बकाया “1550 करोड़ का सही समय पर भुगतान नहीं, श्रमिकों की पगार पर असर

Author Amit kumar
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इसीएल में श्रमिकों के वेतन को लेकर नवंबर माह से समस्या पैदा हो गयी है. प्रतिमाह दो से तीन तारीख तक श्रमिकों के खाते में पैसे आ जाते थे, नवंबर माह में पैसा 12 तारीख को आया.

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शिवशंकर ठाकुर, आसनसोल.

इसीएल में श्रमिकों के वेतन को लेकर नवंबर माह से समस्या पैदा हो गयी है. प्रतिमाह दो से तीन तारीख तक श्रमिकों के खाते में पैसे आ जाते थे, नवंबर माह में पैसा 12 तारीख को आया. इस माह में भी वेतन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. सोमवार को प्रबंधन ने यूनियनों के साथ बैठक की और इस माह (दिसंबर) का वेतन दो किस्तों में (12 और 22 तारीख) भुगतान करने की बात कही, जिसका यूनियनों ने विरोध किया और बैठक से निकल गये. इस माह में कब और कैसे वेतन होगा? यह एक जटिल समस्या बनी हुई है. वर्ष 2021 में एसएपी शुरू होने के बाद से श्रमिकों का वेतन नियमित हर माह में दो तारीख तक हो जाता था. इससे पहले कोई निर्धारित तिथि नहीं थी. लेकिन नवम्बर माह में पुनः गड़बड़ी शुरू हुई. इस मुद्दे पर इसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सतीश झा ने प्रभात खबर कंपनी के अंदरूनी मुद्दों पर खुलकर चर्चा की.

हर कंपनी का हाल खराब, इसीएल पहले से थी कमजोर इसलिए हुई ज्यादा प्रभावित

इसीएल के सीएमडी श्री झा ने कहा कि कंपनी के पास श्रमिकों के वेतन भुगतान करने का पैसा नहीं है. विभिन्न विद्युत उत्पादन करनेवाली कंपनियों के पास इसीएल का 1550 करोड़ रुपये बकाया है, जिसमें अकेले डीवीसी के पास ही करीब 450 करोड़ रुपये रुपये है. जिसमें 50 करोड़ रुपये कुछ दिनों पहले ही दिया है. इसप्रकार एनटीपीसी, आंध्रप्रदेश पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, तमिलनाडु आदि अनेकों पीएसयू के पास इसीएल का पैसा बकाया है. यह बकाया लंबे समय से चला आ रहा है. 31 मार्च 2025 को 1350 करोड़ का बकाया था, जो बढ़कर 1550 करोड़ रुपये हो गया. सबसे बड़ी समस्या पावर प्लांटों में कोयले की खपत कम हो गयी है. बिजली का उत्पादन अन्य स्रोतों से ज्यादा हो रहा है. पावर प्लांटों में प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) 80 फीसदी से अधिक होना चाहिए, जो कुछ प्लांटों में 40 फीसदी तक आ गया है. कोयला आधारित बिजली उत्पादन अक्तूबर माह तक नेगेटिव ग्रोथ में रहा. जिसके कारण कोयले की खपत कम हुई और डिस्पैच प्रभावित हुआ है. डिस्पैच होते रहने से कुछ न कुछ पैसा आता रहता था, जो रूक गया और उधारी का पैसा भी नहीं मिल रहा है. जिसके कंपनी के पास फंड की कमी हो गयी है और श्रमिकों का वेतन के साथ अन्य अनेकों कार्य प्रभावित हो रहा है.

वर्तमान समय में सभी कोल कम्पनियों की हालत पिछले साल के मुकाबले काफी खराब है. इसीएल लंबे समय तक बीआइएफआर में रही है. पिछले तीन साल से मुनाफा कमा रही है. कंपनी क्युमुलेटिव लॉस में ही है. इसलिए इसीएल पर इस बुरे समय का असर ज्यादा पड़ा है. अगले सप्ताह मंत्रालय में बकाया के मुद्दे पर चर्चा होगी, वहां से समस्या के समाधान की उम्मीद है. नवम्बर माह तक कंपनी अपने उत्पादन लक्ष्य 29 मिलियन टन की जगह एक मिलियन टन कम उत्पादन किया और डिस्पैच दो मिलियन टन कम हुआ है. इसीएल के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि यहां पर हाईग्रेड नन कोकिंग कोल है, जिसकी खपत अन्य जगहों पर भी होती है. जिस कंपनी के पास सिर्फ पावर ग्रेड का कोल है, उनकी हालत और भी खराब है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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