बकुल्हा में रेल पुल के निर्माण की रफ्तार धीमी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jan 2020 7:30 AM (IST)
विज्ञापन

बैरिया : पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी छपरा रेलखंड पर बकुल्हां-मांझी रेलवे स्टेशनों के बीच घाघरा नदी पर 129 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे नये रेलवे पुल का कार्य अत्यंत ही धीमी गति से चल रहा है. ऐसे में शतायु पार कर चुका पुराना रेलवे पुल ही रेलगाड़ियों के आवागमन का इकलौता माध्यम है. […]
विज्ञापन
बैरिया : पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी छपरा रेलखंड पर बकुल्हां-मांझी रेलवे स्टेशनों के बीच घाघरा नदी पर 129 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे नये रेलवे पुल का कार्य अत्यंत ही धीमी गति से चल रहा है. ऐसे में शतायु पार कर चुका पुराना रेलवे पुल ही रेलगाड़ियों के आवागमन का इकलौता माध्यम है.
115 वर्ष पूर्व बने रेलवे पुल से गुजरते समय उत्पन्न होने वाली भयावह परिस्थितियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजधानी समेत दर्जनों एक्सप्रेस ट्रेन व माल गाड़ियां इस पुल से जब गुजरती है. तब इस पुल में अजीब सी हरकत होने लगती है. खास बात ये की वर्ष 1942 में आए भूकंप के दौरान पुराने रेलवे पुल के दो पाए क्षतिग्रस्त हो गये थे, जिसे विभागीय अभियंताओं ने किसी तरह ठीक कर ट्रेनों के आवागमन की हरी झंडी दिखा दी.
नया डबल लाइन रेलवे पुल बनाने का क्रम पिछले 8 वर्षों से चल रहा है. जिस रफ्तार से काम हो रहा है एक दशक भी लग सकते हैं. बताते चलें कि अंग्रेजी हुकूमत ने मांझी का रेल पुल वाराणसी छपरा के बीच छोटी लाइन मीटर गेज की गाड़ियों के लिए 115 वर्ष पूर्व बनवाया था. 90 के दशक में इस रेलखंड के आमान परिवर्तन के दौरान महकमे ने पुल के पुराने पुल होने के बावजूद उसी पर दूसरा लाइन लगा कर बड़ी लाइन ब्रॉड गेज बिछवा दिया.
इसके बाद इस मार्ग से ट्रेनों का आवागमन तो चालू हो गया. लेकिन बड़ी लाइन की माल गाड़ियों व तेज रफ्तार वाली मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों के दौड़ने से यह पुल जर्जर होने लगा. इस पुल पर आमतौर पर 65 जोड़ी ट्रेनों का दबाव है. राजधानी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ज्ञान गंगा, सारनाथ, उत्सर्ग समेत कई तेज रफ्तार ट्रेन जिसकी रफ्तार 100 किमी प्रति घंटे तक है, चल रही है.
1942 में आए भूकंप के दौरान इस पुल के कई पाए क्षतिग्रस्त हो गए थे. हालात को देखते हुए पुराने रेलवे पुल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर उत्तर मे नया पुल बनाने का कार्य प्रगति पर है. लेकिन कार्य की रफ्तार इतनी धीमी है कि इसे पूरा होने में पांच सात वर्ष लग जाने हैं. यहां के प्रति विभागीय अधिकारी उदासीन है. इस कार्य के प्रति गंभीरता नहीं बरती जा रही है. ऐसा चांददियर गांव निवासी रामचंद्र यादव का कहना है.
उनका कहना है 100 साल से भी पहले इस पुल जो छोटी लाइन के लिए बना था, पर बड़ी लाइन बिछाकर 15 वर्षों से अधिक समय से ट्रेनें चलाई जा रही है. जबकि इस पुल के बन जाने और उस पर ट्रेनों का आवागमन चालू हो जाने से यात्रियों को काफी राहत महसूस होगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




