सीएमडी, डीपी को रांची हाई कोर्ट का शोकॉज
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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आसनसोल : रांची हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने शुक्रवार को हाई कोर्ट की अवमानना से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) तथा कार्मिक निदेशक (डीपी) को शोकॉज नोटिस जारी किया. कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि अदालत के आदेश […]
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आसनसोल : रांची हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने शुक्रवार को हाई कोर्ट की अवमानना से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) तथा कार्मिक निदेशक (डीपी) को शोकॉज नोटिस जारी किया.
कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि अदालत के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया? उक्त प्रतिवादियों को अदालत में सशरीर उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात मई की तिथि निर्धारित की है. कंपनी के आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जायेगा.
सनद रहे कि इस मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने हाई कोर्ट को बताया कि इसीएल ने हाई कोर्ट की एकल पीठ के आदेश का अनुपालन नहीं किया. जबकि एकल पीठ ने मैट्रिक प्रमाण पत्र के आधार पर प्रार्थी की जन्म तिथि में सुधार करने का आदेश दिया था.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी विनोद कुमार झा ने अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के आदेश के अनुपालन कराने की मांग की है. वे इसीएल में कार्यरत हैं. उनकी जन्म तिथि को लेकर विवाद चल रहा था. उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. एकल पीठ ने प्रार्थी के पक्ष में फैसला दिया था. लेकिन कोर्ट के निर्णय का क्रियान्वयन कंपनी के स्तर से नहीं किया गया है.
आसनसोल : आसनसोल महकमा कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संदीप चक्रवर्ती ने शनिवार को स्थानीय सांसद सह केंद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्नी बाबुल सुप्रियो की पावर ऑफ अटर्नी होल्डर आसनसोल निवासी सुष्मिता दास की सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत दायर मामले को कंप्लेन केस के रूप मेंट्रीट किया. उन्होंने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 25 अप्रैल निर्धारित की है.
इस शिकायत याचिका में भारतीय पुलिस सेवा के वरीय अधिकारी रूपेश कुमार और पुलिस निरीक्षक देवज्योति साहा के खिलाफ आसनसोल नार्थ थाना में आईपीसी की धारा 336/ 332/ 352/ 186/ 341/ 323/ 120बी के तहत एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगायी गयी है.
क्या है पूरा मामला
श्रीमती दास की ओर से उच्च न्यायालय की अधिवक्ता प्रियंका टिकडीवाल ने अदालत में वकालतनामा दायर किया. अदालत ने मामले को संज्ञान में लेकर कोर्ट ने शनिवार को अपना निर्णय सुनाया. श्रीमती टिकडीवाल ने हलफनामा में लिखा है कि रामनवमी के दौरान आसनसोल में फैली हिंसा का जायजा लेने 29 मार्च को स्थानीय सांसद सह केंद्रीय राज्य मंत्नी बाबुल सुप्रिय आसनसोल आये और हिंसा प्रभावित इलाके में जाने का प्रयास किया.
उस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ र्दुव्यवहार किया. पुलिस ने सीआरपीसी 144 धारा के उल्लंघन का हवाला देकर उन्हें रोका और र्दुव्यवहार किया. वही स्थानीय मेयर 144 धारा की धज्जियां उडाते हुए अपनी वाहन लेकर हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा कर रहे थे. दोनों ही इलाके के जनप्रतिनिधि थे.
पुलिस का यह पक्षपात रवैया क्यों था?
मंत्नी ने पुलिस द्वारा किये गए र्दुव्यवहार के खिलाफ आसनसोल नार्थ थाने में शिकायत दर्ज करायी. लेकिन शिकायत के आधार पर कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुयी. जबकि पुलिस के निरीक्षक देवज्योति साहा की शिकायत पर आसनसोल नार्थ थाना पुलिस ने मंत्नी के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की.
इसके तहत न्यायालय के समक्ष गुहार लगायी गयी कि आईपीएस रूपेश कुमार और पुलिस निरीक्षक देव ज्योति साहा के खिलाफ भी आसनसोल नॉर्थ थाना में आईपीसी की धारा 336/ 332/ 352/ 186/ 341/ 323/ 120बी के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.
क्या निर्णय सुनाया कोर्ट ने
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री चक्रवर्ती ने शनिवार को अपना निर्णय सुनाया. उन्होंने इस मामले की जांच का दायित्व स्थानीय थाना पुलिस को देने का निर्णय नहीं लिया. बल्कि इस मामले के कंप्लेन केस के रूप में ट्रीट किया. इसका तात्पर्य यह है कि श्री सुप्रिय की शिकायत की जांच पुलिस नहीं करेगी. कंप्लेन केस होने के कारण इसकी सुनवाई सीधे कोर्ट कैंपस में होगी.
इस पर आगामी 25 अप्रैल को सुनवाई होगी. न्यायिक सूत्रों के अनुसार इस स्थिति में कोर्ट के पास दो विकल्प है. पहला कि कोर्ट स्वयं इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करें तथा उस पर सुनवाई करें. दूसरा विकल्प है कि एसीजेएम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करने का दायित्व अन्ेय किसी कोर्ट को दे दें.
इस स्थिाति में एसीजेएम कोर्ट या अन्य संबंधित कोर्ट को सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करनी होगी तथा उनके जवाब पर आगे की कार्रवाई तय की जायेगी. इसकी भी संभावना है कि इन दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट सम्मन जारी करें तथा इन अधिकारियों को कोर्ट में आकर जमानत लेनी पड़े.
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