बंगाल में फीकी रहेगी दुर्गा पूजा की चमक? आर्थिक तंगी और कॉरपोरेट की दूरी से बढ़ी आयोजकों की टेंशन

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कोलकाता के कुम्हारटोली में मूर्ति बनाने में व्यस्त एक मूर्तिकार.

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Durga Puja Crisis in Bengal: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा 2026 पर आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कॉरपोरेट फंडिंग में कमी और आरजी कर घटना के बाद बदले बाजार सेंटिमेंट ने पूजा कमेटियों की चिंता बढ़ा दी है. पढ़ें कैसे प्रभावित हो रही है बंगाल की सबसे बड़ी विरासत.

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Durga Puja Crisis in Bengal: पश्चिम बंगाल की पहचान और दुनिया भर में मशहूर दुर्गा पूजा इस साल एक अभूतपूर्व संकट के मुहाने पर है. ‘सिटी ऑफ जॉय’ में महालया की गूंज सुनाई देने में अब कुछ ही समय शेष है, लेकिन पूजा कमेटियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं. बंगाल की अर्थव्यवस्था में हजारों करोड़ का योगदान देने वाले इस महापर्व पर बजट की कमी, कॉरपोरेट फंडिंग में गिरावट और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के कारण संकट के काले बादल मंडला रहे हैं. प्रभात खबर की विशेष रिपोर्ट में जानिए, आखिर क्यों इस साल की दुर्गा पूजा पिछले वर्षों की तुलना में अलग और चुनौतीपूर्ण होने वाली है.

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बजट में भारी कटौती

कोलकाता की सड़कों पर दिखने वाले आलीशान और थीम आधारित पंडाल इस साल शायद उतने भव्य न हों, क्योंकि आयोजकों को फंडिंग के अभाव, महंगाई की मार और विज्ञापनों की कमी का संकट झेलना पड़ रहा है.

  • फंडिंग का अभाव : छोटे और मंझले पूजा आयोजकों का कहना है कि विज्ञापन और चंदे (सब्स्क्रिप्शन) में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आयी है.
  • महंगाई की मार : बांस, कपड़ा, रंग और श्रम की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है. बजट कम होने और लागत बढ़ने से आयोजक अब ‘थीम’ की बजाय सादगी पर जोर दे रहे हैं.
  • विज्ञापनों से दूरी : बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों ने इस साल विज्ञापनों पर खर्च कम कर दिया है, जिसका सीधा असर पूजा बजट पर पड़ा है.

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कॉरपोरेट स्पांसरशिप में बड़ी गिरावट

आमतौर पर दुर्गा पूजा के दौरान बड़े-बड़े होर्डिंग्स और गेट्स स्पांसर्स से भरे रहते थे, लेकिन इस बार नजारा कुछ और होने वाला है. कई कॉरपोरेट घरानों ने अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बदली है. वे अब फिजिकल ब्रांडिंग की बजाय डिजिटल विज्ञापन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.

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आरजी कर घटना का साया और मंदी की आहट

राज्य में हाल ही में हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और उसके बाद हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने भी बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है. कई ब्रांड्स ने बड़े आयोजनों से फिलहाल दूरी बनाये रखने का फैसला किया है. आर्थिक मंदी की आहट के बीच कंपनियों को डर है कि इस बार खरीदारों की संख्या कम रह सकती है.

कारीगरों और शिल्पकारों की बढ़ी मुसीबत

कुम्हारटोली के मूर्तिकार और पंडाल बनाने वाले कारीगर सबसे ज्यादा प्रभावित होते दिख रहे हैं. कई कमेटियों ने ऐन वक्त पर मूर्तियों के साइज छोटे कर दिये हैं या डेकोरेशन का बजट घटा दिया है. उनका कहना है कि आयोजकों को चंदा नहीं मिल रहा है, जिससे वे कारीगरों को एडवांस देने में असमर्थ हैं. ढाकी (ढोल बजाने वाले) और लाइट डेकोरेटर्स के लिए भी यह साल चुनौतियों भरा रहने वाला है.

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Durga Puja Crisis in Bengal: क्या कहती हैं पूजा कमेटियां?

फोरम फॉर दुर्गोत्सव के सदस्यों के अनुसार, बंगाल की दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, लाखों लोगों की आजीविका का जरिया है. अगर कॉरपोरेट और सरकार की ओर से सहयोग में कमी आती है, तो इसका असर राज्य की जीडीपी (GDP) पर भी पड़ेगा. हालांकि, आयोजकों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे पूजा के दिन नजदीक आयेंगे, भक्तों का उत्साह आर्थिक बाधाओं को पीछे छोड़ देगा.

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