Lockdown: उत्तराखंड से पैदल चले थे चार मजदूर, एक की हो गई मौत
Author : Radheshyam Kushwaha Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 May 2020 4:05 PM
देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद उत्तराखंड के नैनीताल स्थित लाल कुंवा से एक मजदूर चल दिया. मजदूर को खाने-पीने व रहने की बहुत परेशानी हो रही थी. लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया था. भोजन की व्यवस्था नहीं होने के कारण वह पैदल ही अपने घर चल पड़ा. मजदूर को पैदल चलना महंगा पड़ गया. मजदूर पैदल चलने के कारण गुरुवार की देर शाम को उसकी मौत हो गयी.
बलिया. देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद उत्तराखंड के नैनीताल स्थित लाल कुंवा से एक मजदूर चल दिया. मजदूर को खाने-पीने व रहने की बहुत परेशानी हो रही थी. लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया था. भोजन की व्यवस्था नहीं होने के कारण वह पैदल ही अपने घर चल पड़ा. मजदूर को पैदल चलना महंगा पड़ गया. मजदूर पैदल चलने के कारण गुरुवार की देर शाम को उसकी मौत हो गयी. मामला उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी मनियर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत दिघेड़ा अंतर्गत गौराबंगही का है. मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय निवासी श्याम बहादुर यादव उम्र 55 वर्ष पुत्र केदार यादव अक्सर मजदूरों को लेकर उत्तराखंड के लाल कुंवा जाते थे. वहां, मजदूर नदी से रेत, बजरी निकालते थे.
इस वर्ष भी वह कुछ मजदूरों को लेकर होली के दो दिन बाद गए थे. वहां, लाल कुंवा के गौला गेट जिला नैनीताल में मजदूरों के साथ थे. नदी में अधिक पानी होने के कारण काम बंद था. लिहाजा मजदूर गेहूं की कटिया किया करते थे और किसी तरह से अपनी जीविका चलाते थे. इसके बाद नदी का पानी कम होने पर मुश्किल से चार रोज काम किए थे. तब तक लॉकडाउन हो गया. वहां से वे अपने साथ गए करीब 10 मजदूरों के साथ पैदल निकल पड़े. 06 मजदूर आगे निकल गए थे. उनके साथ चार मजदूर थे. तीन दिन बाद करीब 100 किलोमीटर की यात्रा तय कर पीलीभीत पहुंचे. उनके साथ आये दया राजभर निवासी गौरी शाहपुर मठिया ने बताया कि बिना खाए-पिए, चाय और बिस्कुट के सहारे यह यात्रा इन लोगों ने पूरी की थी. बीच रास्ते में ही पीलीभीत के पास श्याम बहादुर यादव को पैरालाइसिस हो गया. उनके साथ चल रहे मजदूरों ने इसकी सूचना परिजनों को दी.
परिजन उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी से संपर्क कर सहयोग की मांग की. उनकी पहल पर किसी स्थानीय नेता के सहयोग से उन्हें पीलीभीत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. सिर्फ दया राजभर को वहां के प्रशासन ने श्याम बहादुर के साथ रहने को कहा. बाकी लोगों को वहीं क्वॉरेंटाइन कर दिया गया. वहां से उन्हें बरेली बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. इसके बाद स्थिति में सुधार न होने पर रविवार को घर ले आया गया. गुरुवार के दिन किसी डॉक्टर के यहां ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. मृतक का बड़ा बेटा मनोज यादव लॉकडाउन में बंगलुरु में फंसा हुआ है.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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