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Gorakhpur: याद किए गए काकोरी कांड के नायक, जिला जेल में मनाया गया पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का बलिदान दिवस

Updated at : 19 Dec 2022 6:05 PM (IST)
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Gorakhpur: याद किए गए काकोरी कांड के नायक, जिला जेल में मनाया गया पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का बलिदान दिवस

Gorakhpur News: काकोरी कांड के नायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का आज गोरखपुर जिला जेल में बलिदान दिवस मनाया गया है. राम प्रसाद बिस्मिल को लखनऊ के सेशन कोर्ट से फांसी की सजा सुनाई गई थी. और उन्हें गोरखपुर जेल लाया गया जहां पर उन्हें 19 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई.

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Gorakhpur News: मालिक तेरी रजा रहे और तू ही तू रहे बाकी ना मैं रहूं न मेरी आरजू रहे. फांसी के लिए जाने से पहले महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल के मुंह से निकली यह शेर आजादी के दीवानों के सीने में जोश ही नहीं भरा बल्कि यह अंग्रेजों की ताबूत की अंतिम कील साबित हुई. रामप्रसाद बिस्मिल्लाह फांसी से पहले जेल की कालकोठरी की दीवारों पर अपने नाखूनों से इस शेर को लिखा था और यह शेर आज भी लोगों के दिलों में आजादी का जज्बा जगा देता है.

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स्वतंत्रत संग्राम आंदोलन में काकोरी एक्शन के नायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर सेंट्रल जेल में 1927 को फांसी दी गई थी. उन्हीं की याद में जेल में श्रद्धांजलि सभा, यज्ञ हवन इत्यादि का आयोजन किया गया. काकोरी कांड के नायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को लखनऊ के सेशन कोर्ट से फांसी की सजा सुनाई गई थी. उसके बाद उन्हें गोरखपुर जेल लाया गया जहां पर उन्हें 19 दिसंबर 1927 को प्रातः 6:30 बजे फांसी दी गई .

गुरुकृपा संस्थान ने आयोजित किया सांस्कृतिक कार्यक्रम
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पंडित राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे. जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी. वह काकोरी कांड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे. तथा हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य भी थे. आज कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन कर रहा है इसी कड़ी में गोरखपुर के सेंट्रल जेल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा एवं फांसी घर पर लोगों ने फूल व माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया. इस अवसर पर गुरुकृपा संस्थान द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया.

गुरुकृपा संस्थान के अध्यक्ष ने क्या कहा
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गुरुकृपा संस्थान के अध्यक्ष बृजेश राम त्रिपाठी ने बताया कि आज सुखद संयोग यह है कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल 11 जून 1897 को शाहजहांपुर में जन्म लिए थे. उस समय भीमसेनी एकादशी निर्जला एकादशी के रूप में जाना जाता था. और जब उनको आज 1927 में फांसी दी गई थी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन फांसी हुई थी. उनका जन्म और बलिदान दिवस एकादशी के दिन का है जो एक सुखद सयोग है. आज भी 95 वर्ष बाद 19 दिसंबर है और पौष माह की एकादशी है.

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जेलर ने बताया कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को आज के दिन जिला कारागार में फांसी दी गई थी. उन्होंने जो आंदोलन चलाया वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की गति को एकदम मोड़ दिया. पहले गतिविधियां सीमित लोगों तक थी. इस आंदोलन से आम जनता स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी. जिससे हमारी स्वतंत्रता आंदोलन की परिधि काफी व्यापक हुई और आम जनता के जुड़ाव से पूरे देश को आजादी मिली.

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शहीद अशफाक उल्ला खां के पुत्र अशफाक उल्ला खां ने बताया कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की शहादत पूरे देश के लिए बहुत बड़ी शहादत है. शहीद अशफाक उल्ला खां 30 साल की उम्र में फांसी के फंदे को चूमा और देश को अमर कर गए. मेरा सौभाग्य है कि मुझे यहां आने का मौका मिला और मैं चाहता हूं कि बलिदानियों का जो इतिहास है वह आज के नौजवानों तक पहुंचे. हमें बहुत खुशी हो रही है कि यहां की बहुत सारी संस्थाएं आज आकर रामप्रसाद बिस्मिल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

रिपोर्ट – कुमार प्रदीप, गोरखपुर

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Shweta Pandey

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By Shweta Pandey

Shweta Pandey is a contributor at Prabhat Khabar.

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