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आर्सेनिकयुक्त पानी से शरीर पर पड़ रहा प्रभाव

Updated at : 13 Feb 2020 5:55 AM (IST)
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आर्सेनिकयुक्त पानी से शरीर पर पड़ रहा प्रभाव

रामगढ़ : आर्सेनिक प्रभावित इलाके के लोगों को केवल शारीरिक या आर्थिक नुकसान ही नहीं उठाना पड़ रहा, बल्कि सामाजिक रुतबा भी घटने लगा है. शरीर पर हो रहे प्रभाव के कारण उनका सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है. कइयों का तो घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है. रामगढ़ गंगा के तटवर्ती इलाकों […]

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रामगढ़ : आर्सेनिक प्रभावित इलाके के लोगों को केवल शारीरिक या आर्थिक नुकसान ही नहीं उठाना पड़ रहा, बल्कि सामाजिक रुतबा भी घटने लगा है. शरीर पर हो रहे प्रभाव के कारण उनका सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है. कइयों का तो घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है.

रामगढ़ गंगा के तटवर्ती इलाकों में बसे गांवों को दूषित पेयजल के कारण होने वाली बीमारियों का कोई इलाज नहीं मिल रहा. मीठे जल के रूप में उपलब्ध भूगर्भ जल का सेवन करने वाले तभी तक इसके दुष्प्रभाव को सहन करता है, जब तक की उसके शरीर में अच्छी खासी प्रतिरोधक क्षमता मौजूद रहती है.
जैसे-जैसे प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है, वैसे- वैसे दूषित पानी अपना असर दिखना शुरू हो जाता है. शरीर पर काले धब्बे और चमड़े का नुकीले कांटों के रूप में उभर आना प्रमुख लक्षण है. पेट फूलने के साथ ही अंत में हेपेटाइटिस बी जैसी घातक बीमारी का शिकार होकर मर जाना पीड़ितों की नियति बन चुकी है.
शरीर पर हो रहे प्रभाव के कारण कइयों का घर से निकलना दूभर
हमारे ग्राम सभा की आबादी करीब नौ हजार है. यहां शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर जल निगम द्वारा कोई पहल नहीं की गयी है. इससे बाध्य होकर आर्सेनिक युक्त पानी पीना पड़ रहा है.
-रामसेवक पांडेय, ग्रामीण
दो साल पहले जल निगम द्वारा हमारे गांव में पानी टंकी का निर्माण करने के लिए सर्वे किया गया, तो लोगों में उम्मीद जगी थी. लगा कि अब शुद्ध जल नसीब होगा. लेकिन अब उम्मीदों पर पानी फिर रहा है.
-रिंकू पांडेय, ग्रामीण
गांव में लगे हैंडपंप का पानी जैसे ही बर्तन में रखा जाता है, पानी रंग बदलना शुरू कर देता है. दूषित जल के सेवन से गांव के अधिकतर लोग गैस के मरीज बन बैठे हैं. गैस की दवा न लें तो खाना पचना भी मुश्किल है.
-राजेश पांडेय, ग्रामीण
दूषित जल के सेवन से दर्जनों की संख्या में लोग चर्म रोग की परेशानी से पीड़ित है. कई बार उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला.
-गुंजा देवी, ग्राम प्रधान रामपुर
पानी टंकी के निर्माण की उम्मीदों पर फिरा पानी, जमीन का सर्वे कराने का भेजा गया था प्रस्ताव
रामपुर, पियरौंटा व दिघार में पानी टंकी के निर्माण को लेकर जगी उम्मीदों पर पानी फिर गया है. इंटक जिलाध्यक्ष कांग्रेस नेता विनोद सिंह ने तत्कालीन जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारोत को प्रार्थना पत्र देकर अर्सेनिक प्रभावित गांव रामपुर, पियरौंटा व दिघार में पानी टंकी का निर्माण की गुहार की थी.
जनहित के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जल निगम को तत्काल इन ग्राम सभाओं में जमीन का सर्वे कर शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया था. स्वीकृति भी मिल गयी. जल निगम की उदासीनता के कारण मामला अटक गया. नीर निर्मल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण होना था. इसी बीच यह योजना बंद हो गयी और विश्व बैंक ने अपना पैसा वापस कर लिया.
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