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शिल्पांचल में नवरात्र को लेकर तेज हुई तैयारियां

पंडाल निर्माण, तोरण द्वार निर्माण, प्रतिमा निर्माण का कार्य जोरों पर घर में खरीदारी का सिलसिला शुरू, पूजा आयोजक कर्मी हुए रेस दुर्गापुर. शिल्पांचल में नवरात्न को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं. विभिन्न पूजा कमेटियों ने पंडाल निर्माण, तोरण द्वार निर्माण, प्रतिमा निर्माण और व्यवस्था को लेकर काम तेज कर दिया है. कार्यकर्ता अभी […]

पंडाल निर्माण, तोरण द्वार निर्माण, प्रतिमा निर्माण का कार्य जोरों पर
घर में खरीदारी का सिलसिला शुरू, पूजा आयोजक कर्मी हुए रेस
दुर्गापुर. शिल्पांचल में नवरात्न को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं. विभिन्न पूजा कमेटियों ने पंडाल निर्माण, तोरण द्वार निर्माण, प्रतिमा निर्माण और व्यवस्था को लेकर काम तेज कर दिया है. कार्यकर्ता अभी से ही दिन-रात एक कर तैयारियों में जुटे हुए हैं.
पूरे शिल्पांचल में नवरात्न का उल्लास है. कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोगों में भी उत्साह है. नवरात्न के लिए घरों के साथ-साथ मठ-मंदिरों में भी तैयारी चल रही है. पूजा को लेकर प्रतिस्पर्धा की वजह से हर पूजा पंडाल अपने आप में विशिष्ट स्थान बनाने को लेकर प्रयासरत हैं. पूजा को लेकर बाजार में भी रौनक है. कपड़े, जूते, घर के सजावट के सामान की खरीदारी तेज हो गयी है. पूजा पंडालों में विद्युत साज-सज्जा को लेकर भी स्पर्धा दिखाई दे रही है. हर कोई चंदननगर के साथ ही अन्य शहरों से विद्युत सज्जा के लिए साजो सामान मंगा रहा है.
शारदीय नवरात्र 21 से शुरू, समापन 29 को
शक्ति की अधिष्ठात्री भगवती दुर्गा की उपासना-आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्न इस बार 21 सितंबर से शुरू हो रहा है. व्रत-पूजन विधान 29 सितंबर (महानवमी) तक चलेंगे. नवरात्न में पूरे नौ दिन मिलेंगे, लेकिन तिथियों के फेर से प्रतिपदा सुबह 9.57 बजे तक ही मिल रही है.
ऐसे में कलश स्थापन व ध्वजारोपण इस समय तक हर हाल में कर लेने होंगे. इसके बाद प्रात: 9.58 बजे से द्वितीया लग जायेगी और अभिजीत मुहूर्त भी इसी तिथि में चला जायेगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शारदीय नवरात्न आश्विन शुक्ल प्रतिपदा अर्थात 21 सितंबर को कलश स्थापन तथा ध्वजारोपण के लिए शुभ समय स्थिर लग्न सिंह प्रात: 5.38 के पहले करना श्रेयस्कर होगा. इस समय में जो लोग कलश स्थापन न कर पाएं किसी भी हालत में सुबह 9.57 से पहले अवश्य कर लेना होगा. इसके साथ ही महानिशा पूजा 27 सितंबर को, निशीथ काल में बलि इत्यादि और महाअष्टमी व्रत 28 सितंबर को होगा. 29 सितंबर को नवमी पर होम, चंडा देवी की पूजा और बलिदान आदि करना चाहिए.
नवरात्र व्रत पारण के हैं दो विकल्प
नवरात्र व्रत का पारन 30 सितंबर विजय दशमी को प्रात: किया जायेगा या 29 सितंबर को रात 9.22 के बाद भी किया जा सकता है. महाअष्टमी व्रत पारन 29 सितंबर को या 28 सितंबर को रात 7.27 बजे के बाद किया जा सकता है. संपूर्ण नवरात्न व्रत करने वालों का पारन 30 सितंबर को प्रात: या 29 को रात 9.22 बजे के बाद भी किया जा सकता है. नवरात्न में इस बार माता का आगमन डोली पर है. इसका फल अतिशय कष्ट और विपत्ति है. गमन मुर्गा पर हो रहा है. इसका फल ग्रह दशा या व्याकुलता है, ऐसे में माता का आवागमन देश-समाज के लिए बहुत शुभ नहीं है.
पूजन-दर्शन और उपवास की तिथियां
21 सितंबर – सुबह 9.57 बजे तक प्रतिपदा – शैलपुत्नी दर्शन, 22 सितंबर – सुबह 10.05 बजे तक द्वितीय – ब्रह्मचारिणी देवी दर्शन, 23 सितंबर – सुबह 10.46 बजे तक तृतीया, चंद्रघंटा देवी दर्शन, 24 सितंबर – सुबह 11.51 बजे तक चतुर्थी – कूष्मांडा, 25 सितंबर – दोपहर 1.26 बजे तक पंचमी – स्कंदमाता देवी दर्शन, 26 सितंबर – दोपहर 3.18 बजे तक षष्ठी, कात्यायनी देवी दर्शन, 27 सितंबर – शाम 5.23 बजे तक सप्तमी, कालरात्रि दर्शन, 28 सितंबर – शाम 7.27 बजे तक अष्टमी, महागौरी, 29 सितंबर – रात 9.22 बजे तक महानवमी, सिद्धिदात्नी देवी दर्शन, 30 सितंबर – विजय दशमी .
Prabhat Khabar Digital Desk
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