Sundergarh News : 36 महीनों में हाथियों के हमले में 36 लोगों की मौत, 25 से अधिक घायल

Updated at : 27 Dec 2025 12:36 AM (IST)
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Sundergarh News :  36 महीनों में हाथियों के हमले में 36 लोगों की मौत, 25 से अधिक घायल

पिछले तीन वर्षों (2023 से 2025) में अब तक हाथियों के हमले में 36 लोगों की जान जा चुकी है.

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Sundergarh News : सुंदरगढ़ जिले में हाथियों के हमलों से जानमाल का भारी नुकसान हो रहा है. जिले के तीन वन क्षेत्रों में से राउरकेला और बणई में हर साल हाथियों के हमले होते हैं. पिछले तीन वर्षों (2023 से 2025) में अब तक हाथियों के हमले में 36 लोगों की जान जा चुकी है. वर्ष 2024 में 16 लोगों की और 2025 में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. इन तीन वर्षों में मरने वालों छह महिलाएं शामिल हैं. वर्ष 2023 में मरने वालों में अनुआ ओराम, धली राणा, सुरनी बारला, नेगी एक्का, सुरेंद्र तिर्की, चावा एक्का और बिशु बिंचिया शामिल थे. 2024 में नरसिंह महतो, तामियन टेटे, शुक्रमणि समासी, देवसागर सिंह, राजू बागे, सावित्री गौड़, रवि सिंह, रोहित माझी, सुनील बागे, अजीत बारा, प्रदीप बिल्लुंग, विष्णु तिग्गा, साधु बड़ाइक, बेलास एक्का, नेने धनवार और सुखबहाल साहू ने अपनी जान गंवाई. वहीं 2025 में अब तक गणपति सिंह, आनंद प्रकाश झरिया, चाहो एक्का, फ्रांसिस कुजूर, रुपान समासी, बिसराम सुरिन, पूर्णिमा दस्तीदार, मंगरा कुजुर और केदार राउत अपनी जान गंवा चुके हैं. हाथियों के हमले में 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए. 2023 में 10, 2024 में 12 और 2025 में 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. जंगलों में हाथियों के लिए चूंकि खाद्य आपूर्ति पहले जैसी अच्छी नहीं है, इसलिए भोजन की तलाश में जंगलों और वनों की ओर से हाथी पलायन करने को मजबूर है. विदित हो कि राउरकेला वन में 6 रेंज हैं : कुआरमुंडा, पानपोष, बिसरा, बिरमित्रपुर, राजगांगपुर और बांकी. कुआरमुंडा रेंज के बिरडा, कचारू, कलुंगा, बिसरा रेंज के खैरटोला, बिसरा, पानपोष रेंज के डोलाकुदर स्टील टाउनशिप, बिरमित्रपुर रेंज के हाथीबारी और बांकी रेंज के बांकी सेक्शन में हाथियों के झुंड ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है.

हाथियों की गतिविधियों ने कई गांवों की चिंता बढ़ायी

हाथियों के कारण कुआरमुंडा के मुसापाली, रांटो बिरकेरा, रामपुर, पीतल, पंडकीपत्थर, कंटारबहाल आदि गांवों के लोग अक्सर रात में जागते रहते हैं. परिवार बारी-बारी से गांव के प्रवेश द्वार पर पहरा दे रहे हैं ताकि हाथियों के झुंड की आवाजाही को रोका जा सके. वहीं दूसरी ओर वन विभाग द्वारा हाथियों को रोकने के लिए लगाई गई सौर बाड़ और खाइयां कारगर साबित नहीं हो रही हैं, जिसके चलते ऐसी घटनाएं हो रही हैं, ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है.

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