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UP हत्या मामला : परिजन ने की CBI जांच और 1 करोड़ मुआवजे की मांग, विपक्ष ने योगी से मांगा इस्तीफा

Updated at : 29 Sep 2018 11:08 PM (IST)
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UP हत्या मामला : परिजन ने की CBI जांच और 1 करोड़ मुआवजे की मांग, विपक्ष ने योगी से मांगा इस्तीफा

लखनऊ/गोरखपुर : राजधानी लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में जांच के दौरान कथित तौर पर वाहन नहीं रोकने पर एक सिपाही ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी. पीड़ित परिवार की मामले की सीबीआई जांच की मांग के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मामले […]

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लखनऊ/गोरखपुर : राजधानी लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में जांच के दौरान कथित तौर पर वाहन नहीं रोकने पर एक सिपाही ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी. पीड़ित परिवार की मामले की सीबीआई जांच की मांग के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जरूरत पड़ी तो मामले की सीबीआई जांच भी करायी जायेगी. कांग्रेस और सपा ने इस घटना को प्रदेश की बदहाल कानून-व्यवस्था की निशानी बताते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है.

लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने सना खान नामक महिला द्वारा दर्ज करायी गयी रिपोर्ट के हवाले से बताया कि सना ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार/शनिवार की रात करीब दो बजे वह अपने सहकर्मी विवेक तिवारी (38) के साथ कार से घर जा रही थीं. रास्ते में गोमतीनगर विस्तार इलाके में उनकी गाड़ी खड़ी थी, तभी सामने से दो पुलिसकर्मी आये तो तिवारी ने गाड़ी आगे बढ़ाने की कोशिश की.

इस दौरान एक सिपाही कार की हल्की चपेट में आ गया. सना के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने कार को रोकने की कोशिश की और उनमें से एक ने गोली चलायी, जो तिवारी को लगी. इसके कारण बेकाबू हुई कार अंडरपास की दीवार से जा टकरायी. हादसे में गंभीर रूप से घायल तिवारी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां थोड़ी देर बाद उसकी मृत्यु हो गयी. तिवारी ‘ऐपल‘ कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी थे.

आरोपी गिरफ्तार, चलेगा हत्‍या का मुकदमा

नैथानी के मुताबिक गोली मारने के आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी और उसके साथी संदीप के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. दोनों को बर्खास्त भी कर दिया गया है. वारदात में मारे गये तिवारी की पत्नी कल्पना ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. साथ ही पुलिस विभाग में नौकरी देने और परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिये एक करोड़ रुपये मुआवजे की भी मांग की है.

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में इस घटना के बारे में संवाददाताओं से कहा कि लखनऊ की घटना कोई मुठभेड़ की वारदात नहीं है. हम इसकी पूरी जांच करायेंगे. प्रथम दृष्ट्या दोषी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा. आवश्यकता पड़ेगी तो हम सीबीआई को भी इसकी जांच सौंपेंगे.

उधर, प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने वाराणसी में इस घटना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि योगी सरकार के शासन में मुठभेड़ में कोई गलती नहीं हो रही है. गोली उसी को लगी है जो वास्तव में अपराधी है. जो सपा के सरकार में गुंडाराज था माफिया राज था, पुलिस उसी का ‘इंतजाम’ कर रही हैं. बाकी सब ठीकठाक है, अपराधी पर कोई समझौता नहीं है.

इस सवाल पर कि क्या लखनऊ में पुलिस की गोली से मारा गया विवेक तिवारी भी अपराधी था, मंत्री ने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. बहरहाल, पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने मामले की जांच के लिये लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक सुजीत पांडे की अगुवाई में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है. पुलिस अधीक्षक (अपराध) और पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को इसका सदस्य बनाया गया है. साथ ही जिलाधिकारी से इसकी मजिस्टीरियल जांच के आदेश देने का आग्रह किया गया है.

वारदात के बाद अस्पताल में भर्ती हुए गोली चलाने वाले कांस्टेबल प्रशांत ने बताया कि उसे गश्त के दौरान एक संदिग्ध गाड़ी दिखी, जब वह उसके पास गया तो गाड़ी अचानक स्टार्ट हो गयी और आगे खड़ी हमारी गाड़ी को दो-तीन बार टक्कर मारी. रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद गाड़ी नहीं रुकी और मुझ पर चढ़ गयी. इस पर मैंने आत्मरक्षा में गोली चला दी.

समाजवादी पार्टी ने योगी आदित्‍यनाथ से मांगा इस्‍तीफा

इस बीच, सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में पुलिस सिपाही की चलायी गोली लगने से हुई मौत की घटना को प्रदेश की बदहाल कानून-व्यवस्था की निशानी करार देते हुए आज मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की. सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश के शहडोल में लखनऊ की वारदात को जंगलराज का नतीजा करार देते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है.

चौधरी ने कहा कि पुलिस मुठभेड़ों को जायज ठहराने वाले मुख्यमंत्री योगी की भाषा इस मुद्दे को लेकर बेहद दम्भ भरी और जहर बुझी है, जिससे पुलिस का दुस्साहस बढ़ रहा है. राज्यपाल राम नाईक भी कानून-व्यवस्था में सुधार की बात कहते हैं, मगर सुधार नहीं हो रहा है. मुख्यमंत्री को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार ने भी इस घटना के लिए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है.

उन्होंने कहा कि यह घटना प्रदेश में बेलगाम हो रही सत्ता का चरित्र उजागर करती है. मद में चूर पुलिस अंधी हो गयी है और जनता पुलिस तथा गुंडो के पाटों के बीच पिस रही है. कुमार ने कहा कि गुंडाराज और भ्रष्टाचार के खात्मे का नारा देकर प्रदेश की सत्ता में आयी भाजपा का चरित्र धीरे-धीरे बेनकाब हो रहा है. पुलिस का चरित्र बदल रहा है, जिसके कंधों पर समाज की सुरक्षा की जवाबदेही है.

वही वाहवाही लूटने के लिये मानवाधिकारों को खुलेआम उल्लंघन कर रही है. चूंकि मुख्यमंत्री गृह विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लिहाजा नैतिकता के आधार पर उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. इस बीच, घटना के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह की अगुवाई में लखनऊ में कैंडल मार्च निकाला.

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