Viral Video : 90 साल की सास को पीठ पर लादकर पेंशन दिलाने पहुंची बहू
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 24 May 2026 12:28 PM
बहू अपनी सास को पीठ पर ढोए हुए (Phoot: X)
Viral Video : वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि सरकार की डिजिटल इंडिया और घर-घर सेवा की बातों के बावजूद दूरदराज इलाकों में बुजुर्ग को सुविधा नहीं मिल रही है. जानें क्या है पूरा मामला.
Viral Video : चिलचिलाती धूप में 90 साल की सास को पीठ पर उठाए एक महिला जंगल के रास्तों, पथरीली पगडंडियों और नालों को पार करती दिखी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. छत्तीसगढ़ के सुरगुजा जिले के मैनपाट इलाके से सामने आए इस वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में आज भी सरकारी सुविधाएं लोगों तक सही तरीके से क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं. पहले देखें ये वीडियो फिर आपको बताते हैं बहू ने क्या बताया?
यह महिला कंधे पर अपनी सास को नहीं बल्कि हमारे देश के सिस्टम का भार उठा कर चल रही है।
— Voice of Chhattisgarh (@CGVOICE00777) May 23, 2026
वीडियो सरगुजा जिले का मैनपाट का है। https://t.co/3HVqd5Zjh0 pic.twitter.com/VOlbrkRjRF
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुखमनिया बाई नाम की महिला अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ पर उठाकर करीब 9 किलोमीटर पैदल चली, ताकि वह बैंक जाकर पेंशन ले सकें. ग्रामीणों का कहना है कि सुखमनिया पिछले कई महीनों से इसी तरह अपनी सास को पीठ पर उठाकर बैंक ले जा रही हैं, क्योंकि पेंशन पाने के लिए लाभार्थी का बैंक में खुद मौजूद होना और फिंगरप्रिंट या पहचान सत्यापन कराना जरूरी है.
हालांकि, वीडियो में सुनाई दे रही बातचीत ने लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, जिसने पूरे मामले को और भावुक बना दिया. वीडियो बना रहा एक शख्स महिला से स्थानीय भाषा में पूछता सुनाई देता है कि वह अपनी बुजुर्ग सास को इतनी दूर पीठ पर उठाकर क्यों ले जा रही है. इस पर महिला जवाब देती है कि पेंशन का पैसा तभी मिलता है, जब बुजुर्ग महिला को खुद बैंक ले जाकर पहचान और फिंगरप्रिंट का सत्यापन कराया जाए. महिला ने बताया कि इलाके में कोई ढंग की परिवहन सुविधा नहीं है, इसलिए उन्हें नाले, जंगल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर पैदल जाना पड़ता है. बातचीत के दौरान उसने यह भी कहा कि परिवार को करीब 1,500 रुपये पेंशन मिलता है, जो कई बार एक साथ कई महीनों का जारी किया जाता है.
महिला ने यह भी बताया कि पहले पेंशन का पैसा गांव में ही मिल जाता था या लोगों तक आसानी से पहुंच जाता था. लेकिन अब वह व्यवस्था बंद हो गई है. इसी वजह से उनके जैसे परिवारों को मामूली पेंशन पाने के लिए भी लंबा और बेहद मुश्किल सफर तय करना पड़ रहा है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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