जेल में पूजा पर पाबंदी, कैदी नाराज

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कोलकाता: दुर्गापूजा बीतने के साथ ही महानगर के लोग अब दीपावली व कालीपूजा की तैयारी में जुट गये हैं. हर साल महानगर की अन्य जगहों की तरह जेलों में कैदी भी देवी काली की पूजा पाठ व आराधना की तैयारी में जुट जाते थे, लेकिन इस वर्ष आलम दूसरा है. जेल प्रबंधन द्वारा उन्हें प्रत्येक […]

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कोलकाता: दुर्गापूजा बीतने के साथ ही महानगर के लोग अब दीपावली व कालीपूजा की तैयारी में जुट गये हैं. हर साल महानगर की अन्य जगहों की तरह जेलों में कैदी भी देवी काली की पूजा पाठ व आराधना की तैयारी में जुट जाते थे, लेकिन इस वर्ष आलम दूसरा है.

जेल प्रबंधन द्वारा उन्हें प्रत्येक वार्ड में पूजा करने की बजाय सिर्फ एक जगह ही सम्मिलित रूप से पूजा करने का निर्देश दिया गया है. इस निर्देश से कैदियों में नाराजगी चरम स्थिति में है.

जेल सूत्रों के मुताबिक अंग्रेजों के जमाने से अलीपुर सेंट्रल जेल के अंदर अब तक सभी 12 वार्डो में अलग-अलग काली पूजा होती आयी थी. दुर्गापूजा के बाद से ही जेल के अंदर कैदी अपने वार्ड में देवी की प्रतिमा बनाने व उन्हें सजाने में व्यस्त हो जाते थे. लेकिन इस वर्ष जेल प्रबंधन की तरफ से सिर्फ एक जगह कैदियों को पूजा करने का निर्देश दिया गया है. कैदियों ने जब कारण पूछा तो, कोई जवाब नहीं दिया गया. जेल अधिकारियों के इस रवैये से कैदियों में काफी रोष व्याप्त है.

पूजा का आवेदन फॉर्म नहीं मिलने पर मची कैदियों में खलबली : जेल सूत्र बताते हैं कि हर वर्ष वार्ड के अंदर वार्ड के कैदियों के मुखिया को किसी भी तरह की पूजा के पहले आवेदन फॉर्म लेना पड़ता था, इसी के लिए दुर्गापूजा के बाद प्रत्येक वार्ड के प्रमुख ने जेल अधिकारियों से फॉर्म मांगी, लेकिन कई बार आवेदन करने के बाद भी उन्हें फॉर्म नहीं दिया गया. एक दिन इसके लिए रोष प्रकट करने पर प्रबंधन द्वारा उन्हें 12 जगहों के बदले सिर्फ एक जगह पूजा करने की बात कही गयी. इस निर्देश को मानने से कैदियों ने इनकार कर दिया, लेकिन लाख आवेदन के बावजूद उन्हें आवेदन फॉर्म नहीं मिला.

जन्माष्टमी मनाने पर भी लग चुकी है पाबंदी : जेल सूत्रों के मुताबिक अलीपुर सेंट्रल जेल के अंदर स्थित मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया जाता था, लेकिन उसी मंदिर के पास काफी मोबाइल व सिमकार्ड मिलने के कारण पुलिस ने मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व मनाना बंद करवा दिया. उस समय भी कैदियों में रोष व्याप्त था.

ज्ञात हो कि सारधा मामले के वांछित आरोपी सुदीप्त सेन, कुणाल घोष, रजत मजुमदार देबब्रत सरकार के अलावा प्रसिद्ध आतंकी आफताब अंसारी व कुछ माओवादी भी अलीपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहे है. इसके कारण जेल में सुरक्षा को लेकर पहले से अधिकारी सतर्क है.

हैवीवेट कैदियों की सुरक्षा के कारण लिया गया फैसला

अलीपुर सेंट्रल जेल में गत वर्ष तक 12 वाडरे में काली पूजा होती थी, लेकिन इस वर्ष सारधा व अन्य मामले के हैवीवेट कैदियों के होने के कारण उन्हें सुरक्षा देना महत्वपूर्ण है. काली पूजा रात भर की जाती है, लिहाजा 12 जगहों पर पूजा होने पर सभी जगहों में उन्हें जेल कर्मियों को ड्यूटी पर लगाना होगा. अलीपुर सेंट्रल जेल में इतने पर्याप्त सुरक्षा गार्ड नहीं है, जिससे 12 जगहों पर रात भर उन्हें पहरे पर लगाया जा सके. सुरक्षा के लिहाज से प्रेसिडेंसी जेल में भी सिर्फ एक जगह पर ही काली पूजा की जायेगी. इसके कारण अलीपुर सेंट्रल जेल में एक जगह पूजा करने का निर्णय लिया गया है.

नवीन साहा, अधीक्षक (अतिरिक्त भारप्राप्त), अलीपुर सेंट्रल जेल

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