Bhubaneswar News: ओडिशा के सरकारी अस्पतालों में सोमवार सुबह चिकित्सकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर दो घंटे तक कामकाज का बहिष्कार किया, जिसकी वजह से ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं. ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के सदस्यों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर सुबह नौ बजे से पूर्वाह्न 11:00 बजे तक ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया. ओएमएसए ने राज्य सरकार से उनकी मांगों को पूरा करने की अपील की.
विभिन्न मुद्दों को लेकर 20 नवंबर से कर रहे प्रदर्शन
ओएमएसए के अध्यक्ष किशोर मिश्रा ने बताया कि चिकित्सकों ने 20 नवंबर से विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. उन्होंने कहा कि पहले चरण में चिकित्सकों ने काली पट्टी पहनकर कामकाज किया और 26 दिसंबर से ओपीडी सेवा का एक घंटे तक बहिष्कार किया. सोमवार से ओपीडी बहिष्कार बढ़ाकर दो घंटे कर दिया गया है. आपातकालीन, भर्ती मरीजों की देखभाल और सर्जरी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी. अब से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला मुख्यालय अस्पतालों में सुबह नौ बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी.
चिकित्सक विरोध प्रदर्शन खत्म करें, सरकार मांगों पर कर रही विचार : मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे विरोध प्रदर्शन खत्म करें, क्योंकि सरकार सहानुभूति पूर्वक उनकी मांगों पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों की जांच करने के लिए एक अंतर-विभागीय समिति गठित की है. मिश्रा ने हालांकि कहा कि पिछली बीजद सरकार ने भी एक मंत्री समिति बनायी थी, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला. हम इन समितियों पर विश्वास नहीं करते. हम मुख्यमंत्री से इस समस्या का समाधान करने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं. राज्य में सरकारी चिकित्सकों की संख्या 6,000 से थोड़ी अधिक है, जबकि स्वीकृत संख्या 15,776 है. उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं, जिसकी वजह से मौजूदा चिकित्सकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. लोगों की समस्याओं के बारे में पूछे जाने पर, मिश्रा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रहेगा, क्योंकि चिकित्सक दो घंटे के बहिष्कार के बाद काम करेंगे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

