यूनियनों ने मांगा मैन पावर स्टेटमेंट
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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स्थगन. कोल इंडिया में वीआरएस के मुद्दे पर बना हुआ है टकराव दोनों पक्षों में सीआईएल तथा इसकी अनुषांगिक कोयला कंपनियों के 37 भूमिगत खदानों की बंदी तथा 15 हजार से अधिक कर्मियों के वीआरएस के मुद्दे पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पायी. यह मामला यूनियनों के विरोध के कारण उलझता जा रहा […]
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स्थगन. कोल इंडिया में वीआरएस के मुद्दे पर बना हुआ है टकराव दोनों पक्षों में
सीआईएल तथा इसकी अनुषांगिक कोयला कंपनियों के 37 भूमिगत खदानों की बंदी तथा 15 हजार से अधिक कर्मियों के वीआरएस के मुद्दे पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पायी. यह मामला यूनियनों के विरोध के कारण उलझता जा रहा है.
सांकतोडिया : कोल प्रबंधन पहले यह स्पष्ट करे कि खदान में कार्यरत कर्मियों की संख्या सरप्लस है. इसके बाद ही कर्मियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा की जायेगी. सबकमेटी की बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों ने वीआर प्रस्ताव पर अपना विरोध जताते हुए एक सिरे से खारिज कर दिया. अब इस मामले पर एपेक्स जेसीसी की बैठक में निर्णय लिया जायेगा. स्पेशल फीमेल वीआरएस पर निर्णय लिया गया कि टेक्निकल कार्य में लगी महिला कर्मियों को वीआरएस नहीं दिया जायेगा.
कोयला कर्मियों को वीआरएस, स्पेशल फीमेल वीआरएस एवं पोस्ट मेडिकल मुद्दे को लेकर जेबीसीसीआई सबकमेटी की बैठक एसईसीएल के बिलासपुर में आयोजित हुयी. कमेटी के अध्यक्ष एवं एसईसीएल के सीएमडी बीआर रेड्डी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच लंबी बहस हुई.
कोल इंडिया में तीन लाख कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं. मैनपावर लगातार कम होते जा रहा है. इसके बाद भी वीआरएस लागू करने पर यूनियन प्रतिनिधियों ने प्रबंधन से पूछा कि पहले यह स्पष्ट हो जाये कि कोल इंडिया में सरप्लस मैनपावर है. खदान में कर्मियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. नयी भर्ती के बजाय आउटसोर्सिंग व निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस पर प्रबंधन स्पष्ट रु प से अपना पक्ष नहीं रख सका. सभी यूनियन प्रतिनिधियों ने एकजुटता के साथ ही सामान्य स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव खारिज कर दिया.
इसके बाद स्पेशल फीमेल वीआरएस पर चर्चा की गई. वर्ष 2014 एवं 2015 में यह स्कीम लागू हुई थी, तब वीआरएस देने को लेकर मतभेद उत्पन्न हो गया था. तकनीकी कार्य कर रही महिलाकर्मियों ने भी आवेदन किया. वीआरएस की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से प्रबंधन ने इन आवेदनों को रोक दिया. गुरूवार की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा कर स्पष्ट किया गया कि तकनीकी कार्य में संलग्न महिलाकर्मियों को वीआरएस नहीं दिया जायेगा. अन्य सभी महिलाकर्मियों का वीआरएस स्वीकार होगा.
इसी तरह पोस्ट मेडिकल स्कीम को अंतिम रूप देने स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी गठन करने का निर्णय लिया गया. बैठक में एसईसीएल के कार्मिक निदेशक डॉ आरएस झा, ईसीएल के कार्मिक निदेशक केएस पात्न, सीसीएल के वित्त निदेशक, सीआईएल के सीनियर मैनेजर वेद प्रकाश, महाप्रबंधक (एमपी एंड आईआर) सी जुस्टर तथा यूनियन प्रतिनिधियों में बीएमएस के वाईएन सिंह, एचएमएस के नत्थूलाल पांडेय एवं रियाज अहमद, एटक से रमेंद्र कुमार एवं लखनलाल महतो, सीटू से डीडी रामानंदन एवं एसएस सोढी शामिल थे.
बिलासपुर में हुई सब कमेटी की बैठक में नहीं हो सका कोई निर्णय
एपेक्स जेसीसी की बैठक में होगा इस पर निर्णय, यूनियन हैं नाराज
अश्रितों के नियोजन पर वहीं हुई बैठक
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 9.3.0, 9.4.0 तथा 9.5.0 के तहत नौकरी देने के मसले पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। इस कमेटी के चेयरमैन एमसीएल के कार्मिक निदेशक एलएन मिश्र बैठक में भाग लेने नहीं पहुंचे. अब अगले माह इस मसले पर बैठक होगी, क्योंकि 31 मार्च से पहले निर्णय लेकर न्यायालय में प्रस्तुत करना है. आश्रितों को नौकरी के संदर्भ में एक मामला नागपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन है. गौरतलब है कि प्रबंधन की मंशा है कि सिर्फ खदान दुर्घटना में मौत होने पर ही आश्रितों को नौकरी दी जाये. मेडिकल अनफिट, बाहर दुर्घटना व अन्य कारण से मृत्यु होने पर नौकरी नहीं दी जायेगी. इसका श्रमिक संगठन प्रतिनिधि विरोध कर रहे हैं.
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