नहीं है.
इस आधार पर चिन्हित परिवारों के घरों में शौचालय बनाने का लक्ष्य प्रखण्ड ने नवम्बर 2016 में ही पूरा कर लिया. एक दिसम्बर, 2016 को बर्दवान के तत्कालीन जिलाशासक डॉ सौमित्र मोहन ने सालानपुर में आकर इस प्रखण्ड को निर्मल प्रखण्ड की घोषणा की. जिसके उपरान्त विभागीय स्तर पर सर्वे कराया गया और त्रुटियों को संशोधित किया गया. इसके बाद राज्य और केंद्रीय स्तर की टीम ने यहां का दौरा कर सालानपुर के निर्मल प्रखण्ड के दर्जा को मान्यता दे दी
बेसलाईन सर्वे हुआ ही नहीं
जीतपुर उत्तररामपुर ग्राम पंचायत के नमोकेशिया संसद में बेसलाईन सर्वे का कार्य ही नहीं हुआ. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जब शौचालय निर्माण का कार्य आरंभ हुआ, उस दौरान यहां के लोगों ने काफी हंगामा किया था. इसके अलावा कल्याणग्राम चार में महुलडांगा इलाके में 40, कल्याणग्राम छह नंबर इलाके में डांगालपाड़ा, गियाडोबा में 70, कुसुमकनाली में 25, गियाडोबा में 40, कीर्तनशाला में 50, रामपुर में 70, जीतपुर में 80, ताँतीपाड़ा में 60 परिवार ऐसे है जिनका नाम बेसलाईन सर्वे में न होने से उन्हें शौचालय नहीं मिला. यह परिवार अब भी खुले में ही शौच करते है.
अनेकों बार किया गया आवेदन
पंचायत सुत्रों के अनुसार बेसलाईन सर्वे में पंचायत के सैकड़ों ऐसे परिवार थे जिनका नाम सूची में शामिल होना चाहिए था. लेकिन उनका नाम उनमें नहीं था और वे खुद शौचालय बनाने की स्थिति में नहीं थे. इनकी सूची बनाकर अनेकों बार बीडीओ कार्यालय में जमा की गयी. जवाब एक ही था- सर्वे में नाम न होने से शौचालय नहीं मिलेगा. निगरानी कमेटी की टीम जब जब उन्हें खुले में शौच करने से रोकने गयी, उनका एक ही जवाब होता था- शौचालय बना दीजिये.
आखिरकार पंचायत ने अपने अपने फंड से नमोकेशिया में दस, कुसुम कनाली में दो, डांगालपाड़ा में दो, जीतपुर में दो, तांतीपाड़ा में दो जीतपुर में दो कुल 20 सामूहिक शौचालय का निर्माण किया. जिसमें 10 पुरुष 10 महिला शौचालय है. यह काफी नहीं है. जगह की भी समस्या है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का ट्रीटमेंट प्लांट प्रखण्ड के एकमात्र इसी पंचायत में बना है.
ग्रामीणों ने किया आवेदन
नमोकेशिया के दिहाड़ी श्रमिक परिमल टुडू, आंनद राय ने बताया कि उनके इलाके में सर्वे ही नहीं हुआ. जिससे किसी को शौचालय नहीं मिला. रामपुर के दिहाड़ी श्रमिक विजय राय, अनंत राय, जीतपुर के परिमल राय आदि ने बताया कि वे लोग आर्थिक रूप से काफी कमजोर है. किसी तरह जीविका चलाते है. उनसे बेहतर स्थिति में रहने वालों को शौचालय मिला. सामूहिक शौचालय देखरेख न होने के कारण उसका उपयोग कोई नहीं करता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




