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परीक्षा से तीन घंटे पहले छात्र ने फांसी लगाकर दी जान

Updated at : 19 Feb 2020 6:35 AM (IST)
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परीक्षा से तीन घंटे पहले छात्र ने फांसी लगाकर दी जान

गड़वार : सुखपुरा थाना क्षेत्र के बरवां गांव में हाइस्कूल के एक परीक्षार्थी ने परीक्षा से करीब तीन घंटे पहले फांसी लगाकर जान दे दी. मंगलवार की सुबह शौच के लिए निकली महिलाओं ने रस्सी के सहारे पेड़ से लटकता शव देखकर शोर मचाया तो ग्रामीणों के साथ ही परिजन भी पहुंचे. विशाल कुमार (18) […]

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गड़वार : सुखपुरा थाना क्षेत्र के बरवां गांव में हाइस्कूल के एक परीक्षार्थी ने परीक्षा से करीब तीन घंटे पहले फांसी लगाकर जान दे दी. मंगलवार की सुबह शौच के लिए निकली महिलाओं ने रस्सी के सहारे पेड़ से लटकता शव देखकर शोर मचाया तो ग्रामीणों के साथ ही परिजन भी पहुंचे. विशाल कुमार (18) वर्ष पुत्र बब्बन राम के शव को घरवालों ने पेड़ से नीचे उतारा और पुलिस को सूचना दी. घटनास्थल पर पहुंचे सुखपुरा थाना प्रभारी वीरेंद्र यादव व क्षेत्राधिकारी नगर अरुण कुमार सिंह ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मृतक के शर्ट की जेब से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है.

अरुण कुमार सिंह ने बताया कि युवक को इस साल तीसरी बार हाइस्कूल की परीक्षा देना था, जिसे लेकर वह तनाव में था. परिजनों के मुताबिक विशाल सुबह चार बजे के करीब उठा था. उसने ही मवेशियों को बाहर निकालकर खूंटे पर बांधा और चारा डालने के बाद कहीं चला गया. घरवालों को लगा कि शौच के लिए गया है. वापस लौटकर परीक्षा के लिए तैयारी करेगा. इसी बीच गांव के किसी ने आकर सूचना दी कि एक पेड़ के सहारे विशाल का शव लटक रहा है. यह सुनते ही घरवालों के होश उड़ गये.
माफ करना मम्मी-पापा, आपका कर्ज चुका दूंगा…
पुलिस के मुताबिक विशाल ने अपने सुसाइड नोट में इस बात का जिक्र किया है कि घरवालों की उम्मीदें पूरी नहीं कर पाने की स्थिति में आत्महत्या कर रहा है और इसके लिए कोई अन्य जिम्मेदार नहीं है. सुसाइड नोट में लिखा है- ‘माफ करना मम्मी-पापा.
मैं अपने इस जन्म में आपका कर्ज नहीं उतार सका. मुझे आप लोगों की आर्थिक स्थिति को देखकर अपने आप पर गुस्सा आता था, क्योंकि मैं घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कुछ काम नहीं कर पा रहा था. मरने के बाद मैं आप लोगों के कर्ज को चुका दूंगा. मैं अपने मृत्यु का स्वयं जिम्मेदार हूं. इसके लिए घरवालों को दोषी न माना जाये.’
चार भाइयों में दूसरे नंबर का था विशाल
बब्बन राम के चार बेटों में विशाल दूसरे नंबर का था. बड़ा बेटा शादी के बाद परिवार के साथ बाहर रहता है. घर का खर्च चलाने के लिए बब्बन मजदूरी करता है, जबकि उसकी पत्नी घर का कामकाज संभालती है. विशाल से छोटे दो भाई भी पढ़ाई करते हैं.
ग्रामीणों का कहना था कि विशाल पढ़ाई के साथ ही घर-गृहस्थी में हाथ बंटाने के लिए टेंट का काम करता था. वह गांव के बगल में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था. इससे पहले दो बार फेल हो चुका था. तीसरी बार परीक्षा देनी थी, जिसको लेकर वह दबाव में भी था. कहा जा रहा है कि परीक्षा की सख्ती को लेकर उसने तीसरी बार परीक्षा देने से पहले ही हार मान ली.
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