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Rourkela News: एनआइटी के शोधार्थियों ने खाद्य गुणवत्ता की रीयल-टाइम जांच के लिए स्मार्ट आइओटी सक्षम उपकरण विकसित किया

Updated at : 21 Mar 2025 12:13 AM (IST)
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Rourkela News: एनआइटी के शोधार्थियों ने खाद्य गुणवत्ता की रीयल-टाइम जांच के लिए स्मार्ट आइओटी सक्षम उपकरण विकसित किया

Rourkela News: एनआइटी राउरकेला के शोधार्थियों ने खाद्य गुणवत्ता की रीयल-टाइम जांच के लिए स्मार्ट आइओटी सक्षम उपकरण विकसित किया है.

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Rourkela News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) राउरकेला और यूनिवर्सिटी ऑफ द फिलीपींस लॉस बानोस के शोधकर्ताओं ने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी के लिए एक आइओटी सक्षम स्मार्ट डिवाइस विकसित किया है. यह कलरीमीटर रियल-टाइम में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में वसा के रंग और तापमान में होने वाले बदलाव को ट्रैक करता है, जिससे यह विशेष रूप से ओलियोजेल्स के अध्ययन के लिए उपयोगी बनता है.

एनआइटी की टीम ने हासिल किया पेटेंट

इस शोध का निष्कर्ष जर्नल ऑफ फूड इंजीनियरिंग, में प्रकाशित किया गया है और टीम ने प्रौद्योगिकी के लिए एक पेटेंट भी हासिल किया है (पेटेंट संख्या 560281, आवेदन संख्या 202231075092). डॉ कुनाल पाल (प्रोफेसर, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा इंजीनियरिंग विभाग, एनआइटी राउरकेला) के नेतृत्व में यह अध्ययन देबलू साहू (पीएचडी स्कॉलर), डॉ सिरसेंदु शेखर राय (सहायक प्रोफेसर, नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग), डॉ शिवरामन जयरामन (सहायक प्रोफेसर, एनआइटी राउरकेला), डॉ बाला चक्रवर्ती (सहायक प्रोफेसर, एनआइटी राउरकेला) और डॉ फ्लोरेंडो फ्लोरेस (प्रोफेसर, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, फिलीपींस लॉस बानोस विश्वविद्यालय) ने मिलकर किया है. कई प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बनावट और स्थिरता के लिए ठोस वसा पर निर्भर करते हैं, लेकिन इनमें अक्सर अस्वस्थ ट्रांस और संतृप्त वसा होती है, जिससे हृदय रोग और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है. इस समस्या के समाधान के लिए, खाद्य उद्योग ओलियोजेल का अनुसंधान कर रहा है, जो तरल तेल को मोम, पौधे आधारित पॉलीमर या अन्य संरचनात्मक एजेंटों जैसे योजकों का उपयोग करके जेल (ठोस चिपचिपा घोल) जैसी संरचना में बदलते हैं और एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प प्रदान करते हैं. हालांकि खराब क्रिस्टलीकरण के कारण तेल के प्रवासन (ऑयल माइग्रेशन) से इनमें अस्थिरता की समस्या होती है, जिससे खाद्य गुणवत्ता प्रभावित होती है.

जटिल उपकरणों की आवश्यकता के बिना ओलियोजेल की कर सकेगा जांच

ओलियोजेल की स्थिरता का आकलन करने के पारंपरिक तरीकों में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे विवर्तन और अंतर स्कैनिंग कैलोरीमेट्री जैसे महंगे प्रयोगशाला उपकरण और कुशल तकनीशियनों की आवश्यकता होती है. जिससे छोटे खाद्य निर्माताओं के लिए गुणवत्ता नियंत्रण मुश्किल हो जाता है. इस समस्या को हल करने के लिए अनुसंधान दल ने एक लागत प्रभावी उपकरण विकसित किया है, जो क्रिस्टलीकरण के दौरान ओलियोजेल में सूक्ष्म रंग परिवर्तनों का पता लगाता है. यह रंगमिति दृष्टिकोण जटिल उपकरणों की आवश्यकता के बिना ओलियोजेल की स्थिरता की जांच करने का एक प्रभावी तरीका प्रदान करता है. आइओटी तकनीक के एकीकरण से रिमोट मॉनिटरिंग, डेटा लॉगिंग और स्वचालित विश्लेषण संभव हो जाता है, जिससे यह शोध और औद्योगिक दोनों अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनता है.

डिवाइस खाद्य उत्पादों की ताजगी का पता लगाने में भी सक्षम

विकसित तकनीक के बारे में बताते हुए एनआइटी राउरकेला के जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा इंजीनियरिंग विभाग के प्रो कुनाल पाल ने कहा कि इस स्मार्ट डिवाइस में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं को महत्वपूर्ण रूप से बेहतर बनाने की क्षमता है. ओलियोजेल के अलावा, इसका उपयोग विभिन्न अन्य खाद्य उत्पादों की निगरानी के लिए किया जा सकता है, जो रंग और तापमान खाद्य उत्पादों के गुणों और स्थिरता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा, यह डिवाइस कई खाद्य उत्पादों की ताजगी का पता लगाने में भी सक्षम है. उदाहरण के लिए, डेयरी व बेकरी उत्पाद, कन्फेक्शनरी और पौधे-आधारित मांस के विकल्प, सभी इस तकनीक का उपयोग करके वास्तविक समय की गुणवत्ता मूल्यांकन से लाभान्वित हो सकते हैं. शोध दल का मानना है कि यह उपकरण न केवल खाद्य विज्ञान अनुसंधान को बढ़ायेगा, बल्कि खाद्य निर्माताओं को कम लागत पर बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण प्रथाओं को लागू करने में भी सक्षम बनायेगा. वसा क्रिस्टलीकरण, ऑक्सीकरण और गिरावट पर निरंतर डेटा प्रदान करके, यह उपकरण दुनिया भर के उपभोक्ताओं के लिए अधिक विश्वसनीय और स्वस्थ खाद्य उत्पाद विकसित करने में मदद कर सकता है.

उपकरण को एआइ से एकीकृत करने का हो रहा प्रयास

प्रयोगशाला स्तर पर, इस उपकरण की अनुमानित लागत लगभग 50,000 रुपये है, जो व्यावसायिक रूप से उपलब्ध उपकरणों की तुलना में कम है. शोध के अगले चरण में, अनुसंधान दल खाद्य उत्पादों में होने वाली खराबी का जल्द पता लगाने के लिए उपकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) को एकीकृत करने का प्रयास कर रहा है ताकि खाद्य अपव्यय को न्यूनतम किया जा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIPIN KUMAR YADAV

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By BIPIN KUMAR YADAV

BIPIN KUMAR YADAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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