Rourkela News: स्मार्ट सिटी राउरकेला में पिछली बीजद सरकार के समय में शुरू की गयी कई परियोजनाएं 2025 में भी पूरी नहीं हो पायी हैं. वहीं वर्तमान भाजपा की डबल इंजन सरकार ने भी कई घोषणाएं की हैं, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ है. स्थिति वैसी ही है, जैसी पिछली सरकार के समय थी. शहरवासियों को उम्मीद है कि डबल इंजन सरकार इन परियोजनाओं को 2026 में पूरी करेगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक दलों में इच्छाशक्ति की कमी के कारण शहर की विकास परियोजनाओं की यह स्थिति है.
मार्च 2025 में हुई थी हैंगिंग ब्रिज की घोषणा
मार्च, 2025 में सड़क एवं आवास मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने वेदव्यास में ब्राह्मणी नदी पर एक आधुनिक कांच का पुल (हैंगिंग ब्रिज) बनाने की घोषणा की थी. मंत्री ने बताया था कि 450 मीटर लंबे इस पुल की लागत 35 करोड़ रुपये होगी और काम जल्द ही शुरू होगा. इसमें पहले बताया गया कि यह कांच का पुल होगा. लोग पुल पर जाते समय नदी का नजारा भी देख पायेंगे. हालांकि, बाद फिर बताया गया कि कांच का पुल नहीं बनेगा, यह सामान्य सीमेंट का पुल होगा. लेकिन घोषणा के नौ महीने बाद भी एक ईंट नहीं रखी गयी.
660 करोड़ स्वीकृत हुए, लेकिन जगह की कमी के कारण नहीं शुरू हुआ काम
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री दोनों ने राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) के विस्तार की घोषणा की थी. इसके लिए 660 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं. लेकिन जगह की कमी के कारण परियोजना का काम शुरू नहीं हुआ है. वहीं आज तक सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है. इसके अलावा स्मार्ट सिटी के तहत शुरू की गयी कई परियोजनाओं को 2025 तक पूरा करने का वादा विभागीय अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था, वह भी पूरा नहीं हो सका.25 करोड़ हुए खर्च, रिक्रियेशन पार्क अब भी अधूरा
सेक्टर-20 बैकुंठ घाट के पास लगभग 42 एकड़ क्षेत्र में मनोरंजन के लिए बन रहा रिक्रियेशन पार्क अब भी अधूरा है. इस परियोजना पर 25 करोड़ से अधिक राशि खर्च हो चुकी है. जो काम हुआ है, वह भी जंगल में तब्दील हो चुका है. रघुनाथपाली विधायक दुर्गा चरण तांती ने इस काम का ठेका लेने वाली एजेंसी को जल्द से जल्द काम खत्म करने को लेकर ताकीद भी की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया था. अब पार्क की वास्तविक स्थिति बिलकुल अलग है. किसी के पास भी इस बात का जवाब नहीं है कि शेष काम कब पूरा होगा.छेंड में तीन साल बाद भी विज्ञान उद्यान का 30 फीसदी काम बाकी
छेंड कॉलोनी में विज्ञान उद्यान और तारामंडल में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है. लगभग 7.49 एकड़ क्षेत्र में निर्माणाधीन यह उद्यान तीन वर्षों से अधर में लटका है. इसका 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है. शेष 30 फीसदी काम जारी है. एजेंसी को इसे मई, 2025 तक पूरा करने के लिए कहा गया था. लेकिन वर्ष 2025 खत्म होने के बाद भी इसका काम पूरा नहीं हो सका है. वहीं बालू घाट के बगल में बहुप्रतीक्षित थोक मंडी का काम केवल चहारदीवारी बनाने तक ही सीमित रह गया है. इसी प्रकार ओमफेड फैक्ट्री के पास द्वितीय विज्ञान केंद्र का काम भी शुरू नहीं हो पाया है. जिससे अब देखना यह है कि वर्ष 2026 में यह विकास परियोजनाएं पूरी हो पाती है या नहीं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

