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मेडिकल कॉलेज घोटाला : CBI ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश को नामजद किया, आवास पर छापा

Updated at : 06 Dec 2019 7:30 PM (IST)
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मेडिकल कॉलेज घोटाला : CBI ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश को नामजद किया, आवास पर छापा

नयी दिल्ली/लखनऊ : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक मेडिकल कॉलेज का कथित तौर पर पक्ष लेने पर भ्रष्टाचार के एक मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला को नामजद किया है और उनके लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की है. अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि एजेंसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय […]

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नयी दिल्ली/लखनऊ : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक मेडिकल कॉलेज का कथित तौर पर पक्ष लेने पर भ्रष्टाचार के एक मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला को नामजद किया है और उनके लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की है.

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि एजेंसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश शुक्ला के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आईएम कुद्दूसी, प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के भगवान प्रसाद यादव और पलाश यादव, ट्रस्ट तथा निजी व्यक्तियों भावना पांडेय और सुधीर गिरि को भी मामले में नामजद किया है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने लखनऊ, मेरठ और दिल्ली में कई स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी.

आरोप है कि प्रसाद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को केंद्र ने मई 2017 में मानक स्तर की सुविधाएं न होने और जरूरी मानदंड पूरे न करने की वजह से छात्रों को दाखिला देने से रोक दिया था. इसके साथ 46 अन्य मेडिकल कॉलेजों को भी समान आधार पर दाखिला देने से रोक दिया गया था. अधिकारियों ने कहा कि ट्रस्ट ने केंद्र के फैसले को एक रिट याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी. प्राथमिकी में नामजद लोगों ने बाद में साजिश रची और न्यायालय की अनुमति से याचिका को वापस ले लिया. उन्होंने बताया कि फिर, 24 अगस्त 2017 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में एक अन्य याचिका दायर की गयी.

प्राथमिकी में आगे आरोप लगाया गया कि न्यायमूर्ति शुक्ला की भागीदारी वाली खंडपीठ ने 25 अगस्त 2017 को याचिका पर सुनवाई की और उसी दिन ट्रस्ट की पसंद का आदेश पारित कर दिया गया. अधिकारियों ने कहा कि पसंदीदा आदेश पाने के लिए प्राथमिकी में नामजद आरोपियों में से एक को ट्रस्ट ने कथित तौर पर रिश्वत दी.

गाैरतलब है कि जांच एजेंसी को इस साल के शुरू में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को एक पत्र लिखने के बाद मामला दर्ज करने की अनुमति मिली. इस पत्र में एजेंसी ने कहा था कि उसने तत्कालीन पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जिनके संज्ञान में न्यायाधीश द्वारा कदाचार का मामला लाया गया था, के निर्देश पर न्यायाधीश और अन्य के खिलाफ प्रारंभिक जांच की थी.

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