झारखंड प्रशासनिक सेवा अधिकारी आशुतोष कुमार की बर्खास्तगी आदेश रद्द, हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने उठाया कदम

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 28 May 2026 6:36 PM

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झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार. फाइल फोटो.

Ranchi News: झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक सेवा अधिकारी आशुतोष कुमार की बर्खास्तगी रद्द कर दी है. चतरा में 6.48 करोड़ रुपये की अवैध निकासी मामले में उन पर कार्रवाई हुई थी. अब उन्हें 10 फरवरी 2021 से निलंबित माना जायेगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से मनोज लाल की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आशुतोष कुमार की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार की ओर से यह फैसला लिया गया है. सरकार ने बर्खास्तगी आदेश निरस्त करते हुए कहा है कि 10 फरवरी 2021 से उन्हें निलंबित माना जायेगा. आशुतोष कुमार झारखंड प्रशासनिक सेवा के चतुर्थ सीमित बैच के अधिकारी हैं. उनके खिलाफ चतरा जिले में पदस्थापना के दौरान वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे. इन्हीं आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें पहले निलंबित और बाद में बर्खास्त कर दिया गया था.

चतरा में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद पर थे तैनात

जानकारी के अनुसार आशुतोष कुमार चतरा जिले में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद पर कार्यरत थे. इसके साथ ही वे वहां के प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. इसी दौरान उनके कार्यकाल में करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी का मामला सामने आया था. बताया गया कि जुलाई 2018 में चतरा के तत्कालीन उपायुक्त ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर मुख्यालय भेजा था. आरोप था कि उनके कार्यकाल में कुल 43 बैंक ट्रांसफर के माध्यम से लगभग 6.48 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गयी.

अग्निकांड के बाद नहीं दी गयी थी सूचना

अधिकारी पर यह भी आरोप लगाया गया था कि नवंबर 2017 में कार्यालय में हुए अग्निकांड के दौरान रोकड़ पंजी और चेकबुक जल गये थे, लेकिन इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को समय पर नहीं दी गयी. इसे प्रशासनिक लापरवाही माना गया था. इसके अलावा विभागीय जांच में अन्य कई आरोप भी सामने आये थे. इन आरोपों को गंभीर मानते हुए जुलाई 2018 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी.

विभागीय कार्रवाई के बाद हुई थी बर्खास्तगी

विभागीय जांच पूरी होने के बाद सरकार ने आशुतोष कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया था. बर्खास्तगी के खिलाफ उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया. हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी का आदेश वापस ले लिया. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अधिकारी को सेवा में बहाल नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें 10 फरवरी 2021 से निलंबित माना जायेगा.

न्यायिक प्रक्रिया के बाद बदली स्थिति

इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक स्थिति बदल गयी है. फिलहाल अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों और विभागीय प्रक्रिया को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है. कानूनी जानकारों का कहना है कि उच्च न्यायालय द्वारा बर्खास्तगी आदेश रद्द किये जाने के बाद सरकार को नया प्रशासनिक निर्णय लेना पड़ा. हालांकि, निलंबन जारी रहने का मतलब है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.

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चर्चाओं में रहा था करोड़ों की निकासी का मामला

चतरा जिले में 6.48 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी का मामला उस समय काफी चर्चाओं में रहा था. विभागीय स्तर पर इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया था. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. प्रशासनिक और कानूनी हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा जारी है. आने वाले दिनों में इस मामले में सरकार और विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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