ITBP जवान की मां का कटा हाथ, न्याय में देरी पर हथियारों से लैस जवानों ने कमिश्नरेट घेरा, अब यूपी के उपमुख्यमंत्री का आया बयान
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 24 May 2026 1:40 PM
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव और जवान. दाईं तरफ टोपी पहने और नीला बैग टांगे जवान विकास कुमार. फोटो- एक्स.
ITBP Jawan Mother Case: कानपुर में ITBP जवान विकास सिंह की मां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया. शनिवार, 23 मई को करीब 40-50 ITBP जवान कमिश्नरेट पहुंचे, जिसके बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल, डॉ. विपिन कुमार ताडा और CMO के बीच हाईलेवल बैठक हुई. अस्पताल पर मेडिकल लापरवाही के आरोप लगे हैं.
ITBP Jawan Mother Case: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने रविवार को कहा कि कानपुर में इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आटीबीपी) जवान और उसके परिवार से जुड़े अस्पताल विवाद को सरकार ने गंभीरता से लिया है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की हाईलेवल जांच शुरू कर दी गई है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा. इस घटना में एक गंभीर मोड़ शनिवार को आया, जब अपने साथी को न्याय दिलाने के लिए आईटीबीपी के 32वीं बटालियन के कमांडेंट गौरव प्रसाद करीब 40-50 जवानों के साथ 15 से ज्यादा गाड़ियों और ट्रकों में सवार होकर शनिवार सुबह पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. हथियारों से लैस जवानों को देखकर इलाके में हड़कंप मच गया.
अस्पताल मामले में मांगी गई पूरी रिपोर्ट
एएनआई से बातचीत के दौरान ब्रजेश पाठक ने कहा कि अस्पताल में ITBP जवान और उसके परिवार के साथ हुई घटना को लेकर सरकार बेहद गंभीर है. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और डीजी स्वास्थ्य को पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. पाठक ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जवाबदेही तय की जाएगी और किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है.
क्या है पूरा कानपुर अस्पताल मामला?
यह मामला 19 मई को सामने आया था, जब ITBP के जवान विकास सिंह ने कानपुर में पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर अपनी मां का कटा हुआ हाथ दिखाते हुए न्याय की मांग की थी. विकास सिंह, ITBP महाराजपुर से जुड़े बताए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 13 मई को उनकी मां को सांस लेने में दिक्कत होने पर पहले कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.
उनके मुताबिक भर्ती होने के अगले ही दिन उनकी मां के हाथ में गंभीर संक्रमण हो गया. उन्होंने दावा किया कि हालत बिगड़ने के बाद उनकी मां को पारस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां 17 मई को डॉक्टरों को आखिरकार उनका हाथ काटना पड़ा.
‘मां का कटा हाथ लेकर न्याय मांगता रहा’
विकास सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि पारस हॉस्पिटल ने पूरे मामले की जिम्मेदारी कृष्णा हॉस्पिटल पर डाल दी. जवान ने मांग की कि कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों और ICU स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
न्याय की मांग को लेकर विकास सिंह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे. पुलिस आयुक्त ने पूरे मामले की जांच करवाई, लेकिन विकास सिंह इससे संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने CMO पर भी स्पष्ट जांच रिपोर्ट न देने और डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आखिर 12 घंटे में ऐसा क्या हुआ कि संक्रमण पूरे हाथ में फैल गया. उन्होंने संभवतः इसकी शिकायत आईटीबीपी के अपने अधिकारियों से की होगी.
इसके बाद 23 तारीख को आईटीबीपी के कमांडेंट अपने दल बल के साथ कमिश्नर ऑफिस पहुंच गए. इतनी ज्यादा संख्या में जवानों को देखकर सभी भौचक्क रह गए. वह सभी अपने साथी को न्याय दिलाने के लिए पहुंचे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था डॉ. विपिन कुमार ताडा ने ITBP अधिकारियों और पीड़ित पक्ष से मुलाकात की.
पुलिस कमिश्नर ने CMO को तलब कर गोलमोल रिपोर्ट देने पर नाराजगी जताई और स्पष्ट जांच रिपोर्ट न देने पर फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि अगर मामला राज्य कमेटी तक पहुंचा तो जांच टीम की कार्यशैली उजागर हो जाएगी. इसके बाद जेसीपी डॉ. विपिन ताडा ने कमांडेंट गौरव प्रसाद, CMO और पीड़ित परिवार के साथ बैठक कर पूरे मामले पर चर्चा की. वहीं, भारी संख्या में हथियारबंद जवानों के पहुंचने से कुछ देर के लिए पूरा पुलिस कमिश्नरेट छावनी में तब्दील हो गया.
इस घटना की चर्चा पहले कानपुर और अब अन्य इलाके में भी हो रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस कमिश्नर ने आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद से इस बात की नाराजगी जताई कि इतने सारे जवानों को लाने की क्या जरूरत थी. इस पर कमांडेंट गौरव ने जवानों को ऑफिस से बाहर जाने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि वे कमिश्नरेट को घेरने नहीं आए थे. सेना के अधिकारियों को एस्कॉर्ट्स मिलते हैं. सभी जवान उसी एस्कॉर्ट का हिस्सा थे.
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सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ, लेकिन अनुशासनहीनता का मुद्दा भी बना
कमांडेंट गौरव की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है. हालांकि, उनके इस कार्य को अनुशासनहीनता के तौर पर भी देखा जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले सेना या पैरामिलिट्री फोर्स का इस तरह सिविल मामले में दखल देना कानून सम्मत नहीं है. यह मेडिकल नेगलिजेंस (चिकित्सा लापरवाही) का है, लेकिन कमांडेंट का इस तरह स्वतः आगे बढ़कर कार्रवाई करना गलत हो सकता है. आने वाले समय पर यह देखना होगा कि इस पर गृह मंत्रालय, आईटीबीपी हेडक्वार्टर और उत्तर प्रदेश पुलिस कोई कार्रवाई करते हैं.
तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच के लिए CMO की ओर से तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है. अधिकारियों ने कहा कि अगर जांच में मेडिकल लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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