सिस्टम रुका, इंसानियत दौड़ी! गणतंत्र दिवस मेले के बाद मुखिया ने बचाईं कैंपर सवारों की जान

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :27 Jan 2026 10:30 AM (IST)
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West Singhbhum News

पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड में सड़क हादसे में घायल को इलाज के लिए ले जाते हुए.

West Singhbhum News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी ब्लॉक में गणतंत्र दिवस मेले के बाद कैंपर पलट गया. हादसे में छह लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि अन्य को भी चोटें आईं. 108 एंबुलेंस नहीं पहुंची, लेकिन पटेता पंचायत के मुखिया ने अपने निजी खर्च पर घायलों को टिस्को अस्पताल पहुंचाया और उनकी जान बचाई. पुलिस ने कैंपर जब्त कर जांच शुरू कर दी है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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West Singhbhum News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत जटिया थाना क्षेत्र के कुंदरीझोर गांव में गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित मेले की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब मेले से लौट रहे ग्रामीणों का कैंपर वाहन अचानक पलट गया. यह दर्दनाक सड़क हादसा सोमवार शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट पर परम साई टोला के सामने हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कैंपर तेज रफ्तार में था और मोड़ पर संतुलन बिगड़ने से सड़क किनारे पलट गया.

मेले से लौट रहे थे ग्रामीण, अचानक पलटा कैंपर

पटेता पंचायत के मुखिया जेना पूर्ति ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त कैंपर गुआ क्षेत्र का है और इसमें सवार सभी लोग गणतंत्र दिवस मेले को देखकर अपने गांव लतार कुंदरीझोर लौट रहे थे. हादसा इतना अचानक हुआ कि वाहन में बैठे लोग संभल भी नहीं पाए. कैंपर के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई. आसपास के ग्रामीण दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने लगे.

छह गंभीर, कई अन्य घायल

इस हादसे में छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कुछ अन्य लोगों को भी हल्की-फुल्की चोटें आई हैं. घायलों में हरि तांती, बोटली देवी, निरंजन तांती, गंगा लोहार, मोहन तांती, युद्धिष्ठिर दास और एक अन्य महिला शामिल हैं. सभी घायल ग्राम बेड़ा, राईका टोला, करमाचागुटू के निवासी बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद कई घायल दर्द से तड़पते रहे और कुछ की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी.

108 एंबुलेंस नहीं पहुंची तो बढ़ गया संकट

घटना के तुरंत बाद मुखिया जेना पूर्ति और ग्रामीणों ने कई बार 108 एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन काफी देर तक कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला. करीब एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार किया गया. इस दौरान घायलों की हालत और ज्यादा गंभीर होती जा रही थी. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस पहुंच जाती, तो घायलों को जल्दी इलाज मिल सकता था.

जब सिस्टम फेल हुआ, तब मुखिया बने सहारा

एंबुलेंस नहीं आने पर मुखिया जेना पूर्ति ने खुद मोर्चा संभाला. उन्होंने अपने निजी खर्च पर एक टाटा मैजिक वाहन बुक किया और सभी घायलों को इलाज के लिए टिस्को अस्पताल, नोवामुंडी भिजवाया. खराब सड़क और अंधेरे की वजह से वाहन को अस्पताल पहुंचने में करीब दो घंटे लग गए. रात करीब 9 बजे घायलों को अस्पताल लाया गया, जहां स्ट्रेचर के सहारे उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया.

दो घायलों की हालत गंभीर

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, घायलों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य का इलाज जारी है. डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है. हादसे की खबर मिलते ही घायलों के परिजन भी अस्पताल पहुंचने लगे. अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा और हर कोई घायलों की हालत जानने को बेचैन दिखा.

पुलिस मौके पर पहुंची, जांच शुरू

घटना की सूचना मिलते ही जटिया थाना प्रभारी बोआस मुंडु दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया, यातायात व्यवस्था संभाली और ग्रामीणों से पूरी जानकारी ली. पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कैंपर वाहन को जब्त कर थाने ले जाया है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है.

108 सेवा पर भड़के ग्रामीण, जांच की मांग

हादसे के बाद ग्रामीणों में आपातकालीन सेवा 108 को लेकर भारी नाराजगी है. लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में अगर एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा ही समय पर न पहुंचे, तो आम आदमी किस भरोसे जिए. स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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फिर उठा बड़ा सवाल

मुखिया और पुलिस की तत्परता से घायलों की जान तो बच गई, लेकिन यह हादसा एक बार फिर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. जब सिस्टम रुक जाता है, तब क्या हर बार कोई मुखिया, कोई फरिश्ता आगे आएगा और आपातकालीन सेवाएं आखिर समय पर क्यों नहीं पहुंच पातीं?

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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