MahaKumbh 2025 : घर की महिलाओं के गहने बेचकर खरीदी नाव, अब बन गया करोड़पति

Updated at : 09 Mar 2025 9:24 AM (IST)
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संगम तट पर नाव की तस्वीर

MahaKumbh 2025 : प्रयागराज महाकुंभ ने नाविक पिंटू महरा के परिवार की जिंदगी बदल दी . 45 दिन में 30 करोड़ रुपये कमा डाले. कमाई के पैसे देखकर नाविक की मां की आंखें नम हो गई. उन्होंने कहा कि बच्चों को अब अच्छे स्कूल में पढ़ा सकेंगे.

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MahaKumbh 2025 : प्रयागराज महाकुंभ धार्मिक आस्था और अध्यात्म के साथ साथ लाखों लोगों की जीविका और कारोबार के लिए फायदेमंद रहा. ऐसे ही एक नाविक परिवार की सक्सेस स्टोरी का जिक्र यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के बजट सत्र में किया था. वह प्रयागराज का रहने वाला है. आइए जानते हैं कौन है पिंटू महरा जिसकी तारीफ खुद सीएम ने की.

130 नाव वाले परिवार की कमाई 30 करोड़

सीएम योगी ने जो जानकारी दी उसने हर किसी का ध्यान उस नाविक परिवार की तरफ खींचा जिसने महाकुंभ के 45 दिन में 30 करोड़ की कमाई की. यह नाविक है प्रयागराज के अरैल इलाके में रहने वाला पिंटू महरा. प्रयागराज में त्रिवेणी के किनारे स्थित गांव अरैल के रहने वाले इस नाविक के एक फैसले ने पूरे परिवार की जिंदगी बदलकर रख दी. महाकुंभ खत्म हुआ तो पिंटू करोड़पति बन गया.

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130 नावों को पिंटू ने महाकुंभ में उतार दिया

पिंटू महरा का कहना है कि उसने 2019 के योगी सरकार के दिव्य और भव्य कुंभ में नाव चलाई थी. उस कुंभ से ही उसका अनुमान हो गया था कि इस बार के महाकुंभ में बहुत श्रद्धालुओं की भीड़ आने वाली है. इसीलिए महाकुंभ के पहले अपने पूरे परिवार के लिए 70 नावें खरीदी. पहले से उसके सौ से अधिक सदस्यों वाले परिवार में 60 नाव थी. इस तरह इन 130 नावों को उसने महाकुंभ में उतार दिया. इससे उनके परिवार को इतनी कमाई करा दी कि अब इससे कई पीढ़ियों के जीवन में सुधार जाएगा. घर की महिलाओं ने गहने बेचकर नाव खरीदने में मदद की.

नाविकों की जिंदगी इस महाकुंभ ने बदल दी

पिंटू महरा और उसके परिवार का कहना है कि योगी और मोदी के प्रयास से आयोजित हुए महाकुंभ ने उनकी ही नहीं, बल्कि हजारों नाव चलाने वाले परिवारों की जिंदगी बदल दी. पिंटू महरा बताते हैं कि उन्हें ही नहीं, बल्कि आसपास के हजारों नाविकों की जिंदगी इस महाकुंभ ने बदल दी,  जिन्होंने भी कर्ज लेकर नावे खरीदी वो सब अब लखपति बनकर घूम रहे हैं. पिंटू की मां शुक्लावती देवी की आंखें यह बताते हुए नम हो जाती है कि उनके पति  की मौत के बाद आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. पूरा परिवार परेशान था. ऐसे में महाकुंभ हमारे लिए संकट मोचक बनकर आया. योगी जी ने जिस तरह से इस महाकुंभ का आयोजन कराया उससे इतनी अधिक संख्या में लोग त्रिवेणी में डुबकी लगाने आए और उसी से हमारी कमाई हुई.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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